Ethanol From Hair: पेट्रोल के लिए अब गन्ना नहीं, बाल आएंगे काम, जानें नया प्लान
Ethanol From Hair: पेट्रोल की बढ़ती कीमतों और गन्ने की निर्भरता के बीच गुजरात के एक स्टार्टअप ने इंसानों के बालों से एथेनॉल बनाने का चौंकाने वाला दावा किया है.

Ethanol From Hair: भारत में अभी इस समय एथेनॉल को लेकर चर्चा बहुत तेज हो गई है. क्योंकि E10 और E20 के बाद अब हमारे देश में E100 को भी मंजूरी मिल गई है. जबकि कई कंपनियां ऐसी गाड़ियां भी बना रही हैं जो की 100% एथेनॉल पर चलेगी. जबकि इस बीच बेहद ही हैरान करने वाली खबर सामने आई है. दरअसल अब इंसानों के बाल से एथेनॉल बनाया जायेगा.
बता दें कि गुजरात की एक कंपनी टेक्नोफेस्ट ग्लोबल ने बायोमेकरज़ के साथ मिलकर एक ऐसी अनोखी तकनीक विकसित की है. जिसके जरिए बेकार पड़े इंसानों के बालों से बायोएथेनॉल बनाया जा सकता है. चलिए विस्तार से जानते हैं कि यह पूरी तकनीक कैसे काम करती है और इसके पीछे की असल सच्चाई क्या है.
इंसानों के बालों से बनेगा बायोएथेनॉल!
आपको बता दें कि बालों से फ्यूल बनाने की यह प्रक्रिया सुनने में जितनी अजीब लगती है उतनी ही मुश्किल भी है. क्योंकि इंसानों के बालों में केराटिन नाम का एक बेहद मजबूत प्रोटीन पाया जाता है. जो आसानी से नष्ट नहीं होता है. पारंपरिक तरीकों से गन्ने या मक्के की तरह इन्हें सड़ाकर या फर्मेंट करके अल्कोहल में बदलना मुमकिन नहीं होता है.
कंपनी का दावा है कि उन्होंने IMPHA नाम की तकनीक तैयार की है. इसके जरिए बालों में मौजूद केराटिन प्रोटीन को तोड़कर और खास केमिकल प्रोसेस से गुजारकर उसे बायोएथेनॉल में बदला जाता है. कंपनी ने हाल ही में लगभग 100 लीटर क्षमता वाले एक छोटे रिसर्च प्लांट में इसका सफल परीक्षण करने का भी दावा किया है.

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गन्ने और अनाज का होगा कम यूज़
अगर बालों से एथेनॉल बनाने का यह प्रोजेक्ट कमर्शियल स्तर पर सफल हो जाता है तो यह देश की इकॉनमी और कृषि क्षेत्र के लिए एक बहुत बड़ा बदलाव साबित होगा. क्योंकि अभी पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने का लक्ष्य पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर गन्ने और अनाज का इस्तेमाल कर रही है. बालों के इस्तेमाल से फूड वर्सेज फ्यूल की समस्या से पूरी तरह छुटकारा मिल जाएगा. इसके लिए किसी अतिरिक्त उपजाऊ कृषि भूमि या पानी की बर्बादी की जरूरत नहीं पड़ेगी. क्योंकि बाल कटे हुए बाल पूरी तरह से वेस्ट प्रोडक्ट हैं.

क्या हैं चुनौतियां?
जानकारी के लिए बता दें कि बाल से एथेनॉल बनाने में कई तरह की चुनौतियां भी आएंगी और इसे सफल बनाना आसान नहीं होगा. सबसे बड़ी समस्या देश भर के हजारों सैलून और ब्यूटी पार्लर्स से कचरे के रूप में निकलने वाले बालों को बड़े पैमाने पर इकट्ठा करने की है. जबकि इसके अलावा बालों में लगे हुए शैम्पू, तेल, डाई और अन्य केमिकल को साफ करना और फिर उन्हें प्रोसेसिंग यूनिट तक पहुंचाना एक बहुत ही पेचीदा और खर्चीला काम है.
कितना असरदार होगा यह कदम?
अब कुल मिलाकर ददेखें तो गुजरात के इस स्टार्टअप का यह दावा भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिहाज से एक बेहद दिलचस्प और क्रांतिकारी सोच को जन्म देता है. भारत जैसे देश में जहां कच्चे तेल के आयात पर भारी-भरकम रकम खर्च होती है और ऊर्जा सुरक्षा एक बहुत बड़ा मुद्दा है. कचरे से फ्यूल बनाने के ऐसे प्रयास हमेशा सराहनीय माने जाते हैं.
यदि आने वाले समय में इस तकनीक को वैज्ञानिक और आर्थिक पैमानों पर पूरी तरह सही पाया जाता है तो यह देश के बायोफ्यूल प्रोग्राम को एक नई दिशा दे सकती है. हालांकि आम लोगों की गाड़ियों की टंकी तक बालों से बना यह एथेनॉल पहुंचने में अभी काफी वक्त और कड़े वैज्ञानिक परीक्षणों की जरूरत है.
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