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जुलाई में लगाएं बरसाती खीरा, महज 40 दिनों में शुरू होगी तगड़ी कमाई

Cucumber Cultivation Tips: जुलाई में बरसाती खीरे की बुवाई करके किसान महज 40 दिनों के भीतर बंपर पैदावार ले सकते हैं. इन बातों का ध्यान रखके इस सीजन में अच्छी कमाई की जा सकती है.

Cucumber Cultivation Tips: जुलाई का महीना आते ही मॉनसून की बारिश शुरू हो जाती है. जो कई फसलों के लिए वरदान साबित होती है. अगर आप इस सीजन में कम समय में मोटी कमाई करना चाहते हैं. तो बरसाती खीरे की खेती आपके लिए सबसे बेहतरीन मौका है. पारंपरिक फसलों की तुलना में खीरे की यह खेती किसानों के बीच आजकल काफी पसंद की जा रही है.

क्योंकि इसमें लागत कम और मुनाफा बहुत जल्दी मिलता है. जुलाई के शुरुआती हफ्तों में अगर इसकी बुवाई कर दी जाए तो फसल बहुत तेजी से बढ़ती है. सबसे अच्छी बात यह है कि इस मौसम में हरी सब्जियों की मांग बाजार में बहुत ज्यादा रहती है जिससे किसानों को अपनी उपज का बहुत ही शानदार और मनमाफिक दाम मिल जाता है.

महज 40 दिनों में तैयार 

बरसाती खीरे की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह बहुत ही कम समय में बिकने के लिए तैयार हो जाता है. बुवाई के ठीक 40 से 45 दिनों के भीतर इसमें फल आने लगते हैं और तुड़ाई शुरू हो जाती है. चूंकि इस दौरान मंडियों में ताजी सब्जियों की आवक थोड़ी कम होती है.

जेब फुल करने वाली फसल

इसलिए शुरुआती खेप निकलते ही किसानों को 60 से 80 रुपये किलो तक का थोक भाव आसानी से मिल जाता है. 1 एकड़ में भी अगर सही तरीके से उन्नत किस्मों की बुवाई की जाए, तो महज डेढ़ महीने के भीतर ही किसान भाई अपनी लागत निकालकर कई गुना ज्यादा शुद्ध मुनाफा कमा लेते हैं.

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इसकी खेती में इन बातों का रखें ध्यान

इस सीजन में खीरे से ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है. सबसे पहले तो खेत में जल निकासी का सही बंदोबस्त होना चाहिए. क्योंकि रुका हुआ पानी पौधों की जड़ों को सड़ा सकता है. बुवाई के लिए हमेशा उन्नत और रोग-प्रतिरोधी हाइब्रिड बीजों का ही इस्तेमाल करें. 

मचान विधि का करें इस्तेमाल

पौधों को जमीन पर फैलाने के बजाय मचान विधि का इस्तेमाल करें जिससे फल पानी और कीचड़ के संपर्क में आकर खराब न हों. समय पर सही जैविक खाद देने से फलों की क्वालिटी और चमक शानदार रहती है. जिससे बाजार में देखते ही माल बिक जाता है.

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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