‘लखनऊ-एक्सप्रेस फेल हो गया, तभी दिल्ली ने...' राजनाथ की प्रेस वार्ता पर अखिलेश का तंज
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की प्रेस वार्ता पर तंज कसा है. उन्होंने लिखा है कि लगता है कोई अंदरूनी फैसला हुआ है.

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की प्रेस वार्ता पर तंज कसा है. सोशल मीडिया साइट एक्स पर अखिलेश ने लिखा- सुना है सत्ताधारियों की तरफ़ से कोई बड़ी प्रेस-कांफ्रेंस हो रही है. लगता है ‘लखनऊ-एक्सप्रेस’ का इंजन फ़ेल हो गया है, तभी दिल्ली के इंजन ने लखनऊ की कमान किसी और को थमाने का अंदरूनी फ़ैसला कर लिया है.
उन्होंने लिखा कि ये प्रेस कॉन्फ़्रेंस तो बस दिखावटी है, असली खेल तो लखनऊ के इंजन को खटारा साबित करके उसे पर्मानेंट हटाने का है. अब लखनऊवालों की रक्षा कौन करेगा?
उधर प्रेस वार्ता में राजनाथ सिंह ने कहा कि दिल्ली में पिछले दिनों हुए घटनाक्रम कई गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं. ऐसा प्रतीत होता है कि कांग्रेस और उसके राजनीतिक सहयोगी प्रत्यक्ष रूप से और अपने समर्थक संगठनों के माध्यम से युवाओं की ऊर्जा को रचनात्मक कार्यों और राष्ट्र निर्माण की दिशा में लगाने के बजाय राजनीतिक टकराव और अराजकता फैलाने के साधन बनाने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि देश के नौजवानों को अराजकता की राजनीति का मोहरा बनाने की कोशिश की गई है.
'रेजीम चेंज के लिए बांग्लादेश से प्रेरणा...'
लखनऊ सांसद ने कहा कि ये लोग बांग्लादेश की तर्ज पर रेजीम चेंज कराना चाहते हैं. एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुलकर कहा जाता है कि रेजीम चेंज के लिए बांग्लादेश से प्रेरणा ली गई है, तो दूसरा डंके की चोट पर सरकार गिराने की बात करता है. यह स्पष्ट करता है कि इनका एकमात्र एजेंडा लोकतांत्रिक संस्थाओं को ध्वस्त करना और देश में आग लगाना है.
उन्होंने कहा कि रेजीम चेंज जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है. इससे स्पष्ट है कि उनकी लड़ाई चुनाव सुधार के लिए नहीं है, एसआईआर के लिए नहीं है, ज्ञानेश कुमार के लिए नहीं है और न ही नौजवानों के उज्ज्वल भविष्य के लिए है. बल्कि देश में अराजकता पैदा कर सत्ता हासिल करने की कोशिश की जा रही है.
रक्षामंत्री ने कहा कि राहुल गांधी और उनके सहयोगियों को समझना होगा कि लोकतंत्र अराजकता फैलाने, संवैधानिक संस्थाओं की साख पर चोट करने या भारत की विकास यात्रा में बाधा डालने का लाइसेंस नहीं है. सुप्रीम कोर्ट की कल की गई टिप्पणी भी इसी ओर एक संकेत है. कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए कानून का सम्मान करना भी आवश्यक है.






















