Surya Grahan 2027: 6 फरवरी को लगेगा साल का पहला सूर्य ग्रहण, जानिए भारत में दिखेगा या नहीं और सूतक के नियम
Surya Grahan: साल 2027 का पहला सूर्य ग्रहण 6 फरवरी को! जानें भारत में इसका क्या असर होगा, क्या सूतक के कड़े नियम लागू होंगे और खगोल वैज्ञानिकों की इस पर क्या राय है.

Surya Grahan 2027: साल 2027 खगोलीय घटनाओं के लिहाज से बेहद खास रहने वाला है. इस साल का पहला सूर्य ग्रहण 6 फरवरी 2027 (शनिवार) को लगेगा. वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह एक 'वलयाकार सूर्य ग्रहण' (Annular Solar Eclipse) होगा, जिसे आम बोलचाल में 'रिंग ऑफ फायर' कहा जाता है.
हर ग्रहण की तरह इस बार भी लोगों के मन में यही सवाल है कि क्या यह ग्रहण भारत में दिखाई देगा और क्या इसके चलते देश में सूतक काल के कड़े नियम लागू होंगे? राष्ट्रीय पंचांग और मौसम विभाग के अनुसार, स्थिति पूरी तरह साफ हो चुकी है.
कब शुरू होगा ग्रहण? नोट करें सटीक समय (IST)
राष्ट्रीय पंचांग के अनुसार, 6 फरवरी को होने वाली यह खगोलीय घटना भारतीय समयानुसार शाम से शुरू होकर देर रात तक चलेगी:
- तारीख: 6 फरवरी 2027 (शनिवार)
- ग्रहण की शुरुआत: शाम 06:28 बजे (IST)
- ग्रहण का समापन: रात 12:32 बजे (7 फरवरी तड़के, IST)
- ग्रहण का प्रकार: वलयाकार सूर्य ग्रहण
- कुल प्रभाव अवधि: लगभग 6 घंटे 04 मिनट
चूंकि ग्रहण आधी रात के बाद खत्म होगा, इसलिए कैलेंडर के मुताबिक इसकी शुरुआत 6 फरवरी और समापन 7 फरवरी को दर्ज होगा.
क्या भारत में दिखेगा 'रिंग ऑफ फायर'?
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के पंचांग के मुताबिक, 6 फरवरी 2027 का यह सूर्य ग्रहण भारत में कहीं भी दिखाई नहीं देगा.
किन देशों में दिखेगा? यह अद्भुत नजारा दक्षिण अमेरिका, अंटार्कटिका और अफ्रीका के कुछ सीमित हिस्सों में देखा जा सकेगा.
भारत में क्यों नहीं दिखेगा? जिस समय यह ग्रहण अपने चरम पर होगा, उस समय भारत में रात हो चुकी होगी और सूर्य क्षितिज के नीचे रहेगा.
क्या भारत में सूतक काल माना जाएगा?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्य ग्रहण से ठीक 12 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है, जिसमें पूजा-पाठ, भोजन पकाने और मांगलिक कार्यों की मनाही होती है.
धार्मिक पंचांगों के अनुसार: वैदिक ज्योतिष का स्पष्ट नियम है कि ग्रहण का सूतक और धार्मिक प्रभाव केवल उसी भूभाग पर मान्य होता है जहां ग्रहण खुली आंखों से देखा जा सके. चूंकि 6 फरवरी का ग्रहण भारत में पूरी तरह अदृश्य रहेगा, इसलिए भारत में सूतक काल मान्य नहीं होगा. मंदिर खुले रहेंगे, पूजा-पाठ निर्बाध चलेगा और सामान्य दैनिक कार्यों पर कोई पाबंदी नहीं रहेगी.
'वलयाकार ग्रहण' क्या होता है?
जब चंद्रमा घूमते हुए सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है, तो सूर्य की रोशनी कुछ देर के लिए रुक जाती है. जब चंद्रमा पृथ्वी से अपनी कक्षा में अधिकतम दूरी पर होता है, तो वह आकाश में छोटा दिखाई देता है. इस स्थिति में चंद्रमा सूर्य के पूरे हिस्से को नहीं ढक पाता, बल्कि केवल उसका केंद्रीय भाग ही छिपता है. इसके चलते सूर्य की बाहरी परिधि एक चमकती हुई सुनहरी अंगूठी जैसी दिखती है, जिसे विज्ञान में 'रिंग ऑफ फायर' कहा जाता है.
2 अगस्त 2027 को भारत में दिखेगा दूसरा ग्रहण
खगोल प्रेमियों को भारत में ग्रहण देखने के लिए साल के दूसरे ग्रहण का इंतजार करना होगा.
2 अगस्त 2027 को साल का दूसरा सूर्य ग्रहण लगेगा.
वैश्विक स्तर पर यह पूर्ण सूर्य ग्रहण (Total Solar Eclipse) होगा.
भारत में स्थिति: देश के कई हिस्सों, विशेषकर पश्चिमी और दक्षिणी राज्यों में, यह आंशिक सूर्य ग्रहण (Partial Solar Eclipse) के रूप में दिखाई देगा. इस दिन भारत में दृश्यता के अनुसार सूतक काल के नियम भी प्रभावी होंगे.
आंखों की सुरक्षा: भूलकर भी न करें ये गलतियां
ग्रहण देखते समय आंखों का ध्यान रखना सबसे अहम होता है:
सीधे नंगी आंखों से न देखें: सूर्य की पराबैंगनी किरणें रेटिना को स्थायी नुकसान पहुंचा सकती हैं.
सर्टिफाइड चश्मा जरूरी: इसे देखने के लिए हमेशा ISO 12312-2 मानक वाले सोलर फिल्टर चश्मों का इस्तेमाल करें.
साधारण धूप का चश्मा बेकार: साधारण सनग्लासेस, एक्स-रे फिल्म या कैमरा लेंस हानिकारक किरणों को रोक नहीं पाते.
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