बाइक में तेज LED Light लगवाई, कट सकता है इतने रुपये का चालान
बाइक में आफ्टरमार्केट तेज LED लाइट लगवाना भारी पड़ सकता है. मोटर व्हीकल एक्ट के तहत पुलिस काट सकती है मोटा चालान. जानिए नियम और जुर्माने की रकम.

इन दिनों ऐसा देखा जा रहा है कि, नए बाइक खरीदार शोरूम से बाइक खरीदते ही उसे मॉडिफाई कराने दुकान पर पहुंच जा रहे हैं. इसके बाद नई बाइक में ही कई तरह के आफ्टरमार्केट सामान लगवाया जाता है. जो की कानून अपराध है और आपका इसके चलते ट्रैफिक पुलिस चालान भी काट सकती है. इन दिनों आफ्टरमार्केट एलईडी या हाई-इंटेन्सिटी डिस्चार्ज लाइट्स लगवाने का ट्रेंड तेजी से चल रहा है. कुछ लोग तो बाइक के बम्पर और लेग गार्ड पर अलग से एक्स्ट्रा फॉग लाइट्स या प्रोजेक्टर लाइट्स भी फिट करा लेते हैं.
बता दें कि, अगर आपने भी अपनी बाइक में ऐसी ही कोई तेज रोशनी वाली एलईडी लाइट लगवाई है तो यह शौक आपकी जेब पर बहुत भारी पड़ सकता है. सड़क सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ट्रैफिक पुलिस अब ऐसी गाड़ियों और बाइक्स के खिलाफ बहुत सख्त अभियान चला रही है. कानून के मुताबिक कंपनी से मिली ओरिजनल लाइट में किसी भी तरह का ऐसा बदलाव करना पूरी तरह से गैर-कानूनी है और ऐसा करने पर आपका मोटा चालान कट सकता है.
सामने वाले ड्राइवर को आती है दिक्कत
बता दें कि, आफ्टरमार्केट तेज एलईडी लाइट्स के खिलाफ इतनी सख्ती बरतने के पीछे एक बहुत बड़ी वजह है. जब रात के समय कोई बाइक सवार बहुत तेज रोशनी वाली ब्लिंकिंग या हाई-बीम एलईडी लाइट जलाकर सड़क पर निकलता है तो सामने से आ रहे वाहन चालकों की आंखों पर उसकी तेज रोशनी सीधी पड़ती है.
इसे मेडिकल और ट्रैफिक की भाषा में फ्लैश ब्लाइंडनेस कहा जाता है जिससे सामने वाले ड्राइवर को कुछ सेकंड के लिए दिखना बिल्कुल बंद हो जाता है. अचानक आंखों के आगे अंधेरा छा जाने की वजह से चालक का गाड़ी पर से नियंत्रण छूट जाता है और बड़े सड़क हादसे हो जाते हैं.

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कितने रुपये का कट सकता है चालान?
वहीं, मोटर व्हीकल एक्ट के सख्त नियमों के तहत बाइक या कार की फैक्ट्री फिटेड लाइट्स में कोई भी ऐसा बदलाव करना अपराध है जो दूसरों के लिए खतरा बने. अगर ट्रैफिक पुलिस आपको बाइक में अवैध या तय सीमा से ज्यादा तेज रोशनी वाली आफ्टरमार्केट एलईडी लाइट के साथ पकड़ती है तो धारा 190(2) के तहत आपका पहली बार में 1,000 रुपये से लेकर 2,000 रुपये तक का चालान काटा जा सकता है.
जबकि इसके अलावा अगर आप बार-बार यही गलती करते हुए पकड़े जाते हैं या अवैध मॉडिफिकेशन के दोषी पाए जाते हैं तो यह जुर्माना बढ़कर 5,000 रुपये तक भी पहुंच सकता है.

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लाइट भी छीन ली जाती है
बता दें कि, अगर आपको ऐसा लगता है कि सिर्फ चालान का रसीद कटवाकर आप उस लाइट के साथ आगे जा सकेंगे तो यह आपकी गलतफहमी है. क्योंकि, ट्रैफिक पुलिस चेकिंग के दौरान चालान काटने के साथ-साथ आपकी बाइक में लगी गैर-कानूनी एलईडी लाइट को मौके पर ही निकलवा या जब्त कर सकती है.
कई राज्यों में तो पुलिस ऐसे मॉडिफाइड वाहनों को तब तक सीज करके थाने में जमा रखती है जब तक कि गाड़ी मालिक उसे वापस ओरिजनल कंडीशन यानी कंपनी वाली लाइट में चेंज नहीं करवा लेता. इसलिए कोर्ट-कचहरी और आरटीओ के चक्करों से बचने के लिए नियमों का पालन करना ही बेहतर है.
कंपनी से आने वाली लाइट्स हैं सुरक्षित
जानकारी दें दे कि, ऑटोमोबाइल कंपनियां जब भी किसी बाइक को डिजाइन करती हैं तो उसकी हेडलाइट की रोशनी और उसके बीम एंगल को सरकार के तय सेफ्टी मानकों के हिसाब से सेट करती हैं. इन लाइट्स की रोशनी सड़क पर सही दूरी तक फैलती है और सामने से आ रहे व्यक्ति की आंखों में चुभती भी नहीं है.
अगर आपको रात में बाइक चलाते वक्त रोशनी कम लगती है तो आप अपनी बाइक के हेडलाइट ग्लास को साफ रखें या फिर केवल कंपनी द्वारा प्रमाणित स्टैंडर्ड पावर वाले बल्ब का ही इस्तेमाल करें. स्टाइल और फैशन के चक्कर में अपनी और दूसरों की जान को जोखिम में डालना बिल्कुल समझदारी नहीं है.
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