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1 क्विंटल गन्ने से कितनी चीनी बनती है, क्या है इसका प्रोसेस?

Sugar From 1 Quintal Sugarcanes: 1 क्विंटल गन्ना जब चीनी मिल पहुंचता है तो उस 100 किलो गन्ने से आखिर कितनी चीनी बनती है और इस पूरी प्रक्रिया में क्या होता है. जान लीजिए पूरी जानकारी.

Sugar From 1 Quintal Sugarcanes: गन्ने को भारत की सबसे बड़ी नकदी फसलों में गिना जाता है. देश में बड़ी संख्या में किसान इसकी खेती करते हैं. खेत से निकलकर जब यह चीनी मिलों तक पहुंचता है तब गन्ना चीनी बन जाता है. लेकिन बहुत से लोगों के मन में गन्ने से चीनी बनाने को लेकर कई सवाल जरूर आते हैं. क्या आपके मन में भी यह सवाल आता है कि 1 क्विंटल यानी 100 किलो गन्ने से आखिर कितनी चीनी बनती है? 

तो आपको बता दें इसका कोई तय आंकड़ा नहीं है. क्योंकि यह कई बातों पर निर्भर करता है. जिसमें गन्ने की क्वालिटी कैसी है, उसमें मिठास कितनी है और वह किस तरह से प्रोसेस हो रहा है. इन सब बातों के आधार पर ही आखिरी प्रोडक्शन सामने निकल कर आता है. गन्ने से चीनी बनाने के लिए कई चरणों की प्रक्रिया होती है. चलिए आपको बताते हैं कि 1 क्विंटल गन्ने से कितनी चीनी तैयार होती है और कैसे तैयार होती है चीनी.  

1 क्विंटल गन्ने से कितनी चीनी निकलती है?

1 क्विंटल यानी 100 किलो गन्ने से कितनी चीनी बनेगी यह गन्ने की क्वालिटी और मिल की रिकवरी पर निर्भर करता है. आसान भाषा में समझें तो अगर किसी मिल में रिकवरी 10 परसेंट है तो 100 किलो गन्ने से करीब 10 किलो चीनी तैयार होगी. इसी तरह 11 परसेंट रिकवरी पर करीब 11 किलो और 12 परसेंट रिकवरी पर करीब 12 किलो चीनी मिल सकती है. यहां रिकवरी का मतलब है कि मिल में पिसने वाले कुल गन्ने से कितनी मात्रा में चीनी तैयार हुई.

हर गन्ने से एक जैसी चीनी नहीं निकलती. गन्ने में सुक्रोज की मात्रा ज्यादा होने पर रिकवरी भी बेहतर रहती है. इसके अलावा गन्ने की ताजगी भी काफी मायने रखती है. कटाई के बाद गन्ने को मिल तक पहुंचने में ज्यादा समय लगने पर चीनी की रिकवरी प्रभावित हो सकती है. यही वजह है कि गन्ने की गुणवत्ता के साथ उसे समय पर मिल तक पहुंचाना भी जरूरी माना जाता है. 


1 क्विंटल गन्ने से कितनी चीनी बनती है, क्या है इसका प्रोसेस?

गन्ने से चीनी बनने का पहला चरण क्या है?

चीनी बनाने की शुरुआत मिल में गन्ने की पेराई से होती है. मिल पहुंचने के बाद गन्ने को बड़ी मशीनों में क्रश किया जाता है, जिससे उसका रस बाहर निकलता है. इस रस में पानी के साथ सुक्रोज और दूसरे तत्व भी मौजूद होते हैं. इसके बाद रस को साफ करने का काम शुरू होता है. इसमें मिट्टी, रेशे और दूसरी अशुद्धियों को अलग किया जाता है.

साफ होने के बाद गन्ने के रस को गर्म किया जाता है. फिर इसमें मौजूद एक्सट्रा पानी को भाप के जरिए कम किया जाता है. धीरे धीरे रस गाढ़ा होकर सिरप जैसा बनने लगता है. इसके बाद इसी गाढ़े रस को आगे की प्रोसेस में भेजा जाता है जहां चीनी के क्रिस्टल तैयार होते हैं. यानी गन्ने की पेराई से लेकर रस को गाढ़ा करने तक का हर स्टेप चीनी की फाइनल रिकवरी में अहम भूमिका निभाता है.

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कैसे तैयार होते हैं चीनी के क्रिस्टल?

जब गन्ने का रस अच्छी तरह गाढ़ा हो जाता है तो इसे क्रिस्टल बनाने के अगले स्टेप में भेजा जाता है. यहां खास तापमान और सही कंडीशन में चीनी के छोटे छोटे क्रिस्टल तैयार किए जाते हैं. इसके बाद क्रिस्टल को बचे हुए  लिक्विड से अलग किया जाता है. यही क्रिस्टल आगे साफ होकर हमारे घरों में इस्तेमाल होने वाली दानेदार चीनी बनते हैं. गन्ने में मौजूद पूरी चीनी तैयार चीनी में नहीं बदलती. प्रोसेस के दौरान कुछ मात्रा अलग अलग हिस्सों में रह जाती है.

चीनी बनाने के दौरान सिर्फ चीनी ही नहीं मिलती. गन्ने से कई दूसरे काम की चीजें भी निकलती हैं. पेराई के बाद बचने वाले गन्ने के रेशे को बगास कहते हैं. इसका इस्तेमाल मिल में बिजली और भाप बनाने में किया जाता है. इसके अलावा शीरा यानी मोलासेस निकलता है जिसका इस्तेमाल एथेनॉल बनाने में होता है. प्रेसमड भी चीनी मिल में गन्ने की प्रोसेसिंग के दौरान निकलने वाला एक उपयोगी पदार्थ है.

इसलिए 1 क्विंटल गन्ने से सिर्फ चीनी ही नहीं बनती. बल्कि कई दूसरी काम की चीजें भी निकलती हैं. कितनी चीनी तैयार होगी यह गन्ने की क्वालिटी और मिल में होने वाली प्रोसेसिंग पर निर्भर करता है. इसलिए हर 100 किलो गन्ने से चीनी की मात्रा अलग हो सकती है.


1 क्विंटल गन्ने से कितनी चीनी बनती है, क्या है इसका प्रोसेस?

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

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