एक्सप्लोरर

क्या मांगलिक दोष से भी ज्यादा विनाशकारी है 'वैधव्य योग'? जानें प्रामाणिक शास्त्रों का सबसे बड़ा सच

Vaidhavy Yog: क्या वैधव्य योग मांगलिक दोष से भी भारी है? जानें महर्षि पराशर के प्रामाणिक शास्त्रों का सच, कुंडली के वो नियम जो इस दोष को तुरंत बदलते हैं और इसके अचूक शास्त्रीय उपाय.

Vaidhavy Yog: भारतीय वैदिक ज्योतिष में विवाह और वैवाहिक सुख का विचार करते समय कई तरह के ग्रहों के समीकरणों का अध्ययन किया जाता है. जब भी विवाह की बात आती है, तो समाज में सबसे ज्यादा चर्चा मांगलिक दोष की होती है.

लेकिन ज्योतिषीय ग्रंथों में एक और अत्यंत संवेदनशील योग का विवरण मिलता है जिसे वैधव्य योग यानी पति के सुख में कमी या वियोग का योग कहा जाता है.

क्या मांगलिक दोष से भी ज्यादा विनाशकारी है 'वैधव्य योग'? जानें प्रामाणिक शास्त्रों का सबसे बड़ा सच

अक्सर लोगों के मन में यह डर रहता है कि क्या यह योग मांगलिक दोष से भी अधिक भयानक है. आइए, किसी कपोल-कल्पना या भ्रांति के बजाय महर्षि पराशर के 'बृहत् पराशर होराशास्त्र', ढूंढिराज कृत 'जातकाभरणम्' और आचार्य वैद्यनाथ दीक्षित के 'जातक पारिजात' जैसे प्रामाणिक ग्रंथों के आधार पर इसका पूरा ज्योतिषीय सच समझते हैं.

प्रामाणिक शास्त्रों के अनुसार क्या होता है वैधव्य योग

सनातन ज्योतिष के सबसे प्रामाणिक ग्रंथों के अनुसार, जब किसी स्त्री की जन्मकुंडली में वैवाहिक सुख के कारक भाव (सप्तम भाव), आयु व सौभाग्य के भाव (अष्टम भाव) और इनके स्वामियों पर अत्यधिक क्रूर ग्रहों का प्रभाव होता है, तब यह योग निर्मित होता है. शास्त्र इस स्थिति को स्पष्ट रूप से परिभाषित करते हैं.

महर्षि पराशर अपने ग्रंथ 'बृहत् पराशर होराशास्त्र' के स्त्रीजातकफलाध्याय में बताते हैं कि यदि किसी कन्या की कुंडली के अष्टम भाव में, जो स्त्री का सौभाग्य और पति की आयु का स्थान है, पापी या क्रूर ग्रह जैसे राहु, केतु, शनि या मंगल अपनी नीच राशि या शत्रु राशि में स्थित हों, तो वह स्थिति वैधव्य का कारण बनती है.

इसी प्रकार ढूंढिराज कृत 'जातकाभरणम्' में स्पष्ट लिखा है कि यदि सप्तम भाव का स्वामी अष्टम भाव में चला जाए और अष्टम भाव का स्वामी सप्तम भाव में आकर बैठ जाए, तो इस भाव परिवर्तन और शुभ ग्रहों की दृष्टि न होने पर विवाह के उपरांत जीवनसाथी को गंभीर संकट या वियोग का सामना करना पड़ता है.

आचार्य वैद्यनाथ दीक्षित भी अपने ग्रंथ 'जातक पारिजात' में इसी बात का समर्थन करते हुए लिखते हैं कि यदि सप्तम और अष्टम भाव में क्रूर या पापी ग्रह बैठे हों और विवाह भाव का स्वामी छठे, आठवें या बारहवें भाव में जाकर निर्बल या पीड़ित हो जाए, तो वैवाहिक जीवन में भारी कष्ट या अलगाव की स्थिति बनती है.

क्या यह मांगलिक दोष से भी अधिक खतरनाक है

ज्योतिष शास्त्र के नियमों के अनुसार यदि तुलना की जाए, तो पूर्ण रूप से सक्रिय वैधव्य योग को मांगलिक दोष से अधिक गंभीर और चिंताजनक माना जाता है. इसके पीछे पूर्णतः शास्त्रसम्मत और तार्किक कारण हैं. मांगलिक दोष केवल एक ग्रह यानी मंगल की विशिष्ट भावों में उपस्थिति से बनता है.

शास्त्र कहते हैं कि यदि वर और कन्या दोनों मांगलिक हों, तो यह दोष स्वतः ही समाप्त यानी परिहार हो जाता है. इसके अलावा मांगलिक दोष मुख्य रूप से स्वभाव में उग्रता, क्रोध और आपसी वैचारिक मतभेद पैदा करता है, जिसे आपसी समझदारी से संभाला जा सकता है.

इसके विपरीत वैधव्य योग किसी एक ग्रह से नहीं, बल्कि शनि, राहु, केतु और मंगल जैसे कई क्रूर ग्रहों के सम्मिलित और अत्यंत नकारात्मक प्रभाव से बनता है.

यह योग स्वभाव की लड़ाई से आगे बढ़कर सीधे जीवनसाथी के जीवन, उनके स्वास्थ्य या रिश्ते के वजूद जैसे तलाक या परित्यक्ता होना, पर संकट खड़ा करता है. इसलिए यदि कुंडली में इसका कोई काट या परिहार न हो, तो शास्त्र इसे मांगलिक दोष से कहीं अधिक गंभीर श्रेणी में रखते हैं.

कुंडली के वे अचूक नियम जो इस योग को कर देते हैं निष्प्रभावी

शास्त्रों में जहां दोष लिखे गए हैं, वहीं उनके भंग होने और निष्प्रभावी होने के अचूक नियम भी विस्तार से बताए गए हैं, इसलिए किसी एक सूत्र को देखकर डरना अज्ञानता है. इसमें पहला और सबसे बड़ा नियम देवगुरु बृहस्पति का अमृत प्रभाव है.

शास्त्रों का नियम है कि यदि कुंडली के सप्तम या अष्टम भाव पर देवगुरु बृहस्पति की पूर्ण दृष्टि पड़ जाए, तो वैधव्य योग पूरी तरह से भंग हो जाता है क्योंकि बृहस्पति की दृष्टि को ज्योतिष में 'अमृत' समान माना गया है जो सभी दोषों को सोख लेती है.

दूसरा मुख्य नियम वर की कुंडली में दीर्घायु योग का होना है. यदि कन्या की कुंडली में ग्रहों की स्थिति कमजोर है, लेकिन वर की कुंडली में अष्टम भाव मजबूत है, लग्नेश बलवान है और पूर्णायु योग विद्यमान है, तो कन्या की कुंडली का वैधव्य योग पूरी तरह बेअसर हो जाता है. यही कारण है कि प्राचीन काल से ही विवाह पूर्व दोनों कुंडलियों के संपूर्ण मिलान पर जोर दिया जाता है.

इसके साथ ही आज के समय में देश-काल और पात्र का सिद्धांत भी लागू होता है. आधुनिक युग में इस योग का फल हूबहू वैसा नहीं मिलता जैसा सैकड़ों साल पहले लिखा गया था.

आज के समय में यह योग अक्सर पति-पत्नी के बीच तलाक, अत्यधिक वैचारिक दूरी, या करियर व व्यवसाय के कारण सालों एक-दूसरे से दूर रहने के रूप में घटित होकर अपना प्रभाव शांत कर लेता है.

शास्त्रों में वर्णित इसके प्रामाणिक और शास्त्रीय उपाय

यदि गहन ज्योतिषीय विश्लेषण के बाद यह दोष पूरी तरह सक्रिय पाया जाता है, तो शास्त्रों और मुहूर्त ग्रंथों में इसके निवारण के अचूक माध्यम बताए गए हैं.

'मुहूर्त चिंतामणि' और 'संस्कार प्रकाश' जैसे प्रामाणिक ग्रंथों के अनुसार, यदि कन्या की कुंडली में ऐसा कोई गंभीर दुर्योग हो, तो मुख्य विवाह से पूर्व कन्या का प्रतीकात्मक विवाह भगवान विष्णु की स्वर्ण प्रतिमा, पीपल के वृक्ष या कुंभ यानी मिट्टी के घड़े से कराया जाता है, जिससे कुंडली का नकारात्मक प्रभाव उस निर्जीव वस्तु पर स्थानांतरित होकर समाप्त हो जाता है.

इसके साथ ही शिव पुराण के अनुसार महामृत्युंजय मंत्र का सवा लाख जप और अनुष्ठान किसी भी प्रकार के अकाल कष्ट और जीवन संकट को टालने में पूरी तरह समर्थ माना गया है.

सौभाग्य वृद्धि के लिए शास्त्रों में कन्याओं को माता पार्वती और भगवान शिव की संयुक्त आराधना तथा मंगला गौरी व्रत का पालन करने का निर्देश भी दिया गया है, जो अखंड सौभाग्य की प्राप्ति कराता है और कुंडली के सभी अनिष्ट ग्रहों को शांत करता है.

यह भी पढ़ें- Sawan Grahan 2026: सावन 2026 में दो ग्रहण का संयोग, क्या खतरे की घंटी का संकेत?

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

हृदेश कुमार सिंह । Hirdesh Kumar Singh 

Senior Vedic Astrologer । Head – Religion & Astrology, ABP Live । Lead – ABP Dharma LIVE

हृदेश कुमार सिंह वरिष्ठ वैदिक ज्योतिषाचार्य और मीडिया पेशेवर हैं. उन्हें ज्योतिष, धर्म और मीडिया के क्षेत्र में 17 साल से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वे ABP Live में Religion & Astrology वर्टिकल का नेतृत्व करते हैं. साथ ही ABP Dharma LIVE की कंटेंट और डिजिटल रणनीति की जिम्मेदारी संभालते हैं.

उनके काम में ज्योतिषीय लेखन, संपादन, वेबसाइट और वीडियो के लिए विषय चयन तथा संपादकीय योजना शामिल है. वे Search, Google Discover और सोशल मीडिया पर पाठकों की रुचि को ध्यान में रखकर धर्म और ज्योतिष की कवरेज तय करते हैं.

पंचांग, राशिफल, ग्रह गोचर, व्रत-त्योहार और धार्मिक परंपराएं उनके लेखन के प्रमुख विषय हैं. वे करियर, विवाह, शिक्षा और व्यापार से जुड़े सवालों पर भी लिखते हैं. राजनीति और सामाजिक घटनाओं पर उनके ज्योतिषीय विश्लेषण वैदिक गणना, गोचर और मेदिनी ज्योतिष पर आधारित होते हैं. इनमें ग्रह स्थितियों को संभावित संकेतों के रूप में प्रस्तुत किया जाता है.

उन्होंने Indian Institute of Mass Communication (IIMC), नई दिल्ली से पत्रकारिता और IIMT University, मेरठ से ज्योतिष शास्त्र एवं वास्तु शास्त्र की शिक्षा ग्रहण की है. वे AstroSage और Astrotalk जैसे प्लेटफॉर्म के साथ भी काम कर चुके हैं. उन्होंने Semrush Academy से 'Content Marketing Essentials for SEO and AI Search with Semrush' सर्टिफिकेशन प्राप्त किया है.

नई पीढ़ी के पाठकों के लिए उन्होंने 'Gen-Z Horoscope' जैसे प्रारूप पर काम किया है. इसमें पढ़ाई, नौकरी, रिश्तों और रोजमर्रा के फैसलों से जुड़े सवालों को राशिफल में जगह दी गई है. उनके लेख धार्मिक परंपराओं से जुड़े उन प्रश्नों पर भी केंद्रित होते हैं, जो बदलती जीवनशैली में सामने आते हैं.

वैदिक ज्योतिष, होरा शास्त्र, संहिता, मेदिनी ज्योतिष, अंक ज्योतिष, शकुन शास्त्र और वास्तु उनके अध्ययन एवं लेखन के विषय हैं. उनका मानना है, 'ज्योतिष केवल भविष्य बताने की विद्या नहीं, बल्कि समय को समझने की कला है.'

ज्योतिष और मीडिया के अलावा उन्हें सिनेमा, संगीत, साहित्य, राजनीति, पर्यावरण, ग्रामीण जीवन और यात्राओं में विशेष रुचि है.

Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola

टॉप हेडलाइंस

Kal Ka Rashifal 15 October 2026: गुरुवार को सौभाग्य योग से इन राशियों की खुलेगी किस्मत, मिथुन को ऋण में सफलता और मकर को सरकारी राहत!
Kal Ka Rashifal 15 October 2026: गुरुवार को सौभाग्य योग से इन राशियों की खुलेगी किस्मत, मिथुन को ऋण में सफलता और मकर को सरकारी राहत!
आज का कन्या राशिफल 14 अक्टूबर 2026: तीसरे चंद्रमा से बिजनेसमैन के लिए 'गोल्डन डे', अट्रैक्टिव ऑफर से उमड़ेगी ग्राहकों की भीड़
आज का कन्या राशिफल 14 अक्टूबर 2026: तीसरे चंद्रमा से बिजनेसमैन के लिए 'गोल्डन डे', अट्रैक्टिव ऑफर से उमड़ेगी ग्राहकों की भीड़
आज का सिंह राशिफल 14 अक्टूबर 2026: चौथे चंद्रमा से असुरक्षा का भाव, डेटा एनालिसिस में चूक से कॉम्पिटिटर्स आगे, पॉलिटिशियन को अचानक बुरी खबर
आज का सिंह राशिफल 14 अक्टूबर 2026: चौथे चंद्रमा से असुरक्षा का भाव, डेटा एनालिसिस में चूक से कॉम्पिटिटर्स आगे, पॉलिटिशियन को अचानक बुरी खबर
आज का कर्क राशिफल 14 अक्टूबर 2026: 5वें चंद्रमा से कला व रचना में सफलता, आयुष्मान योग से जैकपॉट, मार्केट में मोनोपोली व ट्रबल शूटर की भूमिका
आज का कर्क राशिफल 14 अक्टूबर 2026: 5वें चंद्रमा से कला व रचना में सफलता, आयुष्मान योग से जैकपॉट, मार्केट में मोनोपोली व ट्रबल शूटर की भूमिका

वीडियोज

सोशल मीडिया की हसीन 'विष कन्या !
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ राहुल का पूरा प्लान क्या है?
चाय की चुस्की CEC के खिलाफ विपक्ष की 'नई रणनीति' !
एक चाय, दो बिस्किट-SIR की जंग में कौन 'हिट'
राहुल का प्रोटेस्ट..अमित शाह ने संभाल लिया 'मोर्चा'

फोटो गैलरी

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
एयर इंडिया फ्लाइट की जयपुर में इमरजेंसी लैंडिंग, पायलट ने दबाया स्क्वॉक कोड 7500
एयर इंडिया फ्लाइट की जयपुर में इमरजेंसी लैंडिंग, पायलट ने दबाया स्क्वॉक कोड 7500
'बिल्कुल बेतुका...' सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत पर बोले अरविंद केजरीवाल
'बिल्कुल बेतुका...' सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत पर बोले अरविंद केजरीवाल
अभिजीत दीपके ने क्यों कहा- 'आशुतोष और सौरव को पहले से पता था कि...'
अभिजीत दीपके ने क्यों कहा- 'आशुतोष और सौरव को पहले से पता था कि...'
बर्थडे स्पेशल: 100 जीत प्रतिशत वाले एकमात्र कप्तान हैं गौतम गंभीर! जानें उनके 3 बड़े रिकॉर्ड
बर्थडे स्पेशल: 100 जीत प्रतिशत वाले एकमात्र कप्तान हैं गौतम गंभीर! जानें उनके 3 बड़े रिकॉर्ड
'अब पूरा देश जंतर मंतर बनेगा', CJP के दास-रांका की गिरफ्तारी के बाद प्रकाश राज की सरकार को वॉर्निंग
'अब पूरा देश जंतर मंतर बनेगा', प्रकाश राज ने सरकार को दी वॉर्निंग
आशुतोष रांका-सौरव दास को न्यायिक हिरासत, CJP की पहली प्रतिक्रिया- 'सिर ऊंचा करके...'
आशुतोष रांका-सौरव दास को न्यायिक हिरासत, CJP की पहली प्रतिक्रिया- 'सिर ऊंचा करके...'
Delhi Road Accidents 2026: रोज 5 मौतें, 17 घायल, 6 साल में सबसे खतरनाक रहा यह साल
दिल्ली रोड एक्सीडेंट: रोज 5 मौतें, 17 घायल, 6 साल में सबसे खतरनाक रहा यह साल
'पिछलग्गू बनकर मजा आया...', राहुल के पीछे खड़े अखिलेश पर राजभर ने कसा तंज
'पिछलग्गू बनकर मजा आया...', राहुल के पीछे खड़े अखिलेश पर राजभर ने कसा तंज
Embed widget