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E10 Petrol News: पुरानी बाइक-स्कूटर के लिए E10 क्यों जरूरी? CEA ने बताई वजह

E20 Petrol के बीच CEA ने पुरानी बाइक और स्कूटर के लिए E10 पेट्रोल फिर उपलब्ध कराने की सलाह दी है. जानें E10 की जरूरत, माइलेज, इंजन और एथेनॉल से जुड़े सवाल.

E20 पेट्रोल को लेकर जो बहस चल रही है, उस पर अब सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने बड़ी बात कही है. उनका कहना है कि पुरानी गाड़ियों के लिए पेट्रोल पंपों पर E10 यानी कम एथेनॉल वाला पेट्रोल दोबारा मिलना चाहिए. यह बात उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस में 17 अगस्त को छपे अपने लेख में लिखी है. साफ लिखा है कि यह उनकी निजी राय है.

इंजन खराब होने वाली बात में दम नहीं

पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर खूब कहा जा रहा था कि E20 पेट्रोल से इंजन खराब हो जाता है और गाड़ी की टंकी जल्दी खाली हो जाती है. नागेश्वरन ने इसे गलत बताया है. उनके मुताबिक, माइलेज पर असर सिर्फ 6 से 7 फीसदी का पड़ता है, लेकिन 30 फीसदी वाली बात सही नहीं है. उल्टा धुआं कम निकलता है, जो पर्यावरण के लिए अच्छा है.

अमेरिका की एक जांच का जिक्र हुआ है, जिसमें 86 गाड़ियों को मिलाकर करीब एक करोड़ किलोमीटर तक चलाया गया और इंजन में कोई ज्यादा घिसाव नहीं मिला. भारत में भी एआरएआई, पेट्रोलियम संस्थान और इंडियन ऑयल की जांच में यही नतीजा निकला.

पुराने स्कूटर और बाइक वाली दिक्कत बड़ी? 

CEA के मुताबिक, देश में करीब आठ करोड़ ऐसे स्कूटर और बाइक हैं, जो बीएस4 से पहले के हैं और उनमें कार्बोरेटर लगा है. ये गाड़ियां E20 पर ज्यादा गर्म चलती हैं. इनकी पुरानी रबर सील भी एथेनॉल से खराब हो जाती हैं. सील बदलना महंगा नहीं है, पर एक-एक गाड़ी की सील बदलने में कई साल लग जाएंगे.

शुरू में तय हुआ था कि ऐसी पुरानी गाड़ियों के लिए कम एथेनॉल वाला पेट्रोल पंपों पर मिलता रहेगा, लेकिन वह पंप से हट गया. नागेश्वरन कहते हैं कि इसे वापस लाना चाहिए. लोगों को E20 और E10 दोनों का विकल्प मिलेगा तो डर भी खत्म होगा.

खेत में अनाज उगे या ईंधन? 

लेख में इससे बड़ा सवाल भी उठाया गया है. क्या E20 से आगे बढ़कर E27 या E30 तक जाना चाहिए? जवाब है- अभी नहीं. वजह ये है कि अब आधा एथेनॉल मक्के से बन रहा है और अनाज से कुल मिलाकर करीब 67 फीसदी. मक्का उन्हीं खेतों में उगता है, जहां सोयाबीन, सरसों और मूंगफली होती है. 

मक्के से बने एथेनॉल की कीमत सरकार से ज्यादा मिलती है, इसलिए किसान उसी तरफ मुड़ रहा है. ऊपर से एथेनॉल बनाने के बाद जो अनाज बचता है, वह पशु चारे में बिकता है और उससे सोयाबीन के दाम भी गिर जाते हैं यानी तिलहन उगाने वाले किसान का दोहरा नुकसान.

तेल के बिल का हिसाब

लेख में एक और दिलचस्प बात है. भारत हर साल कच्चा तेल मंगाने पर 11 से 12 लाख करोड़ रुपये खर्च करता है और E20 से इसमें बचत सिर्फ 3 से 4 फीसदी की होती है. दूसरी तरफ खाने के तेल का बिल करीब 1.6 से 1.75 लाख करोड़ रुपये है, जो पूरी तरह खत्म किया जा सकता है.

भारत अभी अपने खाने के तेल का 40 फीसदी खुद बनाता है और 2030-31 तक इसे 72 फीसदी तक ले जाने का लक्ष्य है. सीईए का कहना है कि जिस कमी को पूरी तरह भरा जा सकता है, वहां ध्यान देना ज्यादा समझदारी है.

पानी और पर्यावरण पर भी सवाल

गन्ने की खेती महाराष्ट्र और कर्नाटक में जमीन के नीचे का पानी बहुत खींचती है और असली दिक्कत यही है. पर्यावरण का फायदा भी पक्का नहीं है, क्योंकि अनाज से बने एथेनॉल पर भारत में हुए अध्ययन आपस में एकमत नहीं हैं.

फायदे भी गिनाए

नागेश्वरन ने ये भी माना है कि एथेनॉल से फायदे हुए हैं. गन्ना किसानों का बकाया चुकाया गया, गांवों की कमाई बढ़ी और एक पक्का बाजार बना. दूसरी तरफ E20 पर रुकने का भी नुकसान है, क्योंकि डिस्टिलरी ज्यादा उत्पादन के हिसाब से बनी हैं और उन पर कर्ज लिया गया है.

एक बात जो पीछे नहीं ली जा सकती

लेख में एक सीधी बात कही गई है.  कीमत, पानी के नियम या आयात शुल्क जैसे फैसले कभी भी बदले जा सकते हैं, पर ब्लेंडिंग का स्तर एक बार बढ़ा दिया तो पीछे लौटना मुश्किल है, क्योंकि तब तक जमीन, पानी और फसल का पूरा चक्र उसी हिसाब से बन चुका होगा. ऐसे में पहले वही कदम उठाए जाएं, जिन्हें बाद में वापस लिया जा सके.

तो सलाह क्या है?

पुरानी गाड़ियों के लिए E10 वापस लाया जाए. मक्के को फायदा पहुंचाने वाली गड़बड़ी ठीक की जाए. खाने के तेल पर आयात शुल्क पर दोबारा सोचा जाए और जब तक पूरा हिसाब न लग जाए, तब तक E20 पर ही रुका जाए.

सीईए के मुताबिक, इंजन वाली बहस तो असली मुद्दा थी ही नहीं. असली सवाल यह है कि हम अपने खेतों में उगाएं क्या? फिलहाल, सरकार की आधिकारिक नीति E20 ब्लेंडिंग की ही है.

यह भी पढ़ें: PUC खत्म होने के बाद कितने दिन चला सकते हैं गाड़ी, क्या है नियम?

About the author वरुण भसीन

वरुण भसीन एबीपी न्यूज़ में प्रिंसिपल कॉरेस्पॉन्डेंट हैं. पिछले 9 साल से पत्रकारिता कर रहे हैं. वे एयरलाइंस, रेलवे और सड़क-परिवहन से जुड़ी खबरें कवर करते हैं. इससे पहले वे कई संस्थानों में काम कर चुके हैं. वरुण न्यूज जगत से जुड़ी डॉक्यूमेंट्री फिल्में भी बनाते आए हैं. वरुण ने MBM यूनिविर्सिटी जोधपुर से पढ़ाई की है. संपर्क करने के लिए मेल आईडी है- varunb@abpnetwork.com

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