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खेती में इस्तेमाल करें Smart Irrigation, पानी के साथ साथ पैसों की भी होगी बचत

Smart Irrigation में सेंसर और दूसरी तकनीक की मदद से फसल को जरूरत के हिसाब से पानी दिया जाता है. इससे पानी की बर्बादी कम करने के साथ खेती का खर्च भी घटाया जा सकता है.

फसल को उगाने की प्रक्रिया में पानी सबसे अहम भूमिका निभाता है. अगर पानी की सही व्यवस्था न हो तो फसल उगाना लगभग असंभव हो जाता है. खेती-बाड़ी में हमेशा से पानी की समस्या रही है. कई बार फसलों में पानी कम जो जाता है और कभी ज्यादा. कई बार किसान खेत अंदाजे से खेत में सिंचाई कर देते हैं, जिससे जरूरत से ज्यादा पानी खर्च हो जाता है. इसके साथ ही बिजली, डीजल और मजदूरी का खर्च भी बढ़ जाता है. ऐसे में Smart Irrigation यानी स्मार्ट सिंचाई किसानों के लिए मददगार तकनीक है. इसमें खेत की मिट्टी में नमी और फसल की जरूरत देखकर सिंचाई का फैसला किया जाता है.

 Smart Irrigation आखिर है क्या?

Smart Irrigation को आसान भाषा में समझें तो यह ऐसी सिंचाई व्यवस्था है जिसमें खेत को जरूरत के हिसाब से पानी देने की कोशिश की जाती है. इसके लिए सेंसर, मोबाइल ऐप, ऑटोमेटिक पंप और दूसरी तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है. खेत में लगा सेंसर मिट्टी में मौजूद नमी की जानकारी देता है. अगर मिट्टी में पहले से नमी है तो किसान सिंचाई को कुछ समय के लिए रोक भी सकता है. इससे  फसल को बिना जरूरत पानी भी नहीं जाता.

मिट्टी की नमी देखकर मिलेगा सिंचाई का फैसला

कई बार ऊपर से मिट्टी सूखी दिखाई देती है, लेकिन नीचे नमी मौजूद होती है. ऐसे में सिर्फ ऊपर की मिट्टी देखकर पानी देना जरूरी नहीं होता. Smart Irrigation में सेंसर मिट्टी की नमी की जानकारी देने में मदद करता है. ICAR ने 2026 में पटना में IoT आधारित Soil Monitoring System भी लगाया है, जिसका उद्देश्य वास्तविक समय में मिट्टी की नमी की जानकारी लेकर जरूरत के हिसाब से फसल में पानी देने में मदद करता है.

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 पानी के साथ बिजली और डीजल का खर्च भी घट सकता है

जब खेत में जरूरत से ज्यादा पानी दिया जाता है तो सिर्फ पानी ही खर्च नहीं होता. अगर मोटर बिजली से चलती है तो बिजली का इस्तेमाल बढ़ता है और डीजल पंप होने पर डीजल का खर्च भी बढ़ता है. Smart Irrigation का उद्देश्य जरूरत के हिसाब से सिंचाई करना है. इससे बेवजह मोटर चलाने का समय कम होता है. यानी पानी की बचत के साथ बिजली या डीजल पर होने वाला खर्च भी कम हो जाता है.

ड्रिप और ऑटोमेटिक सिस्टम से भी मिलती है मदद

Smart Irrigation सिर्फ सेंसर तक ही सिमित नहीं है. इसमें ड्रिप इरिगेशन, ऑटोमेटिक पंप और सेंसर आधारित सिस्टम जैसी तकनीकें भी शामिल हैं. ICAR के अनुसार precision irrigation और water-smart technologies का इस्तेमाल पानी को सही समय और सही मात्रा में फसल तक पहुंचाने में मदद करता है. कुछ फसलों में सेंसर  पर आधारित माइक्रो इरिगेशन से पानी की बचत और पैदावार में सुधार भी होता है.

 हर किसान अपनी जरूरत के हिसाब से लगाए सिस्टम

Smart Irrigation लगाने से पहले किसान को यह देखना चाहिए कि उसके खेत का आकर कितना बड़ा है  , कौनसी फसल लगाईं गई है. और पानी का सोर्स क्या है और सिंचाई में अभी कितना खर्च हो रहा है. छोटे खेत के लिए एक आसान सेंसर सिस्टम काफी हो सकता है, जबकि बड़े खेत में ऑटोमेटिक सिंचाई की जरूरत पड़ती है.  यह सिस्टम सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो Smart Irrigation पानी बचाने के साथ खेती की लागत को भी कम कर सकता है.

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Bhumika Panwar ABP News की Lifestyle डेस्क पर डिजिटल मीडिया इंटर्न के तौर पर काम कर रही हैं. वह Mandsaur University से बीए जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की डिग्री कर रही हैं. ABP News में वह आर्टिकल और वेब स्टोरी लिखने का काम कर रही हैं, जिससे उन्हें डिजिटल मीडिया में काम करने का व्यावहारिक अनुभव मिल रहा है. उन्हें हिंदी में कंटेंट लिखने और नई जानकारी जुटाने में रुचि है.

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