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कौन-सी है देश की सबसे पुरानी ट्रैक्टर कंपनी, अब कैसे हैं उसके हाल?

भारत में ट्रैक्टरों का इस्तेमाल खेती को आसान बनाने के लिए लंबे समय से हो रहा है. जानिए देश में ट्रैक्टर बनाने वाली शुरुआती कंपनी कौन सी थी और आज उसका कारोबार कैसा है.

भारत एक कृषि प्रधान देश है. यहां खेती के काम में ट्रैक्टर का इस्तेमाल आज आम बात हो गई है. खेत की जुताई करने से लेकर बुवाई, फसल को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने और कई दूसरे कामों में ट्रैक्टर किसानों का समय और मेहनत दोनों बचाता है. आज बाजार में किसानों के लिए अलग-अलग कंपनियों और अलग-अलग हॉर्सपावर वाले ट्रैक्टर मौजूद हैं. महिंद्रा, स्वराज, सोनालिका, न्यू हॉलैंड और ईशर जैसी कंपनियों के ट्रैक्टर देश के अलग-अलग हिस्सों में देखने को मिलते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में ट्रैक्टर इंडस्ट्री का इतिहास कई साल पुराना है. भारत में ही ट्रैक्टर बनाने की शुरुआत हुई और धीरे-धीरे यह खेती का अहम हिस्सा बन गया.

भारत में ट्रैक्टर का सफर कैसे शुरू हुआ

भारत में ट्रैक्टर इंडस्ट्री के शुरुआती दौर में ईशर का नाम काफी महत्वपूर्ण रहा है. कंपनी के आधिकारिक इतिहास के मुताबिक, भारत में ईशर की शुरुआत 1948 में Goodearth कंपनी के जरिए हुई थी. उस समय कंपनी दूसरे देशों से ट्रैक्टर मंगाकर भारत में उनकी बिक्री और सर्विस का काम करती थी. इसके बाद देश में ही ट्रैक्टर बनाने की दिशा में काम शुरू हुआ. 1958 में Eicher Tractor Corporation of India Ltd. की स्थापना की गई और इसके बाद कंपनी ने भारत में ट्रैक्टर निर्माण का काम शुरू हुआ.

1959 में भारत में बना ईशर ट्रैक्टर

ईशर के इतिहास में 1959 का साल काफी खास माना जाता है. कंपनी के अनुसार इसी साल उसके फरीदाबाद प्लांट से भारत में तैयार किया गया पहला ईशर ट्रैक्टर बाहर आया था. इसके बाद कंपनी ने धीरे-धीरे ट्रैक्टरों में स्थानीय स्तर पर बने पार्ट्स का इस्तेमाल बढ़ाया. इससे भारत में ट्रैक्टर निर्माण को आगे बढ़ाने में मदद मिली. 1960 में कंपनी का नाम बदलकर Eicher Tractors India Ltd. कर दिया गया. इस तरह कंपनी का नाम देश में ट्रैक्टरों के शुरुआती विकास से जुड़ गया.

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 किसानों की जरूरत के हिसाब से बदले ट्रैक्टर

समय के साथ किसानों की जरूरतें भी बदलती गईं. पहले ट्रैक्टर का इस्तेमाल मुख्य रूप से जुताई और भारी कृषि कामों के लिए किया जाता था, लेकिन अब इनका इस्तेमाल कई तरह के कामों में किया जाता है. अलग-अलग फसलों और खेतों के हिसाब से किसानों को अलग क्षमता वाले ट्रैक्टरों की जरूरत होती है. इसी वजह से कंपनियों ने भी अपनी ट्रैक्टर रेंज में बदलाव किया. छोटे किसानों के लिए कम हॉर्सपावर वाले मॉडल और बड़े खेतों के लिए ज्यादा क्षमता वाले ट्रैक्टर बाजार में आने लगे.

अभी क्या है Eicher का हाल

अगर आज की स्थिति की बात करें तो Eicher ट्रैक्टर का कारोबार बंद नहीं हुआ है, बल्कि ब्रांड अभी भी बाजार में मौजूद है. TAFE Motors and Tractors Limited यानी TMTL, जो TAFE की पूरी हिस्सेदारी वाली कंपनी है, Eicher ब्रांड के ट्रैक्टर बनाती है. इसका ट्रैक्टर डिविजन मध्य प्रदेश के मंडीदीप में है. कंपनी की वेबसाइट के मुताबिक यहां Eicher ब्रांड के अलग-अलग ट्रैक्टर और फार्म सॉल्यूशन तैयार किए जाते हैं. यानी पुराना Eicher नाम आज भी ट्रैक्टर बाजार में चल रहा है.

ट्रैक्टर बाजार में बढ़ी प्रतियोगिता

आज भारत में ट्रैक्टर बाजार पहले के मुकाबले काफी बदल चुका है. किसानों के पास कई कंपनियों के ट्रैक्टर मौजूद हैं और हर कंपनी अलग-अलग फीचर्स के साथ मॉडल पेश करती है. ट्रैक्टर खरीदते समय किसान सिर्फ कीमत ही नहीं देखते, बल्कि माइलेज, इंजन क्षमता, सर्विस सेंटर की सुविधा, स्पेयर पार्ट्स और खेत में होने वाले काम को भी ध्यान में रखते हैं. इसी वजह से पुरानी कंपनियों के सामने भी लगातार नई तकनीक देने की चुनौती रहती है.

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मनस्वी चौहान ने मंदसौर यूनिवर्सिटी से अपनी शैक्षणिक यात्रा शुरू की और वर्तमान में बीए इन जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई कर रही हैं. पत्रकारिता और मीडिया के क्षेत्र में रुचि रखते हुए मनस्वी चौहान वर्तमान में ABP Network में इंटर्नशिप के माध्यम से व्यावहारिक अनुभव प्राप्त कर रही हैं.

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