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गुलाब की खेती के लिए कौनसी किस्में सबसे बेस्ट?

Rose Cultivation Tips: गुलाब की खेती से बंपर मुनाफा कमाने के लिए सही किस्म का पता होना बहुत जरूरी है. जानें कैसे करें अपनी जरूरत के हिसाब से सही चुनाव.

Rose Cultivation Tips:  आजकल पारंपरिक फसलों के मुकाबले फूलों की खेती किसानों के लिए कमाई का अच्छा जरिया भी बन सकती है. फूलों की मांग सालभर बनी रहती है इनमें गुलाब की डिमांड सबसे ज्यादा होती है. शादी, होटल, मंदिर, बुके से लेकर कॉस्मेटिक और परफ्यूम इंडस्ट्री तक गुलाब की अलग अलग किस्मों की जरूरत रहती है. 

लेकिन खेती शुरू करने से पहले सबसे जरूरी फैसला किस्म का होता है. हर गुलाब की किस्म का रंग, खुशबू, फूल का आकार और उत्पादन अलग होता है. कुछ किस्में कट फ्लावर के लिए ज्यादा सही रहती हैं तो कुछ से गुलकंद, गुलाबजल और इत्र जैसे उत्पाद तैयार किए जाते हैं. इसलिए सिर्फ सुंदर फूल देखकर पौधे खरीद लेना सही तरीका नहीं है. 

आपको अपने खेत में कई चीजों को देखकर ही कोई किस्म चुननी चाहिए. अगर सही किस्म लगाई जाए तो आपको फूलों की देखभाल करने में आसानी होती है. और इससे फूलों की क्वालिटी भी अच्छी रहती है. जिससे ज्यादा कमाई होने के चांस रहते हैं.

कट फ्लावर के लिए ये किस्में रहेंगी बेहतर

अगर आप गुलाब के फूल को उसकी डंडी के साथ में बेचने का सोच रहे हैं तो फिर कट फ्लावर वाली किस्में ज्यादा अच्छी रहेंगी. इस तरह के गुलाब में लंबी और मजबूत डंडी, बड़ा फूल, अट्रैक्टिव रंग और लंबे वक्त ताजा रहने की क्वालिटी देखी जाती है. लाल, पीले, गुलाबी और सफेद रंग के गुलाब की मांग बुके और सजावट के काम में बनी रहती है.

कट फ्लावर के लिए हाइब्रिड टी ग्रुप की कई किस्मों को पसंद किया जाता है. इसमें ताजमहल, सुपरस्टार, डबल डिलाइट, ब्लैक मैजिक और गोल्ड स्ट्राइक जैसी किस्मों के नाम लिए जाते हैं. यह किस्में बाजार और खेती के इलाके के हिसाब चुनी जा सकती हैं. हालांकि एक ही किस्म हर जगह एक जैसा उत्पादन दे यह जरूरी नहीं है. 


गुलाब की खेती के लिए कौनसी किस्में सबसे बेस्ट?

खुशबू वाले गुलाबों की भी रहती है अच्छी मांग

अगर आप सिर्फ फूल बेचने के बजाय गुलाब की पंखुड़ियों से दूसरे प्रोडक्ट तैयार करना चाहते हैं. तो खुशबूदार किस्में बेहतर ऑप्शन बन सकती हैं. जिनका इस्तेमाल गुलकंद, गुलाबजल और कई तरह के खुश्बू वाले प्रोडक्ट बनाने में किया जाता है. आपको बता दें गुलाब का फूल सिर्फ अपने साइज से ही नहीं बल्कि उसकी खुशबू और पंखुड़ियों की क्वालिटी के दम पर भी बिकता है.

खुश्बू के लिए बात करें तो इसमें देशी गुलाब, दमास्क गुलाब और सेंटिफोलिया गुलाब जैसी किस्में अच्छी मानी जाती हैं. दमास्क गुलाब का इस्तेमाल सुगंधित उत्पादों में किया जाता है. अगर आपके इलाके में इन फूलों की मांग रहती है और बेचने में कोई दिक्कत नहीं आएगी. तो फिर इसकी खेती आपके लिए एकदम परफेक्ट है.

हालांकि खेती शुरू करने से पहले यह जरूर पता कर लें कि आपके आसपास फूल कौन खरीदता है और किस भाव पर खरीदता करता है. इससे प्रोडक्शन शुरू हो गया तो फि
र उसे बेचने को आपको लेकर ज्यादा परेशानी नहीं होगी और पहले ही कमाई का एक मोटा अंदाजा भी हो जाएगा. 

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किस्म चुनते समय इन बातों का रखें ध्यान

गुलाब ऐसा फूल है जिसकी कई किस्में आपको तगड़ा प्राॅफिट दिला सकती हैं. इसमें किसी एक किस्म को सबसे बेस्ट नहीं कहा जा सकता है क्योंकि इसकी खेती में मौसम और मिट्टी का बड़ा रोल होता है. आपके लिए कौनसी किस्म सही होगी यह आपके खेत और लोकल बाजार पर तय करता है. 

अगर आसपास शादी समारोह, होटल, फूल मंडी या डेकोरेशन का काम ज्यादा है तो कट फ्लावर वाली किस्मों को लगाना फायदेमंद हो सकता है. वहीं अगर फूलों से गुलकंद, गुलाबजल या इत्र बनाने वाली इकाइयां आसपास हैं तो खुशबूदार गुलाब ज्यादा फायदे वाले रहेंगे.

पौधे खरीदते समय स्वस्थ और अच्छी क्वालिटी की पौध ही लें. किसी भरोसेमंद नर्सरी से पौधे लेना ज्यादा सही रहेगा. गुलाब की खेती करने से पहले अपने इलाके के उद्यान विभाग से गुलाब की किस्म की जानकारी जरूर ले लें. जिससे आपको आगे चलकर कोई दिक्कत नहीं होगी.

गुलाब की खेती के लिए कौनसी किस्में सबसे बेस्ट?

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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