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Shani Dev: शनि देव से मुस्लिम दुनिया भी खौफ खाती है? मानते हैं सबसे रहस्यमयी ग्रह!

Shani Dev: मुस्लिम दुनिया में शनि भी क्या शनि देव का खौफ चलता है? जानिए क्यों इससे सूफी संत और तांत्रिक दोनों भयभीत रहते हैं. शनि (Saturn) और इस्लाम का क्या है रहस्यमय कनेक्शन?

हिंदू धर्म में शनि (Shani Dev) को जहां न्याय और कर्मफल का देवता माना जाता है, वहीं मुस्लिम दुनिया में इसे 'जुहल' (Zuhal) कहा जाता है. मुस्लिम दुनिया में शनि को एक ऐसा ग्रह के रुप में देख जाता है, जो गंभीरता (Seriousness), विलंब (Delay), और कड़ी परीक्षा (Test) का प्रतीक है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि क्यों मुस्लिम समाज और तंत्र-मंत्र की दुनिया में शनि (Saturn) ग्रह को लेकर इतना डर और रहस्य कायम है?

इस्लामी ज्योतिष शास्त्र में शनि यानि जुहल (Zuhal) का स्थान
जानकार मानते हैं कि इस्लामिक सभ्यता के स्वर्ण युग (8वीं-13वीं शताब्दी) में खगोलशास्त्र (Astronomy) को विज्ञान की सबसे ऊंची शाखा माना जाता था. अल-बत्तानी (Al-Battani), अल-सूफ़ी (Al-Sufi), और अल-ख्वारिज़्मी (Al-Khwarizmi) जैसे महान वैज्ञानिकों ने ग्रहों की गति (Planetary Motion) को गहराई से समझा. उनके अनुसार-

  1. जुहल (Zuhal)- शनि (Saturn) सबसे धीमा चलने वाला ग्रह है.
  2. इसकी चाल सिर्फ़ समय (Time) नहीं, बल्कि व्यक्ति के भाग्य (Destiny) में ठहराव (Stagnation) और चुनौती (Challenge) का प्रतीक मानी जाती थी.
  3. यह ग्रह 'सब्र' (Patience) और 'इम्तेहान' (Trial) की निशानी है.

सूफी संत (Sufi Saints) और तांत्रिक (Tantrics) जुहल (Zuhal) से क्यों डरते थे?
सूफी परंपरा (Sufi Tradition) में जुहल (Zuhal) को ‘खामोश मगर असरदार’ (Silent but Powerful) ग्रह माना गया है. सूफी कवि रूमी (Rumi) ने जुहल (Zuhal) को ‘उस मौन शिक्षक (Silent Teacher)’ की उपाधि दी जो सबक तो देता है, मगर दर्द (Pain) से.

सूफियों के अनुसार, जब जुहल (Zuhal) किसी की ज़िंदगी (Life) में आता है, तो वह व्यक्ति अंदर से बदलने (Inner Transformation) लगता है. वह अकेलेपन (Solitude), आत्ममंथन (Self-Reflection) और रहस्यवाद (Mysticism) की ओर झुकता है.

तांत्रिकों (Tantrics) के लिए जुहल (Zuhal) एक डरावना लेकिन उपयोगी ग्रह (Useful Planet) रहा है. वे मानते हैं कि जुहल (Zuhal) की चाल से ‘ब्लैक मैजिक’ (Black Magic) और ‘प्रोटेक्शन मंत्र’ (Protection Mantras) ज़्यादा असर दिखाते हैं. कई मुस्लिम तांत्रिक जुहल (Zuhal) के वक्त काले धागे (Black Threads), सुरमा (Kohl), और लोहे के टोटके (Iron Amulets) इस्तेमाल करते हैं.

क्या कुरान में जुहल (Zuhal) का उल्लेख है?
सीधे तौर पर 'जुहल' (Zuhal) शब्द नहीं आता, लेकिन खगोलीय पिंडों (Celestial Bodies) और ग्रहों (Planets) का ज़िक्र कई आयतों (Verses) में है- 'He is the One who made the sun (Sun) a radiant light and the moon (Moon) a reflected light, and precisely determined its phases…'
(Surah Yunus 10:5)

अर्थ: 'अल्लाह ही है जिसने सूरज को तेज रौशनी वाला बनाया और चांद को सौम्य प्रकाश वाला. और उसी ने चांद की कलाओं (Phases) को एक तय क्रम में रखा, ताकि तुम वर्षों (Year) की गिनती और समय का हिसाब लगा सको. उसने ये सब कुछ अर्थ और उद्देश्य के साथ पैदा किया है. वह अपनी निशानियों को उन लोगों के लिए खुलकर बयान करता है, जो इसकी गहरी समझ रखते हैं.'

इससे साबित होता है कि इस्लामी विचारधारा (Islamic Ideology) में ग्रहों का अध्ययन (Study of Planets) सिर्फ़ ज्योतिष (Astrology) नहीं, बल्कि वैज्ञानिक जिज्ञासा (Scientific Curiosity) का हिस्सा था.

भारत और अरब: शनि (Saturn) और जुहल (Zuhal) का मिलन
आज भी भारत के मुस्लिम घरों में ‘शनिवार’ (Saturday) को जुहल (Zuhal) से जुड़े टोटके (Tactics), दुआएं (Prayers) और सुराख़ (Offerings) करने की परंपराएं मौजूद हैं, पाकिस्तान के इलाको में आज भी कई लोग शनिवार के दिन काले चने खाने को खाना अच्छा माना जाता है. काले चने का संबंध शनि से माना गया है. वहीं कुछ लोग शनिवार को लोहे का दान (Iron Donation) करते हैं. नीले (Blue) या काले रंग (Black Color) के कपड़े पहनते हैं और सूरह यासीन (Surah Yaseen) या सूरह रहमान (Surah Rahman) पढ़ते हैं जुहल (Zuhal) की नेमत (Blessings) के लिए

इस्लामिक दुनिया के लिए शानि यानि जुहल (Zuhal) क्या एक चेतावनी (Warning) है या फि एक शिक्षक (Teacher)?
चाहे वह भारतीय ज्योतिष (Indian Astrology) हो या इस्लामी सूफी परंपरा (Islamic Sufi Tradition), शनि या जुहल (Zuhal) दोनों ही एक गहरे बदलाव (Transformation) का संकेत (Sign) हैं. इनका डर अज्ञान (Ignorance) नहीं, बल्कि उनकी तीव्र आध्यात्मिक शक्ति (Spiritual Power) का स्वीकार (Acknowledgement) है. गौरतलब है कि बीते 29 मार्च 2025 को शनि का बड़ा परिवर्तन हुआ इसे भी ज्योतिष के जानकार दुनिया भर में बड़े बदलाव से जोड़कर देख रहे हैं, जब से शनि का राशि परिवर्तन हुआ तब देश-दुनिया में बड़ी हलचलें देखने को मिल रही हैं.

About the author Hirdesh Kumar Singh

हृदेश कुमार सिंह- वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य। मीडिया रणनीतिकार। डिजिटल कंटेंट विशेषज्ञ

हृदेश कुमार सिंह 25 वर्षों से वैदिक ज्योतिष, धर्म, अध्यात्म और डिजिटल पत्रकारिता पर कार्य कर रहे एक बहुआयामी विशेषज्ञ हैं. वर्तमान में वे ABPLive.com में Astro और Religion सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं, जहां वे ग्रहों की चाल को आधुनिक जीवन की दिशा में बदलने वाले संकेतों के रूप में प्रस्तुत करते हैं. हृदेश कुमार सिंह एक सम्मानित और अनुभव ज्योतिषी हैं.

इन्होंने Indian Institute of Mass Communication (IIMC, New Delhi) से पत्रकारिता में शिक्षा प्राप्त की है और Astrosage व Astrotalk जैसे प्रतिष्ठित प्लेटफॉर्म्स के साथ भी ज्योतिष सलाहकार के रूप में कार्य किया है. वे मीडिया रणनीति, कंटेंट लीडरशिप और धार्मिक ब्रांडिंग के विशेषज्ञ हैं.

प्रसिद्ध भविष्यवाणियां जो समय के साथ सच साबित हुईं- IPL 2025 के विजेता की पूर्व घोषणा. हनी सिंह की वापसी और संगीत सफलता. भारत में AI नीति बदलाव की अग्रिम भविष्यवाणी. डोनाल्ड ट्रंप की पुनः राष्ट्रपति पद पर वापसी और उसके बाद के निर्णय. पुष्पा 2: द रूल की बॉक्स ऑफिस सफलता और अल्लू अर्जुन के करियर ग्राफ.

शेयर बाजार क्रैश 2025 और दिल्ली की मुख्यमंत्री को लेकर भविष्यवाणी. पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की जवाबी कार्रवाई का सटीक पूर्वानुमान. क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी के डेब्यू और लोकप्रियता का संकेत. ये सभी भविष्यवाणियां शुद्ध वैदिक गणना, गोचर, दशा-अंतरदशा और मेदिनी ज्योतिषीय विश्लेषण पर आधारित थीं, जिन्हें समय ने सत्य सिद्ध किया.

विशेषज्ञता के क्षेत्र: वैदिक ज्योतिष, संहिता, होरा शास्त्र, अंक ज्योतिष और वास्तु. करियर, विवाह, शिक्षा, लव लाइफ, बिज़नेस, हेल्थ के लिए ग्रहों और मनोविज्ञान का समन्वित विश्लेषण. कॉर्पोरेट नीति, ब्रांड रणनीति और मीडिया कंटेंट प्लानिंग में ज्योतिषीय हस्तक्षेप. डिजिटल धर्म पत्रकारिता और गूगल रैंकिंग के अनुकूल धार्मिक कंटेंट का निर्माण करने में ये निपुण हैं.

उद्देश्य: 'ज्योतिष को भय या भाग्य का उपकरण नहीं, बल्कि जीवन के लिए बौद्धिक और आध्यात्मिक सहारा बनाना' हृदेश कुमार सिंह का मानना है कि ज्योतिष केवल प्रश्नों का उत्तर नहीं देता, वह सही समय पर साहसिक निर्णय लेने की दिशा दिखाता है.

अन्य रुचियां: फिल्मों की संरचनात्मक समझ, संगीत की मनोवैज्ञानिक गहराई, साहित्यिक दर्शन, राजनीति की परख. बाजार की समझ और यात्राओं से अर्जित मानवीय अनुभव ये सभी उनके लेखन में एक बहुस्तरीय अंतर्दृष्टि जोड़ते हैं. उनकी रुचियां केवल विषयगत नहीं, बल्कि उनके हर लेख, भविष्यवाणी और रणनीति को संवेदनशीलता और संस्कृति से जोड़ने वाली ऊर्जा हैं.

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