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Summer Special Crops: कम दिनों में तैयार होने वाली ये फसलें, बदल देंगी आपकी किस्मत

Summer Special Crops: गर्मियों के खाली समय में मूंग, उड़द और बेल वाली सब्जियां उगाना मुनाफे का सौदा है. ये फसलें कम पानी में मात्र 60-70 दिनों में तैयार होकर अच्छी कमाई कराती हैं.

Summer Special Crops: गर्मियों का सीजन आते ही अक्सर किसानों को पानी की कमी और तपती धूप की चिंता सताने लगती है, लेकिन अगर आप स्मार्ट प्लानिंग करें तो यही मौसम आपकी जेब भरने का सबसे अच्छा मौका बन सकता है. इस वक्त मार्केट में सब्जियों और शॉर्ट-टर्म फसलों की डिमांड काफी बढ़ जाती है, क्योंकि सप्लाई कम होती है और मांग ज्यादा. अगर आप भी कम समय में मोटा मुनाफा कमाना चाहते हैं.

तो ऐसी फसलों का चुनाव करें जो 60 से 90 दिनों के भीतर हार्वेस्टिंग के लिए तैयार हो जाएं. इन फसलों की सबसे अच्छी बात यह है कि ये कम पानी में भी बढ़िया सर्वाइव कर लेती हैं और खेत को अगली मुख्य फसल के लिए जल्दी खाली कर देती हैं. आधुनिक खेती का यही मंत्र है कि कम इनपुट में ज्यादा आउटपुट निकाला जाए ताकि खेती घाटे का सौदा न रहे.

मूंग और उड़द से होगा फायदा

अगर आप गर्मियों के खाली पड़े खेतों का सही इस्तेमाल करना चाहते हैं. तो मूंग और उड़द की खेती एक प्रो-मूव साबित हो सकती है. ये फसलें मात्र 60 से 65 दिनों में पककर तैयार हो जाती हैं. जिससे किसान को बहुत कम समय में कैश मिल जाता है. सबसे बड़ा फायदा यह है कि ये दलहनी फसलें होने के नाते मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ा देती हैं, जिससे खेत की उपजाऊ शक्ति नेचुरल तरीके से इम्प्रूव होती है. इनमें पानी की बहुत कम जरूरत पड़ती है.  जो गर्मियों के लिहाज से एकदम परफेक्ट है.

  • मूंग की खेती में पेस्टिसाइड्स का खर्चा भी बहुत कम आता है और इसे बेचना भी काफी आसान होता है.
  • उड़द की फसल खरीफ सीजन से पहले मिट्टी को तैयार करने का एक बेहतरीन नेचुरल तरीका है.

इन फसलों को लगाकर आप न सिर्फ मुनाफा कमाते हैं. बल्कि अपनी अगली फसल के लिए खाद का खर्चा भी बचा लेते हैं.

यह भी पढ़ें: किचन गार्डन में कैसे करें तोरई की खेती? गर्मी में नहीं होती ताजी सब्जी की दिक्कत

बेल वाली सब्जियां

गर्मियों के दौरान मार्केट में खीरा, ककड़ी, तरबूज और खरबूजे की डिमांड रॉकेट की तरह ऊपर जाती है. ये ऐसी फसलें हैं जो बहुत जल्दी बढ़ती हैं और आपको डेली इनकम दे सकती हैं. अगर आपके पास सिंचाई की अच्छी व्यवस्था है, तो इन बेल वाली फसलों से आप दो महीने के भीतर ही अपनी लागत से कई गुना ज्यादा कमाई कर सकते हैं. मल्चिंग और ड्रिप इरिगेशन जैसी मॉडर्न तकनीकों का इस्तेमाल करके आप पानी की बर्बादी रोक सकते हैं और फलों की क्वालिटी को भी नंबर वन बना सकते हैं.

  • खीरा और ककड़ी जैसी फसलें 45 से 50 दिनों में फल देना शुरू कर देती हैं. जो डेली कैश फ्लो बढ़ाती हैं.
  • तरबूज और खरबूजा अपनी मिठास के कारण गर्मियों में हॉट-सेलिंग प्रोडक्ट्स की लिस्ट में टॉप पर रहते हैं.

सही वैरायटी के बीज चुनकर आप ऑफ-सीजन में भी बंपर पैदावार लेकर मार्केट के राजा बन सकते हैं.

हरी पत्तेदार सब्जियां

शॉर्ट-ड्यूरेशन फसलों की बात हो और हरी पत्तेदार सब्जियों का जिक्र न हो. ऐसा तो हो ही नहीं सकता. पालक, चौलाई और धनिया जैसी फसलें बहुत ही कम समय में यानी 30 से 40 दिनों के भीतर कटाई के लिए रेडी हो जाती हैं. गर्मियों में जब सब्जियों के दाम आसमान छू रहे होते हैं. तब ये छोटी फसलें किसानों के लिए किसी एटीएम मशीन से कम नहीं होतीं. इन्हें आप खेत के छोटे से हिस्से में या मेड़ों पर भी उगाकर अपनी रेगुलर इनकम सेट कर सकते हैं.

  • धनिया की मांग गर्मियों में सबसे ज्यादा होती है. जिससे इसके दाम काफी अच्छे मिल जाते हैं.
  • ये फसलें बार-बार कटाई का मौका देती हैं. जिससे एक ही बुआई में आप कई बार मुनाफा कमा सकते हैं.

अगर आप पारंपरिक खेती के साथ इन मॉडर्न और फास्ट-ग्रोइंग फसलों को जोड़ दें. तो गर्मियों में खेती आपके लिए घाटे का नहीं बल्कि बड़े फायदे का बिजनेस बन जाएगी.

यह भी पढ़ें: चंदन की खेती से कैसे मालामाल हो सकते हैं किसान भाई, जानें कैसे उगाएं इसकी फसल?

About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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