मसालों की खेती के लिए सरकार देगी मदद, जानें कैसे?
Spice Cultivation Tips: मसालों की खेती के लिए सरकार दे रही है आर्थिक मदद. MIDH योजना के तहत भारी सब्सिडी का लाभ कैसे उठाएं और किन दस्तावेजों की पड़ेगी जरूरत? जान लें पूरी खबर.

Spice Cultivation Tips: देश में हल्दी, अदरक, लहसुन, धनिया, जीरा, सौंफ, अजवाइन, मेथी और काली मिर्च जैसे कई मसालों की खेती बड़े पैमाने पर होती है. अब किसानों के लिए मसालों की खेती कमाई का अच्छा ऑप्शन बन रही है. सरकार की ओर से मसालों की खेती में लागत कम करने के लिए सहायता दी जा रही है. जिसमें मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर यानी MIDH के तहत मदद दी जाती है.
अलग-अलग कैटेगरी के तहत मसालों में पर मदद की लिमिट तय की गई है. नार्मल क्षेत्रों में किसानों को कई मसाला फसलों के लिए लागत का 40 प्रतिशत तक सहायता मिल सकती है. वहीं कुछ खास क्षेत्रों में यह मदद 50 प्रतिशत तक है. हालांकि पैसा सीधे किसान को कैश के तौर पर नहीं मिलता है. मदद लागत और क्षेत्र के आधार पर तय होती है. इसलिए आवेदन करने से पहले अपने राज्य के बागवानी विभाग से नियम जरूर समझ लें.
किन मसालों की खेती पर मिलेगी मदद?
MIDH के तहत मसालों को अलग अलग कैटेगरी में रखा गया है. बीज से उगाए जाने वाले मसालों में अजवाइन, सौंफ, धनिया, जीरा, मेथी, कलौंजी, काला जीरा और दूसरी फसलें शामिल हैं. इनके लिए लिमिट 50000 रुपये प्रति हेक्टेयर तय की गई है. सामान्य क्षेत्रों में इस लागत की 40 प्रतिशत तक मदद दी जाती है. यानी पात्र किसान को लिमिट के हिसाब से अधिकतम 20000 रुपये प्रति हेक्टेयर तक मदद मिल सकती है. यह मदद अधिकतम 2 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए तय नियमों के तहत दी जाती है.
अदरक, हल्दी और लहसुन जैसे कंद और गांठ वाली मसाला फसलों के लिए लिमिट 1 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर है. सामान्य क्षेत्रों में यहां भी 40 प्रतिशत तक मदद का प्रावधान है. इस हिसाब से तय लिमिट पर 40000 रुपये प्रति हेक्टेयर तक मदद मिल सकती है. नार्थ-ईस्ट और हिमालयी राज्यों, अनुसूचित क्षेत्रों और कुछ खास कैटेगरी वाले इलाकों में सहायता 50 प्रतिशत तक हो सकती है.

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काली मिर्च समेत इन मसालों पर भी लाभ
मसालों की खेती की योजना में सिर्फ जीरा, धनिया या हल्दी के लिए ही मदद नहीं मिलती है. बल्कि लंबे समय तक खेत में रहने वाले मसालों के लिए भी मदद दी जाती है. काली मिर्च, दालचीनी, तेजपत्ता, लौंग, जायफल, इलायची, वनीला और करी पत्ता जैसे मसाले इस कैटेगरी में आते हैं. इनके लिए तय लागत 1 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर रखा गया है. सामान्य क्षेत्रों में पात्र किसानों को 40 प्रतिशत तक सहायता मिल सकती है.
इसका मतलब तय की गई लागत के आधार पर मदद 40000 रुपये प्रति हेक्टेयर तक हो सकती है. यहां भी अधिकतम 2 हेक्टेयर क्षेत्र की लिमिट लागू है. इस मिलने वाली मदद का इस्तेमाल पौध सामग्री खरीदने के साथ खाद, पोषण प्रबंधन और कीट नियंत्रण से जुड़ी जरूरतों पर किया जा सकता है. यह रकम एक साथ नहीं मिलती, बल्कि 60 और 40 प्रतिशत की दो किस्तों में दी जाती है. वहीं विशेष क्षेत्रों के किसानों के लिए सरकारी सहायता की दर बढ़कर 50 प्रतिशत तक हो सकती है.
ऐसे ले सकते हैं सरकारी सहायता का लाभ
अगर आप मसालों की खेती के लिए सरकारी मदद लेना चाहते हैं तो सबसे पहले अपने जिले के बागवानी विभाग या राज्य की हॉर्टिकल्चर मिशन एजेंसी से जानकारी लें. योजना का क्रियान्वयन राज्यों के जरिए से होता है और आवेदन की प्रक्रिया राज्य के हिसाब से अलग हो सकती है. MIDH के तहत केंद्र सरकार सामान्य राज्यों में कुल योजना खर्च का 60 प्रतिशत हिस्सा देती है. जबकि बाकी हिस्सा राज्य सरकार का होता है. उत्तर पूर्व और हिमालयी राज्यों के लिए केंद्र की हिस्सेदारी 90 प्रतिशत तक है.
आवेदन के लिए आपके पास जमीन से जुड़े डाॅक्यूमेंट, पहचान और बैंक खाते से जुड़े डाॅक्यूमेंट साथ में विभाग की ओर से मांगे गए दूसरे डाॅक्यूमेंट बी देने पड़ सकते हैं. किसान को यह भी देखना चाहिए कि उसकी फसल और क्षेत्र योजना की पात्रता में आते हैं या नहीं. खेती शुरू करने से पहले सब्सिडी की प्रोसेस के बारे में विभाग से समझकर जान लेना सही रहेगा.

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