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Earthquake Tsunami Warning Alert: सुनामी या भूकंप से पहले बेचैन क्यों होते हैं जानवर? इस रहस्य को जानकार उड़ जाएंगे होश

रूस (Russia), जापान (Japan) में भूकंप (Earthquake) और सुनामी (Tsunami) से दहशत है. क्या भूकंप या सुनामी आने से पहले कुत्ते, हाथी या पक्षी बेचैन हो जाते हैं? जानिए विज्ञान और गरुड़ पुराण क्या कहते हैं.

Earthquake Tsunami Warning Alert: रूस में आए भीषण भूकंप के बाद जापान और अमेरिका के समुद्री तटों पर सुनामी का गंभीर खतरा बना हुआ है. इसको देखते हुए संबंधित देशों ने तटीय क्षेत्रों के लिए सुनामी अलर्ट जारी कर दिया है ताकि समय रहते एहतियाती कदम उठाए जा सकें.

लेकिन क्या आप जानते हैं कि भूकंप या सुनामी आने से पहले जीव-जंतु बेचैन हो जाते हैं, वैज्ञानिक भी इससे हैरान रहते हैं! अब प्रश्न उठता है कि क्या इंसान से पहले जानवर आपदा को महसूस कर लेते हैं?

भूकंप और सुनामी जैसी प्राकृतिक आपदाओं को इंसानों से पहले कई पशु-पक्षी, समुद्री जीव, और कीड़े महसूस कर लेते हैं. इसका कारण है उनकी संवेदनशील इंद्रियां, विशेषत ध्वनि, कंपन और विधुत चुंबकीय तरंगों के प्रति प्रतिक्रिया. वैज्ञानिक शोध और ऐतिहासिक प्रमाण बताते हैं कि जानवरों का असामान्य व्यवहार कई बार भूकंप आने का संकेत देता है.

क्या वाकई जानवरों को आपदा का पूर्वाभास हो जाता है, परंपरा और विज्ञान दोनों क्या कहते हैं?
भारत, जापान, चीन, इंडोनेशिया और इटली जैसी भूकंप-प्रवण जगहों पर ऐतिहासिक रूप से दर्ज है कि भूकंप से पहले कुत्ते भौंकने लगे, पक्षी झुंड में उड़ने लगे, और सांप बिलों से बाहर आ गए.

2004 की सुनामी से पहले इंडोनेशिया के अंडमान द्वीपों में हाथी ऊंचाई की ओर भाग गए थे, उन्होंने इंसानों से पहले खतरे को महसूस कर लिया था.

कौन-कौन से जीव प्राकृतिक आपदाओं से पहले असामान्य व्यवहार दिखाते हैं?

जीव पूर्वाभास लक्षण
हाथी अचानक चिल्लाना, झुंड में दौड़ना
कुत्ते भौंकना, भागना, दीवारों को घूरना
सांप ठंड में भी बिल से बाहर आना
चींटियां बिलों से निकलना, तेज़ी से दौड़ना
पक्षी झुंड में बेतहाशा उड़ना
मछलियां सतह पर तैरना, पानी से बाहर कूदना

वैज्ञानिक क्या कहते हैं? कंपन, इंफ्रासाउंड और विद्युत तरंगें हैं वजह
जानवरों की इंद्रियां बहुत अधिक संवेदनशील होती हैं, विशेषकर उनके श्रवण तंत्र (hearing system) और स्पर्श-संवेदन तंत्र.

भूकंप आने से पहले पृथ्वी की पपड़ी में जो अत्यल्प-आवृत्ति वाली ध्वनि तरंगें (Infrasound) और भूकंपीय तरंगें (Seismic Waves) उत्पन्न होती हैं, वे इंसान नहीं, परंतु जानवर महसूस कर सकते हैं.

कुछ जीव विधुत-चुंबकीय परिवर्तन भी महसूस कर लेते हैं, जो प्लेटों के हिलने से उत्पन्न होते हैं.

गरुड़ पुराण और भारतीय ग्रंथों में क्या संकेत हैं?
आपदां पशवो गृह्णंति पूर्वं लक्षणतश्च वै.
(गरुड़ पुराण, प्रेतखण्ड – अध्याय 16)

इस श्लोक का अर्थ है-पशु-पक्षी आपदा से पहले ही उसके लक्षणों को पहचान लेते हैं. ऋषियों ने भी बताया है कि देहातीत संवेदना (Extra-sensory perception) वाले जीव मानवों से पहले प्रकृति में परिवर्तन भांप लेते हैं.

जापान और चीन में क्यों रखे जाते हैं- भूकंप चेतावनी वाले पालतू जीव?
जापान में कई पालतू कुत्तों और बिल्लियों को भूकंप रिएक्शन डिवाइस के रूप में ट्रेंड किया गया है. चीन के नानजिंग शहर ने 1975 में भूकंप से पहले जानवरों के व्यवहार को देखकर पूरे शहर को खाली करा दिया था, जिससे हजारों जानें बच गईं.

क्या ये वैज्ञानिक दृष्टिकोण Early Warning System को बेहतर बना सकते हैं?
AI और Sensor आधारित तकनीक अब जानवरों के व्यवहार को ट्रैक कर रही है, यदि कोई कुत्ता, पक्षी या चींटी असामान्य हरकत करे, तो उसे सिस्टम अलर्ट कर सकता है.

वैज्ञानिक इसे Bio-Sensor Ecosystem कहते हैं , जिसमें प्रकृति, प्राणी और तकनीक साथ मिलकर आपदा पूर्व सूचना दे सकते हैं.

क्या हमें जानवरों के संकेतों को गंभीरता से लेना चाहिए?
हां, 100%. क्योंकि:-

  1. प्रकृति में हजारों वर्षों से यह चेतना विद्यमान है.
  2. कई बार टेक्नोलॉजी भी फेल हो जाती है, लेकिन जानवरों की चेतना सही समय पर जागती है.
  3. यदि समय रहते ध्यान दिया जाए, तो भविष्य में हजारों जानें बचाई जा सकती हैं.

कौन सा जीव, कौन सा संकेत

जानवर  संकेत संभावित आपदा
हाथी ऊंचाई की ओर भागना सुनामी
कुत्ते बेचैनी, भौंकना भूकंप
सांप बिल से बाहर आना भूकंप
पक्षी दिशा भ्रमित उड़ान तूफान/भूकंप
चींटी बिल से पलायन बाढ़/भूकंप

भूकंप और सुनामी जैसे संकट आने से पहले जानवरों के व्यवहार में बदलाव आना सिर्फ कहानी नहीं, बल्कि शास्त्र और विज्ञान दोनों से प्रमाणित तथ्य है. अगली बार जब आप कुत्ते को बिना कारण भौंकते या पक्षियों को झुंड में भागते देखें, तो उसे हल्के में न लें , ये प्रकृति का अलार्म सिस्टम हो सकता है.

FAQ
Q. क्या वैज्ञानिक रूप से साबित हो गया है कि जानवर आपदा भांप सकते हैं?
हाँ, कई शोध जैसे UC Davis (2011), और China Earthquake Administration के अध्ययन इस तथ्य को समर्थन देते हैं.

Q. क्या केवल कुत्ते ही ये संकेत दे सकते हैं?
नहीं, कई अन्य जीव जैसे पक्षी, हाथी, सांप, मछलियां भी संकेत देते हैं.

Q. क्या हमें इस व्यवहार पर विश्वास करना चाहिए?
यदि यह असामान्य रूप से बड़ी संख्या में दिखे , जैसे कई कुत्ते या पक्षी एक साथ बेकाबू हो जाएँ , तो ज़रूर सतर्क हो जाना चाहिए.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

About the author Hirdesh Kumar Singh

हृदेश कुमार सिंह- वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य। मीडिया रणनीतिकार। डिजिटल कंटेंट विशेषज्ञ

हृदेश कुमार सिंह 25 वर्षों से वैदिक ज्योतिष, धर्म, अध्यात्म और डिजिटल पत्रकारिता पर कार्य कर रहे एक बहुआयामी विशेषज्ञ हैं. वर्तमान में वे ABPLive.com में Astro और Religion सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं, जहां वे ग्रहों की चाल को आधुनिक जीवन की दिशा में बदलने वाले संकेतों के रूप में प्रस्तुत करते हैं. हृदेश कुमार सिंह एक सम्मानित और अनुभव ज्योतिषी हैं.

इन्होंने Indian Institute of Mass Communication (IIMC, New Delhi) से पत्रकारिता में शिक्षा प्राप्त की है और Astrosage व Astrotalk जैसे प्रतिष्ठित प्लेटफॉर्म्स के साथ भी ज्योतिष सलाहकार के रूप में कार्य किया है. वे मीडिया रणनीति, कंटेंट लीडरशिप और धार्मिक ब्रांडिंग के विशेषज्ञ हैं.

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विशेषज्ञता के क्षेत्र: वैदिक ज्योतिष, संहिता, होरा शास्त्र, अंक ज्योतिष और वास्तु. करियर, विवाह, शिक्षा, लव लाइफ, बिज़नेस, हेल्थ के लिए ग्रहों और मनोविज्ञान का समन्वित विश्लेषण. कॉर्पोरेट नीति, ब्रांड रणनीति और मीडिया कंटेंट प्लानिंग में ज्योतिषीय हस्तक्षेप. डिजिटल धर्म पत्रकारिता और गूगल रैंकिंग के अनुकूल धार्मिक कंटेंट का निर्माण करने में ये निपुण हैं.

उद्देश्य: 'ज्योतिष को भय या भाग्य का उपकरण नहीं, बल्कि जीवन के लिए बौद्धिक और आध्यात्मिक सहारा बनाना' हृदेश कुमार सिंह का मानना है कि ज्योतिष केवल प्रश्नों का उत्तर नहीं देता, वह सही समय पर साहसिक निर्णय लेने की दिशा दिखाता है.

अन्य रुचियां: फिल्मों की संरचनात्मक समझ, संगीत की मनोवैज्ञानिक गहराई, साहित्यिक दर्शन, राजनीति की परख. बाजार की समझ और यात्राओं से अर्जित मानवीय अनुभव ये सभी उनके लेखन में एक बहुस्तरीय अंतर्दृष्टि जोड़ते हैं. उनकी रुचियां केवल विषयगत नहीं, बल्कि उनके हर लेख, भविष्यवाणी और रणनीति को संवेदनशीलता और संस्कृति से जोड़ने वाली ऊर्जा हैं.

 
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