Iran Israel US War: एनर्जी क्राइसेस बढ़ा तो ऑटो वर्ल्ड पर कितना पड़ेगा असर, कितनी महंगी हो जाएंगी गाड़ियां?
Israel-Iran War: जब दुनिया के किसी बड़े तेल उत्पादक क्षेत्र में युद्ध या तनाव बढ़ता है, तो उसका असर सिर्फ उस देश तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है.

मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के बीच ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने होर्मुज स्ट्रेट को जहाजों के लिए बंद कर दिया है. ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच चल रही यह जंग दुनिया के तेल व्यापार को हिला सकता है. जब दुनिया के किसी बड़े तेल उत्पादक क्षेत्र में युद्ध या तनाव बढ़ता है, तो उसका असर सिर्फ उस देश तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है.
अगर ईरान से जुड़ा वॉर या मिडिल ईस्ट में बड़ा सैन्य संघर्ष होता है, तो सबसे पहले कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होगी. इस क्षेत्र से दुनिया के बड़े हिस्से को तेल मिलता है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ने लगती हैं. तेल महंगा होते ही पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ते हैं, और यही बढ़ोतरी आगे चलकर ऑटो इंडस्ट्री पर सीधा असर डालती है.
ऑटो इंडस्ट्री पर कितना असर?
- सबसे पहले आम लोगों पर असर ईंधन की कीमतों के रूप में दिखाई देता है. पेट्रोल-डीजल महंगा होने से गाड़ी चलाना खर्चीला हो जाएगा. जब ट्रांसपोर्ट महंगा होता है तो हर चीज़ की लागत बढ़ती है, जिससे महंगाई बढ़ने लगती है. इसका असर गाड़ियों की मांग पर भी पड़ सकता है, क्योंकि लोग नई गाड़ी खरीदने से पहले ज्यादा सोच-समझकर फैसला लेते हैं.
- दूसरा बड़ा असर ऑटोमोबाइल कंपनियों पर पड़ता है. गाड़ी बनाने में जिन चीजों का इस्तेमाल होता है—जैसे प्लास्टिक, रबर, सिंथेटिक फाइबर, पेंट और कई केमिकल—इनमें से काफी चीजें पेट्रोलियम से बनती हैं. जब कच्चा तेल महंगा होता है, तो इन कच्चे माल की कीमत भी बढ़ जाती है.
- इसके अलावा फैक्ट्रियों में बिजली और ऊर्जा खर्च भी बढ़ सकता है। फिर तैयार गाड़ियों को ट्रकों या जहाजों के जरिए डीलर तक पहुंचाने का खर्च भी ज्यादा हो जाता है. इन सब कारणों से कंपनियों की कुल उत्पादन लागत बढ़ती है.
कितनी महंगी हो जाएंगी गाड़ियां?
- अगर तेल की कीमतें थोड़े समय के लिए बढ़ती हैं, तो कंपनियां कुछ समय तक खुद नुकसान सहकर कीमतें स्थिर रख सकती हैं. लेकिन अगर संकट लंबा चलता है और तेल लगातार महंगा रहता है, तो कंपनियां गाड़ियों की कीमत बढ़ाने के लिए मजबूर हो सकती हैं. ऐसे हालात में कार और बाइक की कीमतों में 2% से 10% तक की बढ़ोतरी संभव हो सकती है,
- यह इस बात पर निर्भर करेगा कि तेल के दाम कितने ऊंचे जाते हैं और कितने समय तक बने रहते हैं. जब ईंधन महंगा होता है तो लोग ज्यादा माइलेज देने वाली गाड़ियों को प्राथमिकता देते हैं. छोटी कारों, सीएनजी मॉडल, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग बढ़ सकती है.
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Source: IOCL


























