अब Ambassador भी हुई इलेक्ट्रिक, BaaS के साथ ही ADAS जैसे फीचर्स भी शामिल
Ambassador Electric: इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य सिर्फ एक पुरानी कार को नया रूप देना नहीं है, बल्कि प्रदूषण कम करने और पुरानी गाड़ियों को मॉडर्न तकनीक से जोड़ने का रास्ता भी तैयार करना है.

एक समय था जब हिंदुस्तान एंबेसडर भारतीय सड़कों की शान मानी जाती थी. सरकारी ऑफिस से लेकर टैक्सी सेवाओं तक इस कार ने दशकों तक इंडियन ऑटोमोबाइल बाजार पर राज किया. हालांकि समय के साथ नई तकनीक और मॉडर्न कारों के आने से एंबेसडर की पॉपुलेरिटी कम हो गई. लेकिन अब इस ऐतिहासिक कार को नए अवतार में वापस लाने की तैयारी हो रही है. पश्चिम बंगाल की जादवपुर यूनिवर्सिटी ने एंबेसडर टैक्सी को इलेक्ट्रिक में बदलकर एक नया प्रोटोटाइप तैयार किया है.
इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य सिर्फ एक पुरानी कार को नया रूप देना नहीं है, बल्कि प्रदूषण कम करने और पुरानी गाड़ियों को मॉडर्न तकनीक से जोड़ने का रास्ता भी तैयार करना है. जादवपुर यूनिवर्सिटी ने बैटरी टेक्नोलॉजी कंपनी Pointo के साथ मिलकर यह पहल शुरू की है. इसके तहत पुरानी डीजल और पेट्रोल से चलने वाली एंबेसडर कारों को इलेक्ट्रिक पावरट्रेन से लैस किया जाएगा.
इलेक्ट्रिक बनाने पर दिया जा रहा जोर
सबसे पहले कोलकाता की पीली एंबेसडर टैक्सियों को इलेक्ट्रिक बनाने पर काम किया जा रहा है. ये टैक्सियां आज भी शहर की पहचान मानी जाती हैं, लेकिन इनमें इस्तेमाल होने वाले पुराने डीजल इंजन काफी प्रदूषण फैलाते हैं. ऐसे में इन्हें इलेक्ट्रिक गाड़ी में बदलने से प्रदूषण कम होगा और टैक्सी मालिकों का फ्यूल खर्च भी घटेगा.
पहले फेज में एंबेसडर के अलग-अलग मॉडल जैसे क्लासिक, ग्रैंड, एविगो और एंकोर के लिए इलेक्ट्रिक कन्वर्जन किट विकसित की जा रही है. इसमें पुराने इंजन को हटाकर इलेक्ट्रिक मोटर लगाई जाएगी. साथ ही बैटरी पैक, बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS), नई वायरिंग और अन्य जरूरी इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम भी जोड़े जाएंगे. गाड़ी के सस्पेंशन और चेसिस में भी जरूरत के हिसाब से बदलाव किए जाएंगे ताकि इलेक्ट्रिक सिस्टम बेहतर तरीके से काम कर सके.
एंबेसडर कारों की टेस्टिंग की जाएगी
दूसरे चरण में इन इलेक्ट्रिक एंबेसडर कारों की टेस्टिंग की जाएगी. इन्हें भारत के मोटर वाहन नियमों के हिसाब से प्रमाणित कराया जाएगा और ARAI जैसी एजेंसियों से मंजूरी लेने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी. मंजूरी मिलने के बाद इस तकनीक को बड़े लेवल पर इस्तेमाल किया जा सकेगा.
एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह प्रोजेक्ट भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है. इससे हजारों पुराने डीजल वाहनों को स्क्रैप करने की बजाय उन्हें इलेक्ट्रिक बनाकर दोबारा किया जा सकेगा. इससे न केवल प्रदूषण कम होगा, बल्कि गाड़ी मालिकों को नई कार खरीदने की तुलना में कम खर्च में इलेक्ट्रिक गाड़ी भी मिल सकेगी.
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Source: IOCL






















