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राहुल की रैली से पहले गुरु गोचर, क्या रामलीला मैदान से हिलेगी मोदी सरकार?

राहुल गांधी की दिल्ली रैली से ठीक 24 घंटे पहले देवगुरु का राशि परिवर्तन. जानें रामलीला मैदान के इस सियासी दंगल पर क्या कहते हैं ज्योतिषीय संकेत.

1 नवंबर को दिल्ली का ऐतिहासिक रामलीला मैदान एक बार फिर बड़े सियासी घमासान का गवाह बनने जा रहा है. कांग्रेस समेत समूचा विपक्ष मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ हुंकार भरने की तैयारी में है. राहुल गांधी खुद छात्रों और युवाओं से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर जुटने की अपील कर रहे हैं.

दिलचस्प बात यह है कि इस सियासी शक्ति प्रदर्शन से ठीक एक दिन पहले यानी 31 अक्टूबर को देवगुरु बृहस्पति का बड़ा राशि परिवर्तन हो रहा है. ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार यह गोचर राहुल गांधी के जनाधार और जनसंपर्क के लिहाज से बेहद अहम है. मगर क्या यह बदलाव सीधे तौर पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर दबाव बनाने के लिए काफी होगा?

सियासी हलचल: कारोबारियों की चिंता और पुलिस की सख्त शर्तें

रैली की तारीख नजदीक आते ही राजधानी में हलचल तेज है. एक तरफ जहां राहुल गांधी ने छात्र संगठनों और नागरिक समाज से साझा मंच पर आने का आह्वान किया है, वहीं दूसरी तरफ त्योहारी सीजन का हवाला देकर व्यापारियों के एक वर्ग ने इस रैली को टालने की मांग उठाई है.

प्रशासनिक मोर्चे पर दिल्ली पुलिस ने साफ कर दिया है कि रैली की इजाजत रद्द नहीं की गई है. कार्यक्रम सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगा. हालांकि सुरक्षा और यातायात को ध्यान में रखते हुए सख्त हिदायतें दी गई हैं, मैदान से बाहर किसी भी तरह के पैदल मार्च या प्रदर्शन की अनुमति नहीं होगी.

गुरु का गोचर, राहुल की कुंडली क्या कहती है?

31 अक्टूबर को गुरु कर्क राशि से निकलकर सिंह राशि में प्रवेश करेंगे. राहुल गांधी की उपलब्ध जन्म कुंडली (तुला लग्न और धनु राशि) के लिहाज से यह गोचर बेहद खास है, कैसे आइए समझते हैं-

11वें और 9वें भाव का संयोग: तुला लग्न से सिंह राशि 11वां (लाभ व विस्तार) भाव है, जबकि चंद्र राशि धनु से यह 9वां (भाग्य व जनसमर्थन) स्थान बनता है. शास्त्रीय ग्रंथ फलदीपिका के अनुसार जन्मचंद्र से नवम भाव में गुरु का भ्रमण संपर्क और प्रयासों में अनुकूलता लाता है.

भिन्नाष्टकवर्ग की मजबूती: गुरु भिन्नाष्टकवर्ग में सिंह राशि को 7 शुभ बिंदु मिले हैं, जो यह संकेत देते हैं कि राहुल का संदेश पार्टी के पारंपरिक कोर वोटर से आगे निकलकर नए वर्गों तक पहुंच सकता है.

वेध रहित स्थिति: नवम गुरु का वेध स्थान कन्या राशि है. रैली के दिन वहां कोई प्रमुख पाप या बाधक ग्रह न होने से गोचर की अनुकूलता में तकनीकी बाधा नहीं दिखती.

केतु की युति और 8वां चंद्रमा: जहां छिपी है असली चुनौती

गोचर अनुकूल दिखते हुए भी राह पूरी तरह आसान नहीं है. कुछ कड़े ज्योतिषीय पहलू इस मुहिम की निरंतरता पर सवाल खड़े करते हैं-

1. गुरु-केतु की नजदीकी: 1 नवंबर को सिंह राशि में गुरु और केतु के बीच महज 1 डिग्री 42 मिनट का फासला रहेगा. गुरु मघा नक्षत्र में होंगे, जिसके स्वामी स्वयं केतु हैं. ज्योतिष में गुरु अगर फैलाव और जुड़ाव का प्रतीक है, तो केतु अलगाव और असमंजस का. इसका सीधा सियासी अर्थ यह निकाला जा सकता है कि साझा मंच पर भीड़ तो जुट सकती है, लेकिन सहयोगियों का एजेंडा और प्राथमिकताएं अलग-अलग राह पकड़ सकती हैं.

2. ताराबल मजबूत, लेकिन चंद्रबल कमजोर: रैली के दिन पुष्य नक्षत्र राहुल गांधी के जन्म नक्षत्र (मूल) से 'मित्र तारा' में आता है, जो संवाद के लिए उत्तम है. हालांकि, कर्क राशि का चंद्रमा उनकी जन्मराशि धनु से 8वें भाव में गोचर करेगा. ज्योतिषीय दृष्टि से अष्टम चंद्रमा मानसिक तनाव और तात्कालिक अड़चनों का कारक बनता है, भले ही लग्न से दशम भाव में स्वराशि का होने से सार्वजनिक सक्रियता बनी रहे.

क्या मोदी सरकार पर बढ़ेगा दबाव?

ज्योतिषीय दृष्टिकोण से 1 नवंबर को राहुल गांधी पर राहु-शनि-राहु की दशा प्रभावी रहेगी, जबकि गुरु का प्रत्यंतर 12 नवंबर के बाद शुरू होगा. इसलिए केवल गोचर के आधार पर तत्काल किसी बड़े नीतिगत उलटफेर या सरकार के बैकफुट पर आने का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी.

सियासी तौर पर 1 नवंबर का दिन राहुल गांधी के लिए अपना सियासी वजन और विपक्ष की एकजुटता दिखाने का एक बड़ा मंच जरूर साबित हो सकता है. असली इम्तिहान रामलीला मैदान में जुटने वाली भीड़ नहीं, बल्कि उसके बाद की रणनीति होगी, क्या यह साझा समर्थन संसद के अगले सत्र और राज्यों के आगामी चुनावों तक टिक पाएगा?

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

हृदेश कुमार सिंह । Hirdesh Kumar Singh 

Senior Vedic Astrologer । Head – Religion & Astrology, ABP Live । Lead – ABP Dharma LIVE

हृदेश कुमार सिंह वरिष्ठ वैदिक ज्योतिषाचार्य और मीडिया पेशेवर हैं. उन्हें ज्योतिष, धर्म और मीडिया के क्षेत्र में 17 साल से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वे ABP Live में Religion & Astrology वर्टिकल का नेतृत्व करते हैं. साथ ही ABP Dharma LIVE की कंटेंट और डिजिटल रणनीति की जिम्मेदारी संभालते हैं.

उनके काम में ज्योतिषीय लेखन, संपादन, वेबसाइट और वीडियो के लिए विषय चयन तथा संपादकीय योजना शामिल है. वे Search, Google Discover और सोशल मीडिया पर पाठकों की रुचि को ध्यान में रखकर धर्म और ज्योतिष की कवरेज तय करते हैं.

पंचांग, राशिफल, ग्रह गोचर, व्रत-त्योहार और धार्मिक परंपराएं उनके लेखन के प्रमुख विषय हैं. वे करियर, विवाह, शिक्षा और व्यापार से जुड़े सवालों पर भी लिखते हैं. राजनीति और सामाजिक घटनाओं पर उनके ज्योतिषीय विश्लेषण वैदिक गणना, गोचर और मेदिनी ज्योतिष पर आधारित होते हैं. इनमें ग्रह स्थितियों को संभावित संकेतों के रूप में प्रस्तुत किया जाता है.

उन्होंने Indian Institute of Mass Communication (IIMC), नई दिल्ली से पत्रकारिता और IIMT University, मेरठ से ज्योतिष शास्त्र एवं वास्तु शास्त्र की शिक्षा ग्रहण की है. वे AstroSage और Astrotalk जैसे प्लेटफॉर्म के साथ भी काम कर चुके हैं. उन्होंने Semrush Academy से 'Content Marketing Essentials for SEO and AI Search with Semrush' सर्टिफिकेशन प्राप्त किया है.

नई पीढ़ी के पाठकों के लिए उन्होंने 'Gen-Z Horoscope' जैसे प्रारूप पर काम किया है. इसमें पढ़ाई, नौकरी, रिश्तों और रोजमर्रा के फैसलों से जुड़े सवालों को राशिफल में जगह दी गई है. उनके लेख धार्मिक परंपराओं से जुड़े उन प्रश्नों पर भी केंद्रित होते हैं, जो बदलती जीवनशैली में सामने आते हैं.

वैदिक ज्योतिष, होरा शास्त्र, संहिता, मेदिनी ज्योतिष, अंक ज्योतिष, शकुन शास्त्र और वास्तु उनके अध्ययन एवं लेखन के विषय हैं. उनका मानना है, 'ज्योतिष केवल भविष्य बताने की विद्या नहीं, बल्कि समय को समझने की कला है.'

ज्योतिष और मीडिया के अलावा उन्हें सिनेमा, संगीत, साहित्य, राजनीति, पर्यावरण, ग्रामीण जीवन और यात्राओं में विशेष रुचि है.

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