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Full Case Study: क्या बायजू रवींद्रन का खेल हमेशा के लिए खत्म? जानिए कुंडली की वो चौंकाने वाली भविष्यवाणी!

Byju Raveendran Case Study: जानिए $22 बिलियन की कंपनी BYJU'S के पतन और बायजू रवींद्रन को मिली 6 महीने की जेल के पीछे छिपे प्रश्न कुंडली के वो 3 विनाशकारी योग.

Case Study Astro: भारत के सबसे बड़े एडटेक (EdTech) बिजनेस के मालिक बायजू रवींद्रन के साथ जो कुछ भी हुआ, वह आज के नए बिजनेस शुरू करने वालों के लिए एक बड़ी सीख और केस स्टडी बन चुका है.

जिस कंपनी की कीमत कभी 22 अरब डॉलर (लगभग 1.8 लाख करोड़ रुपये) लगाई गई थी, आज उसकी वैल्यू पूरी तरह खत्म हो चुकी है. सिंगापुर की अदालत ने 'कोर्ट की बात न मानने' (Contempt of Court) के मामले में उन्हें 6 महीने की जेल की सजा सुनाई है, जिसने इस पूरे बिजनेस के डूबने पर एक कानूनी मुहर लगा दी है.

बिजनेस के जानकार भले ही इसे पैसों की हेराफेरी, गलत तरीके से दूसरी कंपनियां खरीदने का बोझ और कैश की कमी मानकर इसकी वजह बताएं, लेकिन जब इस पूरे घटनाक्रम को इस संकट के समय बनी 'प्रश्न कुंडली' (Prashna Kundali) के नियमों और ज्योतिष के तराजू पर तौला जाता है, तो इसके पीछे ग्रहों का एक ऐसा जाल दिखाई देता है जिसे कोई टाल नहीं सकता.

यह पूरी केस स्टडी इस बात का सबूत है कि बिजनेस के नियमों और पैसों के हिसाब-किताब में की गई लापरवाही किस तरह ग्रहों के न्याय के चक्र में बदल जाती है.

राजा जैसी शुरुआत: सिंह लग्न और दशम सूर्य ने कैसे बनाया 'स्टार्टअप किंग'?

इस संकट के समय बनी प्रश्न कुंडली को गहराई से देखने पर 'सिंह लग्न' (Leo Ascendant) सामने आता है, जिसे ज्योतिष में राजा, लीडरशिप और अकेले राज करने का पक्का प्रतीक माना जाता है.

इस समय चक्र का सबसे मजबूत हिस्सा यह है कि लग्न का मालिक यानी 'सूर्य' कुंडली के 10वें घर (कर्म और मान-प्रतिष्ठा के स्थान) में पूरी ताकत के साथ बैठा है. बिजनेस के नजरिए से यह स्थिति साफ दिखाती है कि बायजू के इस बिजनेस साम्राज्य की नींव किसी छोटे विचार पर नहीं, बल्कि एक बहुत बड़े और ग्लोबल विजन पर टिकी थी, जिसने एक साधारण टीचर को देश का सबसे बड़ा 'स्टार्टअप किंग' बना दिया.

लेकिन ज्योतिष का एक तय नियम है कि ग्रह जब किसी इंसान को बहुत ऊंचाई पर ले जाता है, तो उस दौरान की गई लापरवाही उसे उसी तेजी से नीचे भी गिराती है.

यह भी पढ़ें- जून 2026 में किसकी नौकरी सुरक्षित और कौन रहेगा खतरे में? ग्रहों से समझें

10वें घर का मजबूत सूर्य इंसान के अंदर एक 'अहंकार' भी पैदा कर देता है, जहां बिजनेस करने वाले को लगने लगता है कि वह सरकारी नियमों, ऑडिट और कायदों से ऊपर है. यही जरूरत से ज्यादा आक्रामक सोच इस महा-पतन की पहली मुख्य वजह बनी.

राहु का वो मायाजाल, जिसने पार्टनरशिप को 'अविश्वास के दलदल' में धकेला

किसी भी बड़े बिजनेस को लंबे समय तक चलाने के लिए उसके निवेशकों (Investors) और पार्टनर्स के साथ आपसी भरोसा और पारदर्शिता होना बहुत जरूरी है. इस प्रश्न कुंडली के 'सातवें घर' (7th House) को देखना बेहद जरूरी है, क्योंकि यह घर सीधे तौर पर बिजनेस, पार्टनरशिप और समाज में आपकी साख को दिखाता है.

Full Case Study: क्या बायजू रवींद्रन का खेल हमेशा के लिए खत्म? जानिए कुंडली की वो चौंकाने वाली भविष्यवाणी!

इस समय इस घर में मायावी ग्रह 'राहु' का गोचर चल रहा है. राहु को ज्योतिष में भ्रम, जरूरत से ज्यादा उत्साह, अनियंत्रित इच्छाओं और अचानक होने वाले बड़े उलटफेर का कारक माना जाता है. जब राहु का असर बिजनेस के घर पर बहुत ज्यादा होता है, तो इंसान जमीनी हकीकत और बाजार के संतुलन को भूल जाता है.

बायजू के मामले में भी यही हुआ, कोरोना के समय आई अस्थायी तेजी को हमेशा के लिए सच मानकर कंपनी ने भारी कर्ज (Debt) और बाहरी फंडिंग के दम पर आंखें मूंदकर दूसरी कंपनियां (जैसे व्हाइटहैट जूनियर और आकाश) खरीदना शुरू कर दिया.

राहु के इस भ्रम का नतीजा यह हुआ कि जैसे ही बाजार सामान्य हुआ, कंपनी पैसों के गहरे संकट में घिर गई और निवेशकों के साथ भरोसा इस कदर टूटा कि उनके अपने ही पुराने साथियों ने उन्हें पद से हटाने के लिए खुला कानूनी मोर्चा खोल दिया.

अष्टम का शनि: जब छिपने लगे वित्तीय रहस्य, तो मिला 'न्याय का कड़ा दंड'

ज्योतिष में छठे, आठवें और बारहवें घर को 'त्रिक भाव' या संकट के घर कहा जाता है, जो जीवन में मुसीबत, विवाद और जेल की स्थिति को तय करते हैं. इस प्रश्न कुंडली के 'आठवें घर' (8th House) में न्याय और कर्म के देवता 'शनि' महाराज बैठे हैं और खास बात यह है कि शनि यहां कुंडली के छठे घर (शत्रु, कर्ज और कोर्ट-कचहरी) के मालिक होकर बैठे हैं.

सिंगापुर की अदालत ने जो 6 महीने की सजा सुनाई है, उसका कारण कोई सामान्य बिजनेस का घाटा या मंदी नहीं थी, बल्कि 'कोर्ट के आदेशों को बार-बार टालना' और अपनी संपत्ति का सही ब्योरा न देना था. आठवां घर गुप्त धन, अचानक आने वाली रुकावटों और छिपे हुए रहस्यों का होता है.

जब कोर्ट-कचहरी के घर का मालिक संकट के घर (आठवें) में बैठता है, तो इंसान के छिपे हुए वित्तीय रहस्य और बिजनेस की कमियां खुलकर दुनिया के सामने आ जाती हैं. बायजू द्वारा अपनी पैसों की रिपोर्ट (Audited Reports) में महीनों की देरी करना और कर्ज देने वालों के साथ हिसाब-किताब साझा न करना इसी बात का सबूत है. शनि चूंकि बिल्कुल निष्पक्ष न्याय के प्रतीक हैं, इसलिए जब बिजनेस में ईमानदारी और अनुशासन की कमी होती है, तो शनि का यह गोचर सीधे तौर पर बदनामी और कानूनी सजा के रूप में अपना फल देता है.

'नवतारा' का प्रभाव: जानिए क्यों इसी समय चक्र में ढहा बायजू का किला?

इस केस स्टडी में केवल ग्रहों की स्थिति देखना ही काफी नहीं है, बल्कि संकट के बिल्कुल सटीक समय (Timing of Event) को समझना भी जरूरी है, जिसके लिए 'नवतारा चक्र' (Navtara Chakra) की गणना एक अचूक जरिया है. प्रश्न काल के समय आकाश में बन रहे ग्रहों के योग के मुताबिक, राहु और शनि का गोचर जिन नक्षत्रों से हो रहा है, वे इस समय चक्र के लिए 'वध तारा' और 'विपत तारा' की श्रेणी में आते हैं.

बिजनेस ज्योतिष के नियमों में 'वध तारा' के असर का मतलब कोई शारीरिक अंत नहीं होता, बल्कि इंसान की साख, साख की वैल्यू और बाजार में उसके भरोसे के पूरी तरह खत्म होने से होता है. यही वजह है कि पिछले कुछ समय से पर्दे के पीछे चल रहे तमाम छोटे-मोटे अंदरूनी विवाद इस समय चक्र में आकर एक बेहद गंभीर कानूनी सजा यानी जेल के रूप में दुनिया के सामने आ गए.

कब और कैसे मिलेगी पहली राहत?

अब इस पूरे संकट का सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या बायजू रवींद्रन का बिजनेस करियर हमेशा के लिए खत्म हो चुका है, या भविष्य में वापसी की कोई गुंजाइश बाकी है? इसका फैसला प्रश्न कुंडली का दशा चक्र करता है. इस समय इस कुंडली पर 'मंगल की महादशा' चल रही है.

मंगल इस चार्ट का 'भाग्येश' (भाग्य का मालिक) होकर अपनी ही राशि मेष में भाग्य के घर में बैठा है, जो इस पूरी गणना का सबसे मजबूत और सकारात्मक पहलू है. वर्तमान में मंगल की महादशा में बृहस्पति की अंतर्दशा और आठवें घर में बैठे शनि का प्रत्यंतर चल रहा है, जो जुलाई 2026 की शुरुआत तक रहेगा.

ज्योतिष के नियमों के मुताबिक, जब तक आठवें घर का शनि सक्रिय रहेगा, तब तक उन्हें किसी भी तरह की कानूनी या प्रशासनिक राहत मिलना नामुमकिन है और उन्हें इस कानूनी कड़ाई का सामना करना ही पड़ेगा. लेकिन जुलाई 2026 के बाद जैसे ही शनि का यह कड़ा समय खत्म होगा और बुध का असर आएगा, तो बुध इस कुंडली में गुरु के साथ लाभ के घर में संबंध बनाएगा.

इसका सीधा मतलब यह है कि सितंबर 2026 से लेकर मार्च 2027 के बीच उनके अपने निवेशकों और कर्जदाताओं के साथ एक बहुत बड़ा 'वित्तीय समझौता' (Out-of-Court Settlement) आधिकारिक रूप से तय होगा, जिससे उन्हें असली कानूनी राहत मिलेगी और संकट का यह सबसे कठिन दौर खत्म हो जाएगा.

पुराना साम्राज्य का अंत हुआ पर क्या वापस लौटेगा खोया सम्मान?

किसी भी बिजनेसमैन के करियर के भविष्य और दोबारा खड़े होने की ताकत का सटीक अंदाजा लग्न कुंडली के साथ-साथ 'दशमांश कुंडली' (D-10 Chart) से लगाया जाता है. प्रश्न कुंडली के इन सूक्ष्म चार्ट्स से यह साफ इशारा मिलता है कि 22 अरब डॉलर की वैल्यू वाली पुरानी 'BYJU'S' कंपनी अब पूरी तरह से बीता हुआ कल बन चुकी है.

बिजनेस की दुनिया में उस पुराने विशाल साम्राज्य को दोबारा उसी रूप में खड़ा कर पाना ज्योतिष के नजरिए से संभव नहीं दिखता, क्योंकि पुराना मॉडल पूरी तरह खत्म हो चुका है. लेकिन, लग्न में बैठे सूर्य की ताकत और भाग्य के घर में मजबूत मंगल की मौजूदगी यह तय करती है कि रवींद्रन की व्यक्तिगत साख और लड़ने का जज्बा पूरी तरह कभी खत्म नहीं होगा.

इस कानूनी चक्रव्यूह से पूरी तरह बाहर निकलने के बाद (संभवतः वर्ष 2028-2029 के आस-पास), वह शिक्षा के क्षेत्र में एक बार फिर वापसी करेंगे. हालांकि, इस बार वह किसी बहुत बड़े 'बिजनेस टाइकून' या अरबों डॉलर के स्टार्टअप के रूप में नहीं, बल्कि एक बेहद पारदर्शी (Transparent), सीमित और छोटे 'एजुकेशन मॉडल' के साथ सामने आएंगे. समाज उनके पुराने विज़न और योगदान को देखते हुए, उन्हें एक टीचर के रूप में आंशिक सम्मान दोबारा जरूर देगा.

नए स्टार्टअप्स के लिए सबक: इस महा-पतन से हर उद्यमी को क्या सीखना चाहिए?

बायजू रवींद्रन और उनकी कंपनी का यह उतार-चढ़ाव आने वाले नए स्टार्टअप शुरू करने वालों और मैनेजमेंट के छात्रों के लिए तीन सबसे बड़े सबक छोड़ जाता है, जो हर बिजनेस की रीढ़ होते हैं. पहला सबक यह है कि कानून और पारदर्शिता हमेशा सबसे ऊपर हैं.

आपकी बड़ी इच्छाएं और विजन (सूर्य) आपको कितना भी ऊंचा क्यों न उठा दें, लेकिन यदि आपका वित्तीय अनुशासन, समय पर ऑडिट और कानून का सम्मान (शनि) कमजोर है, तो साम्राज्य को ढहने में समय नहीं लगता क्योंकि कोई भी बिजनेस नियमों से ऊपर नहीं हो सकता.

दूसरा सबक यह है कि तात्कालिक तेजी के भ्रम (राहु) में आकर अपनी हैसियत से अधिक कर्ज लेकर कंपनियों को अंधाधुंध खरीदना और अंधाधुंध विकास के पीछे भागना आखिरकार कैश के संकट में बदल जाता है, जो पूरे बिजनेस को ले डूबता है. तीसरा और आखिरी सबक यह है कि संकट में धैर्य और जुझारूपन (मंगलीय ऊर्जा) सबसे बड़ी ताकत होती है.

अगर किसी बिजनेसमैन का मूल विजन और लड़ने का साहस जिंदा है, तो बाहरी साम्राज्य नष्ट होने के बाद भी वह इंसान पूरी तरह खत्म नहीं होता, बल्कि वह सही समय आने पर एक नए और सुधरे हुए रूप में दोबारा शुरुआत करने की ताकत रखता है.

FAQ 

Q1. BYJU’S का पतन क्यों हुआ?

Aggressive expansion, debt pressure, governance issues और investor conflict इसके बड़े कारण माने जा रहे हैं.

Q2. क्या ज्योतिष में BYJU’S संकट के संकेत दिखते हैं?

वैदिक ज्योतिष के अनुसार राहु, शनि और अष्टम भाव का प्रभाव बड़े corporate संकट का संकेत देता है.

Q3. क्या BYJU’S वापसी कर सकता है?

ज्योतिषीय संकेत limited comeback और restructuring की संभावना दिखाते हैं.

Q4. Startup founders को BYJU’S से क्या सीखना चाहिए?

Hyper growth से ज्यादा governance, transparency और sustainability जरूरी है.

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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

About the author Hirdesh Kumar Singh

हृदेश कुमार सिंह, Senior Vedic Astrologer | Astro Media Editor | Digital Strategy Leader

'ज्योतिष केवल भविष्य बताने की विद्या नहीं, बल्कि समय को समझने की कला है.'

हृदेश कुमार सिंह लंबे समय से ज्योतिष, धर्म, अध्यात्म और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे उन चुनिंदा लोगों में माने जाते हैं जिन्होंने पारंपरिक ज्योतिष को आज की बदलती दुनिया, डिजिटल संस्कृति और नई पीढ़ी की सोच से जोड़ने का प्रयास किया है. उनके लिए ज्योतिष केवल ग्रहों की गणना नहीं, बल्कि मानव व्यवहार, सही समय और जीवन के निर्णयों को समझने का माध्यम है.

वर्तमान में वे ABP Live में Astro, Religion और Dharma LIVE से जुड़े कंटेंट और डिजिटल रणनीति का नेतृत्व कर रहे हैं. यहां उनका फोकस ज्योतिष और धर्म को ऐसे रूप में प्रस्तुत करना है, जो आज के पाठकों और दर्शकों की जिंदगी से सीधे जुड़ सके. यही कारण है कि उनके लेखन और विश्लेषण में केवल पारंपरिक बातें नहीं, बल्कि करियर, रिश्ते, मानसिक तनाव, सामाजिक बदलाव, तकनीक और बदलती जीवनशैली जैसे विषय भी दिखाई देते हैं.

उन्होंने Indian Institute of Mass Communication (IIMC), New Delhi से पत्रकारिता और IIMT University, Meerut से ज्योतिष शास्त्र व वास्तु शास्त्र की पढ़ाई की है. इसके साथ ही उन्होंने Semrush Academy से 'Content Marketing Essentials for SEO and AI Search with Semrush’ सर्टिफिकेशन प्राप्त किया है, जिसमें Keyword Research, Topic Clusters, E-E-A-T आधारित कंटेंट और AI Search Optimization शामिल हैं. वे Astrosage और Astrotalk जैसे प्लेटफॉर्म्स के साथ भी काम कर चुके हैं. मीडिया, ऑडियंस बिहेवियर, डिजिटल पब्लिशिंग और कंटेंट रणनीति की समझ ने उनके काम को अलग पहचान दी है.

हृदेश कुमार सिंह के कई ज्योतिषीय और सामाजिक विश्लेषण समय-समय पर चर्चा में रहे हैं. राजनीति, शेयर बाजार, मनोरंजन जगत, AI और बदलते सामाजिक माहौल जैसे विषयों पर उनके आकलनों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया है.

वर्तमान में Youth Protest, CJP आंदोलन और एक्टर शाहरुख खान को लेकर उनकी भविष्यवाणियां सत्य साबित हुईं हैं, उनके विश्लेषण वैदिक गणना, गोचर, मेदिनी ज्योतिष और समाज की बदलती मानसिकता की समझ पर आधारित होते हैं.

वे वैदिक ज्योतिष, होरा शास्त्र, संहिता, मेदिनी ज्योतिष, अंक ज्योतिष, शकुन शास्त्र और वास्तु शास्त्र जैसे विषयों पर अध्ययन और लेखन करते रहे हैं. करियर, विवाह, व्यापार, शिक्षा और जीवन के महत्वपूर्ण फैसलों से जुड़े विषयों पर वे पारंपरिक ज्योतिष को आधुनिक जीवन की वास्तविक परिस्थितियों से जोड़कर देखने का प्रयास करते हैं.

डिजिटल दौर में ज्योतिष को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए उन्होंने 'Gen-Z Horoscope' जैसे कॉन्सेप्ट पर भी काम किया, जिसमें राशिफल को केवल भाग्य या डर से जोड़कर नहीं, बल्कि career pressure, relationship confusion, emotional wellbeing और real-life decision making जैसी बातों से जोड़ा गया.

उनका मानना है कि आज के समय में सबसे बड़ी चुनौती जानकारी की कमी नहीं, बल्कि सही समझ की कमी है. वे ज्योतिष को ऐसा माध्यम मानते हैं, जो व्यक्ति को डराने के बजाय उसे बेहतर निर्णय लेने और खुद को समझने में मदद कर सकता है.

श्रीमद्भगवद्गीता के कर्म सिद्धांत, भगवान बुद्ध के संतुलन के विचार, सूफी चिंतन और आधुनिक मनोविज्ञान से प्रभावित उनकी सोच उनके लेखन में भी दिखाई देती है. यही वजह है कि उनका काम केवल भविष्यवाणी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लोगों को सोचने और अपने जीवन को नए नजरिए से देखने के लिए प्रेरित करता है.

ज्योतिष और मीडिया के अलावा उन्हें सिनेमा, संगीत, साहित्य, राजनीति, बाजार, पर्यावरण, ग्रामीण जीवन और यात्राओं में विशेष रुचि है. इन अनुभवों का असर उनके विषय चयन और लेखन शैली में साफ दिखाई देता है.

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