क्या होता है बफर स्टॉक, इसमें कितना प्याज रखती है सरकार?
समझिए क्या है सरकार का बफर स्टॉक प्लान? प्याज की आसमान छूती कीमतों को थामने के लिए केंद्र ने जुटाया 1.21 लाख टन का सुरक्षित भंडार. 35 रुपये किलो में जनता को मिल रही बड़ी राहत.

हर साल बारिश के मौसम में या त्योहारों से पहले प्याज के दाम अचानक आसमान छूने लगते हैं. कभी फसल खराब होने से, तो कभी बाजार में सप्लाई कम होने से यह उछाल आता है. इसी अचानक बढ़ती महंगाई को रोकने के लिए सरकार एक खास तरीका अपनाती है, जिसे बफर स्टॉक कहा जाता है. यह व्यवस्था प्याज के दाम को न ज्यादा गिरने देती है और न ज्यादा बढ़ने देती है.
बफर स्टॉक होता क्या है?
बफर स्टॉक का मतलब है, जरूरत से ज्यादा पैदावार के समय सरकार का किसानों से प्याज खरीदकर उसे सुरक्षित रखना. जब बाजार में प्याज की भरमार होती है और दाम गिरने लगते हैं, तब सरकार किसानों से तय कीमत पर प्याज खरीद लेती है, ताकि किसानों को नुकसान न हो. इसी खरीदे गए प्याज को बाद में, जब बाजार में सप्लाई कम हो जाती है और दाम बढ़ने लगते हैं, तब धीरे-धीरे बाजार में उतारा जाता है. इससे उपभोक्ताओं को भी राहत मिलती है.
प्याज का बफर स्टॉक कौन बनाता है?
बफर स्टॉक का सीधा मतलब है, जरूरत से ज्यादा पैदावार के समय सरकार का किसानों से प्याज खरीदकर उसे सुरक्षित रखना. जब बाजार में प्याज की भरमार होती है और दाम गिरने लगते हैं, तब सरकार किसानों से तय कीमत पर प्याज खरीद लेती है, ताकि किसानों को नुकसान न हो. इसी खरीदे गए प्याज को बाद में, जब बाजार में सप्लाई कम हो जाती है और दाम बढ़ने लगते हैं, तब धीरे-धीरे बाजार में उतारा जाता है. इससे उपभोक्ताओं को भी राहत मिलती है.
इस साल कितना प्याज खरीदा जा रहा है?
मौजूदा सीजन 2026-27 के लिए सरकार ने रबी प्याज की खरीद का लक्ष्य 2 लाख मीट्रिक टन तय किया है. यह खरीद 15 मई से शुरू हो चुकी है और अब तक करीब 1.21 लाख मीट्रिक टन प्याज खरीदा जा चुका है. पिछले साल यानी 2025-26 सीजन में शुरुआती लक्ष्य 3 लाख मीट्रिक टन रखा गया था, लेकिन जब यह लक्ष्य पूरा हो गया, तो सरकार ने इसे बढ़ाकर 5 लाख मीट्रिक टन कर दिया था. साल 2026-27 में देश में कुल प्याज उत्पादन करीब 307 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है, जो पिछले साल के बराबर ही है.
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जरूरत पड़ने पर बाजार में कैसे उतरता है प्याज?
जब बाजार में प्याज के दाम तय सीमा से ज्यादा बढ़ने लगते है, तो सरकार बफर स्टॉक से प्याज निकालकर बाजार में भेजना शुरू कर देती है. यह प्याज NCCF और NAFED के आउटलेट, मोबाइल वैन, सफल और केंद्रिय भंडार जैसे केंद्रों के जरिेए करीब 25 से 35 रुपये प्रति किलो की रियायती दर पर आम लोगों को बेचा जाता है. इसे अलग-अलग शहरों तक तेजी से पहुंचाने के लिए रेलवे की मदद से कांदा एक्सप्रेस नाम की खास मालगाड़ी सेवा भी चलाई जाती है.
किसानों को कैसे होता है फायदा?
बफर स्टॉक की इस पूरी व्यवस्था का मकसद एक साथ दो काम करना है. एक तरफ यह किसानों को फसल का सही दाम दिलाकर उन्हें आर्थिक नुकसान से बचाती है, तो दूसरी तरफ आम उपभोक्ताओं को महंगाई की मार से राहत देती है. यही वजह है कि हर साल फसल के मौसम में सरकार प्याज खरीदकर स्टॉक बनाती है और जरूरत पड़ने पर उसे संभल-संभल कर बाजार में उतारती है.
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