ट्रंप का टैरिफ संकट: ग्रहों की चाल ने दिए विनाशकारी संकेत, जानें कब थमेगा यह आर्थिक बवंडर?
ट्रंप टैरिफ 2026 का आर्थिक असर: ज्योतिषीय गणना के अनुसार अगस्त 2026 तक बाजार में अस्थिरता रहेगी. जानें शनि-राहु गोचर का प्रभाव कब थमेगा और भारत के लिए क्या अवसर हैं. इन सभी संकेतों को यहां पढ़ें.

ज्योतिषीय गणना और मेदिनी ज्योतिष के विश्लेषण के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ का सबसे आक्रामक और 'परेशान' करने वाला दौर चल रहा है. मार्च 2025 से आरंभ ये दौर सितंबर 2026 के बीच रहेगा.
ग्रहों की स्थिति बताती है कि शनि का मीन राशि में गोचर और राहु का प्रभाव वैश्विक व्यापार में भारी अवरोध पैदा करने वाला है. हालांकि, फरवरी 2027 से गुरु (बृहस्पति) के शुभ गोचर और कूटनीतिक संधियों के चलते इन कठोर आर्थिक प्रतिबंधों में नरमी आनी शुरू होगी. लेकिन 2026 कैसा रहेगा, इसे आइए समझते हैं.
वैश्विक अर्थव्यवस्था और ग्रहों का रहस्यमय संयोग
डोनाल्ड ट्रंप की वापसी ने केवल राजनीति को ही नहीं, बल्कि वैश्विक बाजारों को भी हिलाकर रख दिया है. उनके द्वारा प्रस्तावित 'यूनिवर्सल बेसलाइन टैरिफ' (Universal Baseline Tariff) ने भारत समेत दुनिया भर के देशों की रातों की नींद उड़ा दी है. लेकिन क्या यह केवल एक राजनीतिक निर्णय है?
वैदिक ज्योतिष और मेदिनी ज्योतिष (Mundane Astrology) के प्राचीन ग्रंथों का अध्ययन करने पर पता चलता है कि यह पूरी घटना ब्रह्मांडीय ऊर्जाओं के एक विशेष क्रम का परिणाम है.
1. मेदिनी ज्योतिष का दृष्टिकोण: अमेरिका की कुंडली और 'शनि' का न्याय
मेदिनी ज्योतिष में किसी भी देश की आर्थिक नीतियों का विश्लेषण उस देश के 'लग्न' और उसके शासक की कुंडली के आधार पर किया जाता है. अमेरिका की कुंडली (जेमिनी लग्न) और डोनाल्ड ट्रंप की कुंडली (सिंह लग्न) के बीच एक अजीबोगरीब 'षडाष्टक योग' बन रहा है.
शनि का मीन राशि में गोचर (2025-26)
शनि को ज्योतिष में 'कर्मफल दाता' और 'न्याय का देवता' माना जाता है. मार्च 2025 में शनि कुंभ राशि छोड़कर मीन राशि में गोचर कर रहे है. मीन एक जल तत्व की राशि है और शनि यहां संकुचन (Contraction) लाते हैं. यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार में 'दीवारें' खड़ी करने का संकेत है. ट्रंप के टैरिफ इसी संकुचन का भौतिक रूप हैं.
ज्योतिष ग्रंथों के अनुसार, जब-जब क्रूर ग्रहों का प्रभाव केंद्र भावों पर पड़ता है, तब-तब 'संरक्षणवाद' (Protectionism) बढ़ता है. 1930 की महामंदी के समय भी ग्रहों की कुछ ऐसी ही स्थिति बनी थी.
2. वैदिक ज्योतिष: ट्रंप की कुंडली में राहु और मंगल का तांडव
डोनाल्ड ट्रंप का जन्म वृश्चिक राशि और सिंह लग्न में हुआ है. उनकी कुंडली के दशम भाव (कर्म भाव) में राहु और मंगल की उपस्थिति उन्हें एक 'अजेय' लेकिन 'अस्थिर' योद्धा बनाती है.
- अचानक निर्णय (The Rahu Factor): राहु अचानक लिए गए निर्णयों का कारक है. ट्रंप के टैरिफ वॉर की घोषणाएं बिना किसी पूर्व चेतावनी के होंगी, जिससे शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव (Volatility) देखने को मिलेगा. 2026 में ये स्थिति समय पर दिखाई देंगी.
- आर्थिक विस्तार बनाम अवरोध: वर्तमान में उनकी कुंडली में गुरु की अंतर्दशा और राहु का गोचर चल रहा है. यह स्थिति दर्शाती है कि वे अपने देश के लिए 'विस्तार' चाहते हैं, लेकिन दूसरों के लिए 'अवरोध' (Barriers) पैदा करेंगे.
3. क्या भारत को डरने की जरूरत है?
टैरिफ का सीधा असर आपकी जेब, निवेश और नौकरी पर पड़ता है. भारतीय अर्थव्यवस्था पर ग्रहों का प्रभाव कैसा रहेगा ये जानना आवश्यक है. भारत की कुंडली (वृषभ लग्न) के अनुसार, वर्तमान में चंद्रमा की महादशा चल रही है. जिस कारण से आईटी और निर्यात क्षेत्र प्रभावित हो सकते हैं. बुध के कमजोर होने के कारण (2025 के मध्य में), भारत के आईटी सेक्टर पर ट्रंप के टैरिफ का नकारात्मक असर पड़ा. ग्रहों की स्थिति बता रही हैं कि गोल्ड और कमोडिटी में भारत अपनी घरेलू खपत के दम पर इस संकट को झेल जाएगा.
चौंकाने वाला संकेत: ज्योतिषीय गणना कहती है कि आने वाले दिनों में चीन के साथ ट्रंप का संघर्ष भारत के लिए 'वरदान' साबित होगा, क्योंकि 'राहु' चीन की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह अस्थिर कर देगा, जिससे ग्लोबल सप्लाई चेन भारत की ओर मुड़ेगी.
4. अंक ज्योतिष (Numerology): नंबर 5 और नंबर 9 का भयानक संयोग
अंक ज्योतिष के अनुसार, ट्रंप (14 जून 1946) का मूलांक 5 है. अंक 5 बुध का अंक है, जो व्यापार और चालाकी का प्रतीक है. भारत (वृषभ लग्न) के लिए 2026 का वर्ष 'मिश्रित' रहेगा. आईटी सेक्टर में संघर्ष की स्थिति रहेगी. अमेरिकी टैरिफ भारतीय सॉफ्टवेयर सेवाओं पर दबाव बनाएंगे.
चीन का नुकसान, भारत का लाभ: मेदिनी ज्योतिष के अनुसार, राहु का गोचर चीन की कुंडली के लिए अत्यंत अशुभ है. ट्रंप के टैरिफ चीन को आर्थिक रूप से कमजोर करेंगे, जिससे वैश्विक कंपनियां भारत की ओर रुख करेंगी. यह भारत के लिए 'आपदा में अवसर' जैसा होगा.
अब प्रश्न उठता है कि ट्रंप टैरिफ क्यों लगा रहे हैं? ज्योतिषीय दृष्टि से, यह उनकी 'सत्ता विस्तार' की लालसा है. तकनीकी दृष्टि से, यह व्यापार घाटे को कम करने का एक 'आक्रामक औजार' है. ग्रहों की युति बताती है कि ट्रंप आने वाले दिनों में 'समान अवसर' (Level Playing Field) के नाम पर मित्र देशों (जैसे भारत और यूरोप) पर भी दबाव बनाएंगे.
आम आदमी पर क्या असर होगा?
महंगाई बढ़ने के योग हैं. चूंकि आयातित सामान महंगा होगा, इसलिए उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों में 10-15% की वृद्धि देखी जा सकती है. प्राचीन ऋषि वराहमिहिर ने 'बृहत्संहिता' में स्पष्ट संकेत बताए हैं कि जब उत्तर दिशा का स्वामी (यहां अमेरिका को पश्चिम/उत्तर का प्रतिनिधि माना जा सकता है) उग्र होकर कर (Tax) बढ़ाता है, तो पूर्व के देशों में स्वर्ण की कीमत बढ़ती है और अनाज का संकट पैदा होता है. 'जब क्रूर ग्रह उदित होकर मित्र राशियों को पीड़ित करते हैं, तब राजा अपनी ही प्रजा और सहयोगियों से धन छीनने की चेष्टा करता है.'
कब मिलेगी इस परेशानी से मुक्ति?
ट्रंप के टैरिफ का प्रभाव कोई अल्पकालिक घटना नहीं है. यह एक 'आर्थिक पुनर्गठन' है. जहां वर्ष 2025 आक्रामकता और नए करों का साल रहा, वहीं वर्ष 2026 वैश्विक मंदी का भय और कूटनीतिक गतिरोध का काल होगा.
फरवरी 2027 में जब गुरु कर्क राशि (उच्च की राशि) में प्रवेश करेंगे, तब वैश्विक अर्थव्यवस्था में स्थिरता आएगी. ट्रंप स्वयं अपनी नीतियों को संशोधित करने पर मजबूर होंगे क्योंकि तब तक अमेरिकी जनता पर भी इसका भारी दबाव बढ़ चुका होगा.
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