पुरानी Electric Car लेने में लग रहा है डर, बैटरी की सच्चाई जानकर बदल जाएगा नजरिया
Used Electric Car: पुरानी इलेक्ट्रिक कार खरीदने से पहले बैटरी को लेकर डरना जरूरी नहीं है. नई रिपोर्ट्स के मुताबिक ज्यादातर EV बैटरियां सालों बाद भी अच्छी हालत में रहती हैं. बस खरीदने से पहले कुछ बातें जरूर जान लें.

Used Electric Car: भारत में इलेक्ट्रिक कारों का बाजार तेजी से बढ़ रहा है और अब लोग सेकेंड हैंड EV खरीदने में भी दिलचस्पी दिखा रहे हैं. लेकिन ज्यादातर खरीदारों के मन में एक ही सवाल रहता है कि कहीं पुरानी इलेक्ट्रिक कार की बैटरी खराब तो नहीं होगी. कई लोग यही सोचकर Used EV खरीदने का प्लान छोड़ देते हैं कि बाद में बैटरी बदलने में लाखों रुपये खर्च हो जाएंगे. हालांकि अब सामने आ रही रिपोर्ट्स और डेटा कुछ अलग कहानी बताते हैं.
एक्सपर्ट्स का कहना है कि मॉडर्न EV बैटरियां पहले की तुलना में काफी ज्यादा टिकाऊ हो चुकी हैं और सामान्य इस्तेमाल में उनकी हेल्थ धीरे-धीरे कम होती है. कई स्टडी में यह भी सामने आया है कि ज्यादातर इलेक्ट्रिक कारें कई साल बाद भी अपनी बैटरी क्षमता का बड़ा हिस्सा बचाकर रखती हैं. यानी अगर सही तरीके से जांच की जाए तो सेकेंड हैंड EV अच्छा और किफायती सौदा साबित हो सकती है.
बैटरी जल्दी खराब नहीं होती
आज की नई EV बैटरियां पहले से ज्यादा एडवांस टेक्नोलॉजी के साथ आती हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक कई इलेक्ट्रिक कारों में 5 साल बाद भी 85 से 90 प्रतिशत तक बैटरी हेल्थ बची रहती है. इसका मतलब है कि कार की रेंज में बहुत बड़ा फर्क नहीं आता. एक्सपर्ट्स State Of Health यानी SOH चेक करने की सलाह देते हैं, जिससे पता चलता है कि बैटरी अपनी ओरिजिनल क्षमता का कितना हिस्सा बचाकर रखे हुए है.
कई कंपनियां 8 साल तक बैटरी वारंटी भी देती हैं, जिससे खरीदारों का भरोसा बढ़ा है. अगर Used EV खरीद रहे हैं तो सिर्फ किलोमीटर देखकर फैसला न लें. बैटरी हेल्थ रिपोर्ट, चार्जिंग हिस्ट्री और सर्विस रिकॉर्ड ज्यादा जरूरी होते हैं. कुछ स्टडी में यह भी सामने आया है कि बैटरियां हर साल बहुत कम क्षमता खोती हैं और सही इस्तेमाल होने पर लंबे समय तक बढ़िया चलती हैं.
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पुरानी EV खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान
सेकेंड हैंड इलेक्ट्रिक कार खरीदने से पहले टेस्ट ड्राइव जरूर करें और रियल रेंज चेक करें. अगर कार फुल चार्ज पर बहुत कम दूरी दिखा रही है तो बैटरी की हालत कमजोर हो सकती है. एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि खरीदने से पहले बैटरी हेल्थ रिपोर्ट जरूर मांगें. कई डीलर अब ऑफिशियल बैटरी टेस्ट रिपोर्ट भी देने लगे हैं. इसके अलावा यह भी देखें कि कार को बार-बार फास्ट चार्जिंग पर इस्तेमाल तो नहीं किया गया.
जरूरत से ज्यादा फास्ट चार्जिंग बैटरी पर असर डाल सकती है. कार की चार्जिंग आदतें और मेंटेनेंस हिस्ट्री भी काफी मायने रखती हैं. अच्छी बात यह है कि अब EV टेक्नोलॉजी काफी बेहतर हो चुकी है और बैटरी फेल होने के मामले पहले की तुलना में कम देखे जा रहे हैं. सही जानकारी और जांच के साथ पुरानी इलेक्ट्रिक कार खरीदना आज के समय में समझदारी भरा फैसला साबित हो सकता है.
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Source: IOCL

























