'शेख हसीना को कैप्चर कर लाएंगे और फांसी देंगे', बांग्लादेश ने फिर दिखाई आंखें
बांग्लादेश के सूचना सलाहकार ने कहा कि शेख हसीना को बांग्लादेश की अदालत में अपील करने का मौका भी नहीं मिलेगा और देश में कदम रखते ही उन्हें सजा का सामना करना पड़ेगा.

भारत और बांग्लादेश के रिश्तों पर जमी बर्फ के पिघलने के आसार अभी बहुत कम दिख रहे हैं. तारिक रहमान सरकार की तरफ से शेख हसीना के प्रत्यर्पण को लेकर भारत के सामने शर्त रखी गई है. बांग्लादेश के सूचना सलाहकार जाहेद उर रहमान ने कहा कि भारत शेख हसीना को वापस बांग्लादेश भेजे तभी दोनों देशों के बीच के रिश्ते अच्छे हो होंगे. जाहेद उर रहमान इतने पर ही नहीं रुके, बल्कि उन्होंने कहा कि बांग्लादेश सरकार शेख हसीना को कैप्चर कर वापस लाना चाहती है.
शेख हसीना को अपील करने का भी मौका नहीं मिलेगा
जाहेद उर रहमान ने साफ तौर पर कहा कि शेख हसीना को बांग्लादेश की अदालत में अपील करने का मौका भी नहीं मिलेगा और देश में कदम रखते ही उन्हें सजा का सामना करना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि हमारे देश इस बात का इंतजार नहीं कर सकता कि वह (शेख हसीना) अपनी मर्जी से देश लौटें, बल्कि हम उन्हें कानूनी प्रक्रिया से वापस लाना चाहते हैं. 5 अगस्त, 2024 को शेख हसीना को सत्ता से हटाए जाने के बाद इंटरनेशनल क्रिमिनल ट्रिब्यूनल ने मानवता के खिलाफ अपराधों के आरोप में उनकी अनुपस्थिति में उन्हें मौत की सजा सुनाई.
हालांकि, शेख हसीना ने दिसंबर 2026 में बांग्लादेश लौटने और अदालत के सामने आत्मसमर्पण करने की घोषणा की हैं. मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने आतंकवाद विरोधी कानून के तहत अवामी लीग पर बैन लगाया था. फरवरी 2026 में हुए आम चुनाव में अवामी लीग को भाग लेने और चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं दी गई थी.
बांग्लादेश आते ही होगी फांसी: सूचना सलाहकार
द डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक जाहेद उर रहमान ने कहा, 'अब शेख हसीना के पास अपील करने का मौका नहीं है. यानि कि अब वह वापस आएंगी तो उन्हें मौत की सजा मिलेगी. हम उन्हें गिरफ्तार करना चाहते हैं. कुछ लोगों का कहना है कि हम सिर्फ भारत पर दवाब बनाने के लिए ऐसी बातें कर रहे हैं, जबकि ऐसा नहीं है. सरकार के पास सिर्फ भारत पर दबाव बनाने के लिए एक्सट्रैडिशन की मांग करने का कोई टैक्टिक नहीं है. हमने भारत सरकार के सामने इस मुद्दे को रखा है.'
सूचना सलाहकार जाहेद ने कहा, 'बांग्लादेश सरकार शेख हसीना को वापस लाने के लिए पूरी तरह गंभीर है. यह केवल भारत पर दबाव बनाने की कोशिश नहीं है, बल्कि इसे प्रधानमंत्री तारिक रहमान की भारत यात्रा की शर्तों में भी शामिल किया गया है.' उन्होंने शेख हसीना की ओर से भारत से वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस करने और मीडिया को दिए जा रहे इंटरव्यू पर कड़ा विरोध जताया. उन्होंने कहा कि भारत सरकार से यह उम्मीद थी कि प्रत्यर्पण तक वह शेख हसीना को मीडिया में बोलने का मौका नहीं देगी.
शेख हसीना को कैप्चर कर ले जाना चाहता बांग्लादेश
उन्होंने कहा कि हसीना बांग्लादेश से भागकर भारत गई हैं और उनकी कानूनी स्थिति स्पष्ट नहीं है. भारत सरकार को दोनों देशों के रिश्ते बेहतर करने के लिए कम से कम हसीना को बयानबाजी करने से रोकना चाहिए. उन्होंने कहा, 'उनके (शेख हसीना) बांग्लादेश आते ही उन्हें मौत की सजा का सामना करना पड़ेगा. हम उन्हें कैप्चर कर वापस लाना चाहते हैं.'
जाहेद उर रहमान ने कहा, 'जब देश में लोग हिंसा और सुरक्षा के खतरों से जूझ रहे थे, तब शेख हसीना को मीडिया में बोलते देखकर लोगों को गुस्सा आता है. भारत को बांग्लादेश की जनता की इस भावना को समझना चाहिए.'





















