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गन्ना किसानों के खाते में अभी तक नहीं आया पैसा? यहां करें शिकायत

गन्ना तौल के हफ्तों बाद भी अगर आपके बैंक खाते में भुगतान का पैसा नहीं पहुंचा है. तो अब दफ्तरों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है. घर बैठे दर्ज कराएं सीधी शिकायत और तुरंत पाएं समाधान? जानें प्रोसेस.

देश के लाखों गन्ना किसानों के लिए पेराई सीजन के बाद सबसे बड़ा इंतजार अपनी मेहनत की कमाई यानी गन्ना के भुगतान का होता है. सरकार और चीनी मिलों के तमाम दावों के बावजूद कई राज्यों में किसानों को समय पर उनके बैंक खातों में पैसा नहीं मिल पा रहा है. नियमानुसार चीनी मिलों को गन्ना तौल की तारीख से 14 दिनों के भीतर पूरा भुगतान करना होता है. लेकिन कई बार तकनीकी गड़बड़ी, मिलों की लेटलतीफी या बैंक डिटेल्स के मिसमैच होने के चलते यह रकम महीनों तक अटक जाती है. 

ऐसे में छोटे किसानों को घर के रोजमर्रा के खर्च, अगली फसल की पैसे और खाद-बीज खरीदने के लिए पैसों को लेकर भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है. अगर आपने भी अपना गन्ना सहकारी या निजी मिलों में बेचा है और अभी तक खाते में पैसा क्रेडिट नहीं हुआ है. तो अब परेशान होकर दफ्तरों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है. आप इन तरीकों से सरकार तक अपनी शिकायत पहुंचा सकते हैं. 

पहले चेक करें पेमेंट का स्टेटस

शिकायत दर्ज कराने से पहले यह जानना बहुत जरूरी है कि आपकी पर्ची और पेमेंट की फाइल किस स्टेज पर अटकी हुई है. इसके लिए उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, हरियाणा और पंजाब जैसे प्रमुख राज्यों ने अपने अलग-अलग डिजिटल पोर्टल और मोबाइल ऐप्स शुरू किए हैं. जैसे यूपी के किसान ई-गन्ना ऐप caneup.in पोर्टल पर जाकर अपनी किसान कोड, सट्टा नंबर और बैंक खाते का स्टेटस खुद चेक कर सकते हैं. 

यहां लॉगिन करते ही आपको पता चल जाएगा कि मिल की तरफ से बिल जनरेट हुआ है या नहीं और क्या बैंक से कोई रिजेक्शन आया है. कई बार आधार सीडिंग न होने या बैंक का IFSC कोड बदल जाने की वजह से ट्रांजैक्शन फेल हो जाता है. अगर पोर्टल पर पेमेंट प्रोसेस दिखा रहा है लेकिन खाते में पैसा नहीं आया तो उसका स्क्रीनशॉट या पर्ची का नंबर अपने पास संभाल कर रख लें क्योंकि शिकायत के वक्त यह आपके काम आएगा.


गन्ना किसानों के खाते में अभी तक नहीं आया पैसा? यहां करें शिकायत

ऐसे दर्ज कराएं अपनी शिकायत

अगर ऑनलाइन स्टेटस चेक करने के बाद भी समस्या का हल नहीं निकलता है. तो आप सीधे गन्ना विभाग के टोल फ्री हेल्पलाइन नंबरों पर कॉल कर सकते हैं. उत्तर प्रदेश गन्ना विभाग ने किसानों की सुविधा के लिए1800-121-3203 और 1800-180-1551 जैसे हेल्पलाइन नंबर चालू किए हैं. इन नंबरों पर कॉल करके किसान अपनी गन्ना पर्ची, समिति का नाम और मिल का ब्योरा देकर सीधी शिकायत दर्ज करा सकते हैं. 

इसके अलावा हर जिले के जिला गन्ना अधिकारी ऑफिस में एक स्पेशल कंप्लेंट सेल होता है. जहां आप अपनी लिखित शिकायत दे सकते हैं. अगर चीनी मिल 14 दिनों से ज्यादा समय तक बिना किसी वाजिब वजह के भुगतान रोकती है. तो नियमों के मुताबिक मिल को किसानों को बकाया रकम पर ब्याज भी देना होता है. हेल्पलाइन पर दर्ज की गई शिकायतों पर एक कंप्लेंट नंबर मिलता है. जिसके जरिए आप अपनी शिकायत का स्टेटस जान सकते हैं.


गन्ना किसानों के खाते में अभी तक नहीं आया पैसा? यहां करें शिकायत

यह भी पढ़ें: धान की फसल बोई है? 'तना छेदक' और 'पत्ती मोड़क' का खतरा बढ़ा; अलर्ट

सीएम हेल्पलाइन पर भी कर सकते हैं शिकायत

जब मिल प्रबंधन या लोकल गन्ना समिति के स्तर पर सुनवाई न हो तो सरकार में हाई लेवल पर भी शिकायत कीजा सकती है. इसके लिए उत्तर प्रदेश में किसान जनसुनवाई समाधान पोर्टल jansunwai.up.nic.in या CM हेल्पलाइन 1076 पर सीधे अपनी बात रख सकते हैं. 

इसी तरह दूसरे राज्यों में भी सीएम हेल्पलाइन एक्टिव रहती हैं. यहां शिकायत दर्ज होते ही मामला सीधे जिले के डीएम और गन्ना आयुक्त के संज्ञान में पहुंच जाता है. सरकारी पोर्टल पर दर्ज मामलों की जवाबदेही तय होती है और मिल मालिकों को तय समय सीमा के भीतर कारण बताना पड़ता है. 

अधिकारियों की सख्त निगरानी के चलते ऐसी शिकायतों पर मिलों को तुरंत खातों में बकाया पैसा ट्रांसफर करना पड़ता है. किसानों को किसी बिचौलिए या दलाल के झांसे में आने के बजाय इन ऑफिशियल प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करना चाहिए. जिससे उनका रुका हुआ पैसा बिना किसी एक्सट्रा खर्च के सीधे खाते में आ सके.

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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