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गेहूं के निर्यात पर लगी रोक हटी, इससे किसानों को कितना फायदा?

गेहूं और आटे के एक्सपोर्ट से हटी रोक ने गेहूं किसानों की किस्मच चमका दी है. अब किसानों को MSP से भी तगड़ा भाव मिल सकता है. किन खास वैरायटी वालों की जेब में आएगा सबसे ज्यादा मुनाफा? जान लीजिए

भारत सरकार के विदेश व्यापार विभाग ने देश के किसानों के लिए एक बड़ा और राहत भरा फैसला लिया है. सरकार ने गेहूं के एक्सपोर्ट पर पिछले काफी समय से लगी रोक को तुरंत हटा दिया है. इस नए सरकारी ऑर्डर के बाद अब सिर्फ कच्चा गेहूं ही नहीं, बल्कि आटा, मैदा, सूजी, होलमील आटा और इससे बने दूसरे प्रोडक्ट्स को भी विदेशों में खुले तौर पर भेजा जा सकेगा. 

आपको याद होगा कि मई 2022 में रूस और यूक्रेन की लड़ाई के बाद जब पूरी दुनिया में खाने-पीने की चीजों की किल्लत हो गई थी. तब देश में बढ़ती महंगाई को रोकने और अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए सरकार ने एक्सपोर्ट बंद कर दिया था. 

बाद में मैदे और सूजी पर भी ताला लगा दिया गया था. अब देश में अनाज का पूरा स्टॉक मौजूद है. इसलिए सरकार ने यह रास्ता दोबारा खोल दिया है. इस फैसले से ट्रेडर्स के साथ-साथ सीधे तौर पर हमारे किसान भाइयों को बड़ा फायदा होने वाला है. जानें पूरी खबर.

कंप्टीशन बढ़ने से फसल के मिलेंगे अच्छे दाम

इस नए फैसले का सबसे पहला और सीधा फायदा जमीन पर किसानों को अपनी लोकल मंडियों में देखने को मिलेगा. पिछले दो सालों से जब एक्सपोर्ट का रास्ता पूरी तरह बंद था. तब किसानों के पास अपनी फसल बेचने के बहुत सीमित रास्ते थे. 

या तो वे सरकारी सेंटरों पर एमएसपी पर अनाज बेचें या फिर लोकल फ्लोर मिलों को औने-पौने दामों में माल थमा दें. कई बार मंडियों में ज्यादा आवक होने पर किसानों को अपनी लागत निकालना भी भारी पड़ जाता था. अब जैसे ही इंटरनेशनल मार्केट के दरवाजे खुले हैं बड़े-बड़े खरीदार और एक्सपोर्ट करने वाली प्राइवेट कंपनियां सीधे मंडियों में खरीददारी कर सकती हैं.

जब एक ही अनाज को खरीदने के लिए कई कंपनियां आपस में मुकाबला करेंगी तो गेहूं के भाव अपने आप बढ़ेंगे. पंजाब, हरियाणा, यूपी, राजस्थान और मध्य प्रदेश के किसानों को अब अपनी फसल का सरकारी रेट यानी MSP से भी ज्यादा और बढ़िया दाम खुले बाजार में मिलने की उम्मीद है.


गेहूं के निर्यात पर लगी रोक हटी, इससे किसानों को कितना फायदा?

इन किसानों की होगी तगड़ी कमाई

सरकार के इस कदम में आम गेहूं के साथ-साथ ड्यूरम गेहूं और उससे बने प्रोडक्ट्स जैसे सूजी और रवा के एक्सपोर्ट को खास छूट दी गई है. इसका सबसे बड़ा फायदा उन किसानों को मिलेगा जो हाई-क्वालिटी गेहूं उगाते हैं. मध्य प्रदेश और मालवा के इलाकों में पैदा होने वाले शरबती और ड्यूरम गेहूं की दुनिया भर में बहुत ज्यादा डिमांड रहती है. क्योंकि इसकी क्वालिटी और ताकत बाकी गेहूं से काफी बेहतर होती है. 

जब एक्सपोर्ट बंद था तब किसानों को इस खास क्वालिटी का कोई एक्स्ट्रा बोनस या प्रीमियम रेट नहीं मिल पा रहा था और उन्हें इसे सामान्य भाव में बेचना पड़ता था. अब एक्सपोर्ट चालू होते ही बड़ी-बड़ी फूड कंपनियां किसानों से सीधे संपर्क करेंगी और खेत से ही अच्छी क्वालिटी के माल के लिए ज्यादा पैसे देकर खरीदारी करेंगी. 


गेहूं के निर्यात पर लगी रोक हटी, इससे किसानों को कितना फायदा?

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फसल की बनी रहेगी डिमांड टूटेगा नहीं रेट

यह फैसला सिर्फ एक सीजन के मुनाफे के लिए नहीं है. बल्कि इससे किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए एक हमेशा चलने वाला मार्केट मिल जाएगा. जब देश का आटा, मैदा और सूजी लगातार विदेशों में बिकने जाएगा. तो हमारे देश की आटा मिलें और प्रोसेसिंग फैक्ट्रियां साल भर पूरी रफ्तार से चलेंगी. इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि जब कटाई का पीक सीजन आएगा और मंडियों में गेहूं की भारी आवक होगी. 

तब भी रेट अचानक धड़ाम से नीचे नहीं गिरेंगे क्योंकि माल की लगातार डिमांड बनी रहेगी. इसके अलावा गांव और कस्बों में अनाज रखने के गोदाम, गाड़ियों के ट्रांसपोर्ट और पैकेजिंग का काम भी तेजी से बढ़ेगा, जिससे ग्रामीण इलाकों में कमाई के नए रास्ते खुलेंगे. कुल मिलाकर देखें तो एक्सपोर्ट पर लगी रोक हटने से किसानों को अब उनकी मेहनत का सही दाम दिलाएगी.

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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