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2026 में चंद्रमा से जुड़ी 13 खगोलिया घटनाएं: सुपरमून, सूर्य ग्रहण और ब्लड मून का होगा दीदार!

lunar events in 2026: साल 2026 खगोल प्रेमियों के लिए खास रहने वाला है, क्योंकि इस वर्ष उन्हें चंद्रमा से जुड़ी 13 घटनाएं देखने को मिलेंगी. इनमें अर्धचंद्राकार, सूपरमून जैसी खगोलीय घटनाएं भी हैं.

13 spectacular lunar events in 2026: साल 2026 खगोल प्रेमियों के लिए बेहद शानदार रहने वाला है, क्योंकि आगामी चंद्र वर्ष में अर्धचंद्राकार चंद्रमा और ग्रहों के कई हैरान कर देने वाले नजारे देखने को मिलेंगे, साथ ही कई सूपरमून, एक पूर्ण सूर्य ग्रहण और एक ब्लड मून (पूर्ण चंद्र ग्रहण) भी दिखाई देगा.

इनमें से अधिकतर खगोलीय घटनाओं को नंगी आंखों से देख पाएंगे, लेकिन दूरबीन और बाइनोकुलर की सहायता से आप इसे और करीब से देख सकेंगे.

साल 2026 में चंद्रमा दर्शन से जुड़ी तिथियां-

साल 2026 का पहला सुपरमून

नए साल 2026 में पहला सुपरमून 3 जनवरी 2026, शनिवार के दिन लगने जा रहा है. जनवरी महीने की शुरुआत एक बेहतरीन दृश्य के साथ होने वाली है. जब आकाश में एक वु्ल्फ मून सुपरमून दिखाई देगा.

यह चंद्रमा आकार में काफी बड़ा होने के साथ अधिक चमकीला होगा, जो वर्ष 2026 में दिखाई देने वाले तीन सुपरमून में से पहला होगा.

वलयाकार सूर्य ग्रहण (annular solar eclipse)

17 फरवरी 2026, मंगलवार के दिन सूर्य ग्रहण लगेगा. एक बेहद शानदार वलायकार सूर्य ग्रहण में चंद्रमा द्वारा सूर्य के क्रेंद्र का करीब 96 प्रतिशत हिस्सा ढक जाएगा, जिससे एक चमकता हुआ छल्ला देखा जा सकेगा.

पूर्ण वलायकार चरण केवल अंटार्कटिक अनुसंधान केंद्रों से ही दिखाई देगा, जबकि आंशिक ग्रहण अंटार्कटिका और दक्षिणी अफ्रीका और अर्जेंटिना के कुछ क्षेत्रों से दिखाई देगा. 

अर्धचंद्राकार चंद्रमा और बुध

18 फरवरी 2026, बुधवार के दिन ठीक सूर्यास्त के बाद पश्चिमी आकाश में नीचे की ओर, बुध ग्रह के नजदीक एक बेहद पतला अर्धचंद्राकार चंद्रमा दिखाई देगा.

इस दिन चंद्रमा केवल 2 प्रतिशत ही प्रकाशित होगा, दूरबीन की सहायता से इसे साफ तौर पर देखा जा सकेगा, जिसमें शुक्र ग्रह नीचे और शनि ग्रह ऊपर की ओर चमक रहा होगा.

पूर्ण चंद्रग्रहण (Total lunar eclipse)

2-3 मार्च, 2026 में देर रात से लेकर सुबह तक. आमतौर पर 3 पूर्ण चंद्रग्रहण होते हैं, इनमें से अंतिम चंद्रग्रहण मार्च 2026 की शुरुआत में होगा और साल 2029 में यह आखिरी होगा. वर्ष 2025 में 2 चंद्रग्रहण लगे थे, जिनमें से एक ने उत्तरी अमेरिका के खगोलविदों को हैरान कर दिया था.

पश्चिमी उत्तरी अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, पूर्वी एशिया और प्रशांत के हिस्सों में इस दौरान पूर्णिमा का चंद्रग्रहण पृथ्वी की छाया में एंटर करेगा और 58 मिनट तक चलने वाले लाल रक्तचंद्र में परिवर्तन हो जाएगा. 

अर्धचंद्राकार चंद्रमा और शुक्र

20 मार्च 2026 को चमकीला शुक्र ग्रह के ऊपर 5 प्रतिशत प्रकाशित के साथ बढ़ता हुआ अर्धचंद्राकार चंद्रमा में दिखाई देगा, जिससे सूर्यास्त के बाद करीब 45 मिनट के बाद एक चमकीले ग्रह के पास नए चांद को देखने का मौका मिलेगा. दूरबीन के साथ इसका आनंद उठाया जा सकता है.

अर्धचंद्राकार चंद्रमा, शुक्र और प्लीएड्स

19 अप्रैल 2026 को सूर्यास्त के एक घंटे के बाद ओरियन के अस्त होते तारों का एक बेहद शानदार दृश्य देखने के लिए पश्चिमी दिशा की ओर देखें, जब 9 प्रतिशत प्रकाशित बढ़ता हुआ अर्धचंद्राकार चंद्रमा प्लीएड्स के समीप आता है, जिसके नीचे चमकीला शुक्र ग्रह होता है. 

पूर्ण सूर्य ग्रहण

12 अगस्त 2026, पूर्वी ग्रीनलैंड, उत्तरी स्पेन और पश्चिमी आइसलैंड से देखने पर चंद्रमा की छवि करीब 2 मिनट 18 सेंकड तक सूर्य पूरी तरह से ढक जाएगा. इस बेहद शानदार खगोलीय दृश्य को नंगी आंखों से देख पाना सरल नहीं होगा. उत्तरी अमेरिका में एक छोटा आंशिक सूर्य ग्रहण होगा और पूरे यूरोप में एक गहरा आंशिक सूर्य ग्रहण दिखाई देगा. 

आंशिक चंद्र ग्रहण

यूरोप, अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका और दक्षिण अमेरिका में साल 2026 में दूसरा चंद्र ग्रहण दिखाई देगा, लेकिन यह मार्च में हुए पहले चंद्र ग्रहण के जितना भव्य नहीं होगा.

चंद्रमा अंतरिक्ष में पृथ्वी की छाया में प्रवेश करेगा, लेकिन उसका मात्र 4 प्रतिशत हिस्सा ही पृथ्वी की छाया में आएगा, जिससे चंद्रमा की सतह विशेषता लाल रंह की प्रतीत होगी. पृथ्वी की छाया का किनारा धीरे-धीरे चंद्रमा पर आगे-पीछे होता रहेगा, जो पूर्ण ग्रहण न होने पर भी भव्य दिखाई देगा. 

मधुमक्खी के छत्ते के समूह में चंद्र

मधुमक्खी के छत्ते की आकृति का तारा समूह, तारों का एक का अद्भुत समूह जिसे दूरबीन की मदद से साफ तौर पर देखा जा सकेगा. 8 सितंबर 2026 को भोर से ठीक पहले घटते हुए अर्धचंद्राकार चंद्रमा के ठीक नीचे होगा, जिससे पूर्वी आकाश में सूर्योदय से पहले शानदार दृश्य बनेगा. 

चंद्रमा और शनि की युति

26 सितंबर 2026 को शनि ग्रह रात में आकाश में दिखाई देगा, लेकिन यह साफ तौर पर तभी दिखाई देगा जब चंद्रमा पूर्णिमा से ठीक पहले पूर्व दिशा में नजदीक से गुजरेगा. 

अर्धचंद्राकार चंद्रमा और बृहस्पति

चंद्रमा और बृहस्पति के बीच केवल 10 आर्क सेकंड की दूरी होने की वजह से एक बेहद दुर्लभ और अनोखा खगोलीय नजारा देखा जा सकेगा. इसे सूर्योदय से करीब 90 मिनट पहले पूर्व दिशा में देखना सबसे अच्छा होता है.

जब चंद्रमा करीब 20 प्रतिशत प्रकाशित होता है और विशाल ग्रह के सबसे नजदीक स्थित उसकी रात्रि हिस्से पर पृथ्वी की रोशनी दिखाई देती है. 

मंगल और बृहस्पति के साथ अर्धचंद्राकार चंद्रमा

साल 2026 के पहले छह महीनों में मंगल ग्रह रात के आकाश में दृश्यमान नहीं होगा, लेकिन अक्टूबर तक यह सूर्योदय से पहले दक्षिण-पूर्व दिशा में दिखाई देगा.

2 नवंबर 2026 को 43 प्रतिशत प्रकाशित के साथ घटता हुआ अर्धचंद्राकार चंद्रमा मंगल ग्रह के समीप आ जाएगा, जिसके ठीक नीचे बृहस्पति ग्रह दिखाई देगा. 

साल 2019 के बाद सबसे नजदीकी सुपरमून

इस साल 3 सुपरमून दिखाई देंगे. जिसमें पहला 3 जनवरी, दूसरा 24 नवंबर और तीसरा 23 दिसंबर 2026 को दिखाई देगा. 23 दिसंबर को दिखाई देने वाले सुपरमून खास रहने वाला है, क्योंकि ये पूर्णिमा चंद्रमा के सबसे निकट दिखाई देगा, जो साल 2019 के बाद सबसे करीब होगा.

19 फरवरी 2019 को दिखाई देने वाले सुपरमून से करीब 60 मील यानी 100 किमी अधिक दूर होगा, यानी मात्र 221,668 मील की दूरी पर, जिससे यह करीब 8 सालों में सबसे बड़ा और अधिक चमकीला पूर्णिमा का चंद्रमा बन जाएगा. लेकिन 10 फरवरी 2028 और 30 मार्च 2029 को दो सुपरमून पृथ्वी के ओर भी करीब आएंगे. 

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

अंकुर अग्निहोत्री (Ankur Agnihotri)

Astrology & Religion Content Writer

अंकुर अग्निहोत्री ABP Live के Astro & Religion सेक्शन से जुड़े डिजिटल पत्रकार हैं, जो दैनिक राशिफल, व्रत-त्योहार, ग्रह-गोचर और ज्योतिषीय विषयों पर सरल, तथ्य-आधारित और उपयोगी लेखन करते हैं. उनका कंटेंट विशेष रूप से उन पाठकों के लिए तैयार होता है जो ज्योतिष और धर्म को आसान भाषा में समझना चाहते हैं.

अंकुर पिछले 2+ वर्षों से ABP Live (abplive.com) में सक्रिय रूप से कार्यरत हैं और ज्योतिष, अंक शास्त्र, वास्तु शास्त्र, शकुन अपशकुन शास्त्र, हस्तरेखा, स्वप्न शास्त्र, चाइनीच ज्योतिष आदि पर आर्टिकल्स प्रकाशित करते हैं.

उनका काम हाई-फ्रीक्वेंसी कंटेंट प्रोडक्शन, ट्रेंड-आधारित स्टोरी चयन और यूजर-इंटेंट आधारित लेखन पर केंद्रित है, जिससे उनके लेख लगातार अच्छा डिजिटल एंगेजमेंट प्राप्त करते हैं. इसके अतिरिक्त अंकुर अग्निहोत्री निम्नलिखित विषयों पर भी लेखन करते हैं:

  • दैनिक और साप्ताहिक राशिफल
  • ग्रह-गोचर और ज्योतिषीय प्रभाव
  • व्रत-त्योहार और धार्मिक तिथियां

वे अपने लेखों में जानकारी प्रस्तुत करते समय, पंचांग आधारित तिथि, नक्षत्र और योग का संदर्भ लेते हैं. सामान्य ज्योतिषीय सिद्धांतों (ग्रह-स्थिति, गोचर प्रभाव) का उपयोग करते हैं और पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं और प्रचलित स्रोतों के आधार पर जानकारी देते हैं. अंकुर ABP Live जैसे प्रतिष्ठित डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म के साथ जुड़े हैं और Astro सेक्शन में नियमित रूप से कंटेंट प्रकाशित करते हैं.

उनके लेख धार्मिक मान्यताओं, पारंपरिक ज्योतिषीय सिद्धांतों और सामान्य स्रोतों पर आधारित होते हैं. वे किसी भी प्रकार के निश्चित या गारंटीड परिणाम का दावा नहीं करते और पाठकों को जानकारी को मार्गदर्शन के रूप में लेने की सलाह देते हैं. इन्होने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता की पढ़ाई की है.

अंकुर का फोकस ज्योतिष और धर्म को सरल, व्यावहारिक और समझने योग्य रूप में प्रस्तुत करना है, ताकि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर यह जानकारी हर वर्ग के पाठकों तक पहुंच सके.

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