EV की सर्विस में न भूलें ये 5 काम, वरना घट सकती है Range
अपनी इलेक्ट्रिक कार की सर्विसिंग के समय इन 5 बातों का खास ध्यान रखें. सही मेंटेनेंस, टायर प्रेशर, ब्रेक और सॉफ्टवेयर अपडेट से बचाएं बैटरी लाइफ और बढ़ाएं ड्राइविंग रेंज.

अब अपने देश में भी विदेशों की तरह इलेक्ट्रिक गाड़ियों की डिमांड तेजी से बढ़ रही है. जिसके चलते अब लोग अपने लिए इलेक्ट्रिक व्हीकल खरीद रहे हैं. हालांकि, अभी भी EV गाड़ियों को लेकर सभी को रेंज की दिक्कत आ रही है. लेकिन अब कंपनियां पहले से कईं ज्यादा रेंज देने लगी है. जबकि इन गाड़ियों में बहुत कम मेंटेनेंस की आवश्यकता होती है क्योंकि इनमें इंजन ऑयल, स्पार्क प्लग या जटिल गियरबॉक्स जैसे स्पेयर पार्ट्स नहीं होते हैं. लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि ईवी को किसी भी तरह की देखभाल या सर्विसिंग की जरूरत नहीं पड़ती. एक इलेक्ट्रिक वाहन का सबसे मुख्य और कीमती हिस्सा उसकी हाई-वोल्टेज बैटरी होती है.
जिसके चलते अगर आप अपनी गाड़ी की सर्विसिंग के समय कुछ जरूरी चीजों की अनदेखी करते हैं तो इसका सीधा असर कार की ड्राइविंग रेंज और बैटरी की लाइफ पर पड़ता है. क्योंकि, छोटी-सी लापरवाही समय के साथ बैटरी पर ज्यादा लोड डालती है जिससे एक फुल चार्ज में मिलने वाला माइलेज कम होने लगता है. अगर आप चाहते हैं कि आपकी ईवी सालों-साल बिना किसी परेशानी के चले और आपको बेहतरीन ड्राइविंग रेंज मिलती रहे तो सर्विसिंग करवाते समय आपको 5 मुख्य कामों को कभी नहीं भूलना चाहिए.
बैटरी हेल्थ का रखें ध्यान
बता दें कि, इलेक्ट्रिक कार की सर्विसिंग के दौरान सबसे पहला काम बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम की पूरी जांच करवाना होता है. गाड़ी को हमेशा 20 से 80 प्रतिशत के बीच ही चार्ज करना सबसे सुरक्षित माना जाता है. क्योंकि बार-बार 100 प्रतिशत तक फुल चार्ज करने या 0 प्रतिशत तक डिस्चार्ज होने देने से बैटरी सेल्स पर दबाव पड़ता है.
वहीं, इसके साथ ही फास्ट चार्जिंग का बहुत ज्यादा इस्तेमाल करने से भी बचें. क्योंकि इससे पैदा होने वाली गर्मी बैटरी लाइफ को नुकसान पहुंचाती है. सर्विस के समय टेक्निशियन से बैटरी के ओवरऑल हेल्थ इंडिकेटर और चार्जिंग पोर्ट की सफाई जरूर चेक करवाएं.

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सही टायर प्रेशर और रोटेशन
जानकारी दें दे कि, पेट्रोल-डीजल गाड़ियों के मुकाबले इलेक्ट्रिक कारें भारी होती हैं और इनमें इंस्टेंट टॉर्क मिलता है. जिसकी वजह से इनके टायरों पर ज्यादा दबाव रहता है और वे तेजी से घिसते हैं. टायरों में हवा का प्रेशर कम होने पर रोलिंग रेजिस्टेंस बढ़ जाता है और मोटर को गाड़ी खींचने के लिए ज्यादा ताकत लगानी पड़ती है. जिससे रेंज घटने लगती है.
इसलिए हमेशा सर्विसिंग के समय टायर प्रेशर कंपनी के बताए स्टैंडर्ड्स के अनुसार सेट करवाएं. हर 8,000 से 10,000 किलोमीटर पर टायरों का रोटेशन और व्हील अलाइनमेंट करवाना भी बहुत जरूरी है, ताकि टायरों की घिसावट एक समान रहे.

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ब्रेक और फ्लूइड्स की जांच
आपको बता दें कि, इलेक्ट्रिक वाहनों में रीजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम मिलता है. जिससे ब्रेक पैड्स का इस्तेमाल पारंपरिक कारों की तुलना में कम होता है. हालांकि, कम इस्तेमाल की वजह से ब्रेक कैलिपर्स और डिस्क में जंग लगने की आशंका बनी रहती है. सर्विसिंग के दौरान ब्रेक पैड्स, डिस्क और ब्रेक कैलिपर्स की ग्रीसिंग व सफाई जरूर करवाएं.
जबकि इसके अलावा ब्रेक फ्लूइड को समय पर बदलवाना चाहिए क्योंकि यह समय के साथ नमी सोख लेता है. रीजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम सही तरीके से काम कर रहा है या नहीं इसे भी डायग्नोस्टिक टूल से चेक करवाना चाहिए ताकि ब्रेक लगाते समय एनर्जी वापस बैटरी में स्टोर हो सके.
सॉफ्टवेयर अपडेट और कूलिंग सिस्टम
आजकल की मॉडर्न इलेक्ट्रिक कारें काफी हद तक सॉफ्टवेयर पर काम करती हैं. ऑटोमोबाइल कंपनियां समय-समय पर ओवर-द-एयर या डीलरशिप के जरिए सॉफ्टवेयर अपडेट जारी करती हैं. जो बैटरी मैनेजमेंट और रेंज की एफिशिएंसी को बेहतर बनाते हैं.
सर्विसिंग के वक्त हमेशा सुनिश्चित करें कि आपकी गाड़ी में लेटेस्ट सॉफ्टवेयर वर्जन इंस्टॉल हो. वहीं, इसके अलावा ईवी में बैटरी पैक को ठंडा रखने के लिए कूलिंग सिस्टम और कूलेंट लेवल की जांच करना बहुत जरूरी है. केबिन एयर फिल्टर को भी समय-समय पर बदलें. जिससे एसी सिस्टम पर ज्यादा लोड न पड़े और बैटरी सुरक्षित रहे.
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