Late Blight Lisease In Potato: आलू किसानों के लिए अलर्ट! मानसून सीजन में लेट ब्लाइट रोग का खतरा बढ़ा, ऐसे करें बचाव
Late Blight Lisease In Potato: केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान ने आलू के किसानों को लेट ब्लाइट रोग का खतरा बढ़ने की चेतावनी दी है. संस्थान के अनुसार, मौजूदा मौसम इस बीमारी को और ज्यादा फैला रहा है.

Late Blight Lisease In Potato: इस साल देश के कई राज्य बारिश की कमी से जूझ रहे हैं. इसी बीच केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान ने आलू की खेती करने वाले किसानों के लिए एक चेतावनी जारी की है. संस्थान का कहना है कि वर्तमान मौसम में आलू की फसल में लेट ब्लाइट यानी पिछेता रोग के तेजी से फैलने के संभावना है. इस खतरनाक बीमारी से फसल को भारी नुकसान हो सकता है, इसलिए संस्थान ने किसानों को समय रहते बचाव करने की सलाह दी है. आइए जानते हैं केंद्रीय आलू अनुसंधान द्वारा दी गई चेतावनी और सलाह के बारे में...
क्या है लेट ब्लाइट (पिछेता रोग)
पिछेता रोग आलू में लगने वाली एक ऐसी विनाशकारी फंगल बीमारी है, जो फाइटोफ्थोरा इन्फेस्टन्स नामक फंगस के कारण फैलती है. दरअसल, मानसून के दौरान हवा में लगातार नमी और धीमी बारिश होती रहती है, ऐसा ठंडा मौसम इस फंगस के पनपने और तेजी से फैलने के लिए सबसे अनुकूल होता है. यह बीमारी इतनी तेजी से फैलती है कि देखते ही देखते कुछ ही दिनों में हरा-भरा खेत काला पड़कर नष्ट हो जाता है.
कैसे पहचाने बीमारी
इस बीमारी को पहचानने के लिए आप रोजाना सुबह-शाम खेत पर जाए और आलू के पौधों को ध्यान से देखें, कि कहीं पौधों की निचली पत्तियों के किनारों पर हल्के से गहरे रंग के पानीदार धब्बे तो नहीं बने हुए है, और ये धब्बे तेजी से बढकर काले या कत्थई रंग के तो नहीं हो रहे हैं. अगर हां तो आपकी फसल में भी यह रोग आ चुका है. अब यह हवा के जरिये जमीन के भीतर पहुंच जाएगा, जिस वजह से आलू अंदर से लाल भूरे रंग के होकर सड़ने लगेंगे और उनसे बदबू आने लगेगी.
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कैसे करें बचाव
केंद्रीय आलू संस्थान के अनुसार, किसान 'मैनकोजेब' या 'क्लोरोथालोनिल' युक्त फफूंदीनाशक का छिड़काव कर सकते हैं. संस्थान के मुताबिक, प्रति हेक्टेयर 1,000 लीटर पानी में 2.0 से लेकर 2.5 किलोग्राम रसायन घोलकर उसका छिड़काव करें. विशेषज्ञों के अनुसार, हर 10 दिन के अन्तराल में इस फफूंदनाशी का छिड़काव करते रहें. अगर इस रसायन का सही समय पर छिड़काव किया जाए तो फसल में बदलाव लाया जा सकता हैं.
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