गन्ना किसानों के लिए एथेनॉल मिशन कितना फायदेमंद, क्या इससे बढ़ेगी उनकी कमाई?
Can Ethanol Increase The Income of Farmers: एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम से गन्ना किसानों की किस्मत बदल रही है. जानिए एथेनॉल मिशन कैसे बढ़ा रहा है किसानों की कमाई और देश की एनर्जी सिक्योरिटी.

Can Ethanol Increase The Income of Farmers: ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेलों का दाम महंगा हो गया है. जिसके चलते अब भारत में भी पेट्रोल और डीजल के दाम 100 रुपये के पार हो चुकें हैं. लेकिन अब भारत सरकार तेलों के बढ़ते दामों से निजात पाने के लिए एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम शुरू किया है. बता दें कि, एथेनॉल गन्ने के रस, अनाज और कई चीजों के मिलकर बनता है.
जिसके चलते अब माना जा रहा है कि, एथेनॉल का प्रयोग होने से किसानों को फायदा मिल सकता है. तो चलिए बिल्कुल आसान शब्दों में समझते हैं कि एथेनॉल की बढ़ती डिमांड से गन्ना किसानों को कैसे आर्थिक फायदा मिल रहा है.
गन्ने की मांग से बढ़ती कमाई
बता दें कि, एथेनॉल बनाने के लिए सरकार को ज्यादा मात्रा में गन्ने की ज़रूरत रहेगी. जिसके चलते सरकार को अब किसानों से ज्यादा मात्रा में गन्ना खरीदना पड़ेगा. एक्सपर्ट्स का मानना है कि, एथेनॉल की मांग अब धीरे-धीरे भारत में बढ़ेगी और गन्ने की भी. जिसके चलते अब किसान भाइयों को उनके पैदावार के हिसाब से मुनाफा मिल सकता है.
समय पर मिल गन्ने का पैसा
हमेशा से सरकार से भारतीय किसानों की सबसे बड़ी शिकायत रही है कि चीनी मिलों द्वारा गन्ने के भुगतान में महीनों की देरी होती है. इस वजह से किसानों को अगली फसल लगाने या घर के खर्चे चलाने के लिए कर्ज लेना पड़ता था. एथेनॉल के आने से मिलों की नकदी में बहुत बड़ा सुधार हुआ है.
तेल कंपनियां मिलों से एथेनॉल खरीदते ही बहुत तेजी से उनका पेमेंट कर देती हैं. मिलों के पास पैसा जल्दी आने की वजह से अब किसानों का बकाया समय पर चुकाया जा रहा है. सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले कुछ सालों में गन्ना बकाए का भुगतान रिकॉर्ड स्तर पर हुआ है.
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अनाज और मक्का उगाने वाले किसानों को भी रो रहा है फायदा
जानकारी के लिए आपको बता दें कि, शुरुआत में एथेनॉल सिर्फ गन्ने से ही बनाया जाता था. लेकिन अब सरकार ने इसके लिए अनाज आधारित डिस्टिलरीज को भी हरी झंडी दे दी है. इसका मतलब है कि अब खराब हो चुके अनाज, टूटे चावल और विशेष रूप से मक्के से भी बड़े पैमाने पर एथेनॉल तैयार किया जा रहा है.
जिन इलाकों में पानी की कमी है और किसान गन्ना नहीं उगा सकते वहां मक्के की खेती को भारी बढ़ावा मिल रहा है. एथेनॉल प्लांट लगने से मक्के की मांग अचानक बहुत बढ़ गई है. जिससे किसानों को खुले बाजार में इसके बहुत अच्छे दाम मिल रहे हैं और उनकी कमाई का एक नया जरिया खुल गया है.
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