बारिश के बाद खेत में कब डालना चाहिए यूरिया, क्या कहते हैं एक्सपर्ट
Farming Tips: मानसून के दौरान खेतों में यूरिया का सही इस्तेमाल न करने से भारी नुकसान हो सकता है. जानिए एक्सपर्ट्स की वह खास सलाह जिससे आपकी खाद वेस्ट नहीं होगी और फसलों को मिलेगा पूरा पोषण.

Farming Tips: बारिश के मौसम में खेतों में यूरिया का इस्तेमाल करते वक्त अक्सर किसान भाई बड़ी गलती कर बैठते हैं. हल्की बारिश होते ही फटाक से खेत में यूरिया का छिड़काव शुरू कर देते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी यह हड़बड़ी आपकी मेहनत और पैसे दोनों पर पानी फेर सकती है? कृषि एक्सपर्ट्स का मानें तो अगर यूरिया सही समय और सही तरीके से न डाला जाए.
तो उसका आधा हिस्सा या तो पानी के साथ बहकर वेस्ट हो जाता है या हवा में उड़ जाता है. आपकी फसल को पूरा पोषण मिले और आप पर एक्स्ट्रा खर्चे का बोझ न बढ़े इसके लिए बारिश के बाद यूरिया छिड़कने का एकदम सही समय और तरीका जानना जरूरी है. चलिए आपको बताते हैं इस बारे में पूरी जानकारी.
खड़े पानी में यूरिया डालने की गलती कभी न करें
अगर बारिश के बाद आपके खेत में पानी जमा है. तो उस वक्त यूरिया डालने से सबसे ज़्यादा नुकसान होता है. पानी में घुलते ही यूरिया बह जाता है या फिर ज़मीन के बहुत गहराई में चला जाता है, जहां पौधे की जड़ें पहुंच ही नहीं पातीं.
एक्सपर्ट्स की सलाह है कि हमेशा खेत से फालतू पानी बाहर निकलने का इंतज़ार करें. जब खेत में सिर्फ मिट्टी की नमी बचे और खड़ा पानी पूरी तरह सूख जाए तभी यूरिया का छिड़काव करें. इससे खाद सीधे पौधों की जड़ों तक पहुँचती है. जिससे फसल तेजी से ग्रोथ करती है और पौधा एकदम हरा-भरा और मजबूत बनता है.
यह भी पढ़ें: फार्म पॉन्ड (Farm Pond) बनवाने पर कितनी सहायता देती है सरकार, जानें कैसे करें अप्लाई?
पत्तियों की नमी चेक करें
यूरिया छिड़कते वक्त सिर्फ ज़मीन ही नहीं बल्कि मौसम और पौधों की पत्तियों पर ध्यान देना भी उतना ही ज़रूरी है. अगर बारिश के तुरंत बाद पत्तियों पर पानी की बूंदें टंगी हों तो यूरिया बिल्कुल न डालें. ऐसा करने से यूरिया के दाने पत्तियों पर चिपक जाते हैं और उन्हें पूरी तरह जला सकते हैं.
मौसम का ध्यान रखना है ज़रूरी
इसके अलावा कड़कड़ाती धूप में यूरिया डालने से बचें क्योंकि गर्मी से खाद गैस बनकर उड़ जाती है. दोपहर के बजाय सुबह या शाम के ठंडे वक्त में छिड़काव करना सबसे बेस्ट रहता है. जब पत्तियां सूखी हों और ज़मीन में हल्की नमी हो तभी यूरिया का सही से अपना असर दिखाता है.
























