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धान की फसल बोई है? 'तना छेदक' और 'पत्ती मोड़क' का खतरा बढ़ा; अलर्ट

बदलते मौसम के बीच धान की हरी-भरी फसल पर तना छेदक और पत्ती मोड़क दो खतरनाक कीटों का बड़ा हमला हुआ है. जो फसल को भीतर से खोखला कर रहे हैं. आपके खेत में भी दिख रहे हैं ये शुरुआती लक्षण तो अपनाएं यह उपाय.

खरीफ सीजन में धान की रोपाई के बाद अब फसल बढ़वार की स्टेज में पहुंच चुकी है. लेकिन बदलते मौसम और उमस के बीच खेतों पर दो बड़े कीटों का साया मंडराने लगा है. कृषि जानकारों ने धान उत्पादक किसानों के लिए एडवाइजरी जारी करते हुए तना छेदक और पत्ती मोड़क कीटों के बढ़ते प्रकोप को लेकर अलर्ट किया है. यह दोनों ऐसे खतरनाक कीट हैं जो शुरुआती दौर में नजर नहीं आते. लेकिन देखते ही देखते पूरी खड़ी फसल को बर्बाद कर देते हैं.

कई राज्यों में लगातार हो रही बारिश, नमी और तेज धूप के मिले-जुले मौसम ने इन कीटों के पनपने के लिए बिल्कुल मुफीद माहौल तैयार कर दिया है. अगर समय रहते इनकी पहचान और सही रोकथाम न की जाए, तो किसानों की 30 से लेकर 80 प्रतिशत तक पैदावार सीधे तौर पर घट सकती है. आइए जानते हैं कि इन दोनों कीटों के शुरुआती लक्षण क्या हैं और इनसे अपनी फसल को कैसे सुरक्षित रखा जाए.

तना छेदक कीट के लक्षण और इसका जानलेवा असर

तना छेदक धान की फसल का सबसे बड़ा दुश्मन माना जाता है. इसका पीला या सफेद पतंगा पत्तियों की निचली सतह पर अंडे देता है. जिनसे निकलने वाली सूंड़ी सीधे पौधे के मुख्य तने में छेद करके अंदर घुस जाती है. तने के भीतर बैठकर यह पौधे के अंदरूनी हिस्से को पूरी तरह खा जाती है. जिससे पौधे तक जरूरी पोषक तत्व और पानी पहुंचना बंद हो जाता है. 

शुरुआती बढ़वार के समय अगर इसका हमला होता है तो पौधे का बीच का हिस्सा सूख जाता है. जिसे बोलचाल में डेड हार्ट कहते हैं. वहीं जब फसल में बालियां निकल रही होती हैं, तब इसका असर सफेद बाली यानी White Earhead के तौर पर सामने आता है. इन बालियों में कोई दाना नहीं भरता और वे पूरी तरह खोखली रह जाती हैं. हवा चलने पर यह सूखे पौधे आसानी से टूट जाते हैं. खेत में ऐसे लक्षण दिखते ही फौरन सतर्क होने की जरूरत होती है.


धान की फसल बोई है? 'तना छेदक' और 'पत्ती मोड़क' का खतरा बढ़ा; अलर्ट

पत्ती मोड़क कीट की पहचान और होने वाला भारी नुकसान

तना छेदक के साथ-साथ इस वक्त पत्ती मोड़क कीट भी खेतों में तेजी से पैर पसार रहा है. इस कीट की हरी-पीली इल्ली धान की हरी पत्तियों को किनारों से आपस में जोड़कर एक नली या पाइप जैसी बना लेती है और उसी के अंदर छिपकर बैठ जाती है. यह इल्ली पत्ती के हरे हिस्से यानी क्लोरोफिल को पूरी तरह खुरच-खुरच कर खा जाती है. नतीजा यह होता है कि हरी-भरी पत्तियां सफेद धारियों में बदल जाती हैं और दूर से देखने पर पूरा खेत झुलसा हुआ नजर आने लगता है. 

जब पौधे की पत्तियां ही सूख जाती हैं. तो पौधा धूप से अपना खाना यानी फोटोसिंथेसिस नहीं बना पाता. इससे पौधे की ग्रोथ बिल्कुल रुक जाती है कल्ले कम फूटते हैं और बालियों में दानों का भराव बेहद कमजोर रह जाता है. नाइट्रोजन वाले खादों जैसे यूरिया का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करने वाले खेतों में यह कीट बहुत तेजी से फैलता है.


धान की फसल बोई है? 'तना छेदक' और 'पत्ती मोड़क' का खतरा बढ़ा; अलर्ट

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इन तरीकों से बचाएं फसल

इन कीटों से फसल को बचाने के लिए किसानों को तुरंत इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट अपनाना चाहिए. सबसे पहले खेतों में यूरिया का बहुत ज्यादा इस्तेमाल तुरंत रोकें और खेत की मेड़ों को साफ रखें. कीटों की निगरानी के लिए प्रति एकड़ 4 से 5 फेरोमोन ट्रैप लगाएं और रात में लाइट ट्रैप का इस्तेमाल करें जिससे बड़े पतंगों को खत्म किया जा सके. इसके अलावा खेत में T साइज की 15-20 लकड़ी की खूंटियां गाड़ें. जिन पर चिड़िया बैठकर इल्लियों को खा सकें. अगर कीटों का हमला ज्यादा बढ़ गया हो. तो केमिकल दवाओं का सही इस्तेमाल करें. 

इसके लिए क्लोरांट्रानिलिप्रोल 4 किलो प्रति एकड़ की दर से रेत में मिलाकर डालें या फ्लूबेंडियामाइड 50 मिली प्रति 200 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ स्प्रे करें. इसके अलावा कार्टाप हाइड्रोक्लोराइड भी काफी असरदार साबित होता है. दवा छिड़कते समय खेत में हल्की नमी जरूर रखें.

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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