Agriculture Tips: यूरिया डालने के बाद भी फसल नहीं बढ़ रही? ये हो सकती हैं वजहें
अगर खेत में यूरिया डालने के बावजूद आपकी फसल की ग्रोथ नहीं बढ़ रही तो सिर्फ नाइट्रोजन की कमी वजह नहीं है. ऐसे में सही मिट्टी, सिंचाई और दूसरे पोषक तत्वों की कमी भी वजह हो सकती है.

खेती में अच्छी पैदावार के लिए किसान कई तरह के खाद और उर्वरकों का इस्तेमाल करते हैं. इनमें यूरिया सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली खादों में शामिल है. इसकी वजह है कि यूरिया में करीब 46 परसेंट नाइट्रोजन होती है, जो पौधों की पत्तियों को हरा-भरा रखने और उनकी बढ़वार में मदद करती है. यही कारण है कि जब खेत में फसल कमजोर दिखाई देती है या पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं, तो किसान अक्सर यूरिया डाल देते हैं. लेकिन कई बार यूरिया डालने के बाद भी फसल की ग्रोथ में कोई खास बदलाव नहीं दिखाई देता.
ऐसे में किसान समझ नहीं पाते कि आखिर खाद डालने के बावजूद पौधों का विकास क्यों रुक गया है. दरअसल पौधों की अच्छी बढ़वार के लिए सिर्फ नाइट्रोजन पर्याप्त नहीं होती. उन्हें फॉस्फोरस, पोटाश, सल्फर, जिंक, आयरन और दूसरे पोषक तत्वों की भी जरूरत होती है. इसके अलावा मिट्टी की गुणवत्ता, सिंचाई और मौसम भी फसल के विकास में अहम भूमिका निभाते हैं.
मिट्टी में दूसरे पोषक तत्वों की कमी
यूरिया मुख्य रूप से नाइट्रोजन की जरूरत पूरी करती है. अगर मिट्टी में नाइट्रोजन पर्याप्त है, लेकिन फॉस्फोरस, पोटाश या जिंक जैसे पोषक तत्वों की कमी है, तो फसल की बढ़वार प्रभावित हो सकती है. फॉस्फोरस की कमी से पौधों की जड़ों का विकास प्रभावित होता है, जबकि पोटाश की कमी से पौधों की मजबूती और उनकी रोगों से लड़ने की क्षमता पर असर पड़ता है. ऐसी स्थिति में बार-बार यूरिया डालने से समस्या दूर नहीं होगी.
यूरिया डालने का गलत समय
फसल को हर अवस्था में एक जैसी मात्रा में नाइट्रोजन की जरूरत नहीं होती. बुवाई, शुरुआती बढ़वार और फूल आने जैसी अवस्थाओं में पोषक तत्वों की मांग अलग-अलग होती है. अगर किसान फसल की जरूरत के मुताबिक सही समय पर यूरिया नहीं डालते, तो पौधे इसका पूरा फायदा नहीं उठा पाते. वहीं तेज बारिश से ठीक पहले यूरिया डालने पर खाद का कुछ हिस्सा पानी के साथ बह जाता है. इसलिए फसल की किस्म, उम्र और कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार ही यूरिया का इस्तेमाल करना चाहिए.
खेत में पानी की कमी या ज्यादा सिंचाई
पौधों की बढ़वार के लिए मिट्टी में उचित नमी होना जरूरी है. अगर खेत में पानी की कमी है, तो पौधों की जड़ें मिट्टी से पोषक तत्वों को सही तरीके से नहीं ले पातीं. वहीं खेत में लगातार पानी भरा रहने से जड़ों तक ऑक्सीजन पहुंचने में परेशानी होती है. इससे जड़ों का विकास रुक सकता है और पौधे कमजोर होने लगते हैं. ऐसे में सिर्फ यूरिया डालने से फसल की स्थिति में सुधार नहीं होगा. खेत में जरूरत के अनुसार सिंचाई और जल निकासी की व्यवस्था करना जरूरी है.
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मिट्टी का पीएच स्तर सही नहीं होना
मिट्टी का पीएच स्तर भी फसल की ग्रोथ को प्रभावित करता है. अगर मिट्टी ज्यादा अम्लीय या क्षारीय है, तो उसमें मौजूद कई पोषक तत्व पौधों को आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाते. इसका असर जड़ों के विकास और पौधों की बढ़वार पर दिखाई देता है. खासकर अधिक क्षारीय मिट्टी में जिंक और आयरन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की उपलब्धता कम होती है. ऐसी स्थिति में मिट्टी की जांच करवाना जरूरी है.
कीट और बीमारियां भी हो सकती हैं वजह
कई बार किसान फसल की धीमी बढ़वार को खाद की कमी समझ लेते हैं, जबकि असली वजह कीट या बीमारी होती है. दीमक, जड़ में लगने वाले कीट और फफूंद जनित रोग पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंचा सकते हैं. जड़ें कमजोर होने पर पौधे मिट्टी से पानी और पोषक तत्वों को ठीक से नहीं ले पाते. इसके कारण पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं और पौधों की लंबाई भी कम रह जाती है.
जरूरत से ज्यादा यूरिया डालना
कुछ किसानों को लगता है कि ज्यादा यूरिया डालने से फसल तेजी से बढ़ेगी, लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता. जरूरत से ज्यादा नाइट्रोजन देने पर पौधों में असंतुलित बढ़वार हो सकती है. इससे पौधे अधिक कोमल हो सकते हैं और कुछ फसलों में गिरने यानी लॉजिंग का खतरा बढ़ सकता है. लगातार सिर्फ नाइट्रोजन वाली खादों का इस्तेमाल करने से मिट्टी में दूसरे पोषक तत्वों की कमी भी बढ़ सकती है.
इन बातों का रखें ध्यान
अगर यूरिया डालने के बाद भी फसल की बढ़वार नहीं हो रही है, तो बिना वजह दोबारा खाद डालने से बचें. सबसे पहले मिट्टी की जांच करवाएं और पता करें कि उसमें किन पोषक तत्वों की कमी है. इसके अलावा खेत में उचित नमी बनाए रखें, जल निकासी की व्यवस्था करें और फसल में कीट या बीमारी के लक्षणों पर नजर रखें. खाद का इस्तेमाल फसल की अवस्था और कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार ही करें.
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