गाय को कहीं लंपी रोग तो नहीं हो गया, ऐसे करें पहचान?
अगर आपकी गाय के शरीर पर अचानक गांठें निकल रही हैं या बुखार के साथ दूध कम हो गया है तो सावधान रहें. जानें लंपी रोग के कौन से लक्षण है जिन्हें पहचानने में मदद करते हैं.

पशुपालकों के लिए पशुओं की सेहत का ध्यान रखना बहुत जरूरी है, क्योंकि गाय या भैंस के बीमार होने का असर दूध और कमाई दोनों पर पड़ सकता है. इन्हीं बीमारियों में लंपी स्किन डिजीज भी शामिल है. यह एक वायरल बीमारी है, जो मुख्य रूप से गाय और भैंस जैसे पशुओं को प्रभावित करती है. इस बीमारी में शरीर पर खास तरह की गांठें निकलना इसका सबसे पहचानने वाला लक्षण माना जाता है. इसके साथ बुखार, भूख कम होना और दूध का उत्पादन घटने जैसी परेशानियां भी दिखाई दे सकती हैं. अगर पशु में ऐसे बदलाव नजर आएं तो इसे सामान्य त्वचा की समस्या समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और पशु चिकित्सक से जांच करानी चाहिए.
शरीर पर गांठें निकलना सबसे बड़ा संकेत
लंपी रोग में गाय की त्वचा पर गोल और उभरी हुई सख्त गांठें दिखाई दे सकती हैं. ये गांठें शरीर के अलग-अलग हिस्सों में हो सकती हैं, खासकर सिर, गर्दन, पैर, थन और शरीर के दूसरे हिस्सों पर. कुछ मामलों में गांठों के बीच का हिस्सा बाद में खराब होकर घाव जैसा भी दिखाई दे सकता है. इसलिए अगर पशु की त्वचा पर अचानक इस तरह की कई गांठें नजर आएं तो पशुपालक को सावधान हो जाना चाहिए.
गांठों के साथ बुखार और भूख कम होना
लंपी रोग में सिर्फ त्वचा पर गांठें ही नहीं निकलतीं, बल्कि पशु को तेज बुखार भी हो सकता है. इसके साथ उसका खाना कम हो सकता है और वह पहले की तुलना में कमजोर या सुस्त नजर आ सकता है. कुछ पशुओं में वजन कम होने की समस्या भी दिखाई देती है. अगर गांठों के साथ ये बदलाव भी नजर आ रहे हैं तो बीमारी की संभावना को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
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दूध देने वाली गाय में उत्पादन कम हो सकता है
अगर बीमार गाय दूध देती है तो लंपी रोग के दौरान उसके दूध की मात्रा में कमी आ सकती है. बीमारी के असर से पशु कमजोर पड़ सकता है और खाने-पीने में भी रुचि कम हो सकती है. शरीर के कुछ हिस्सों में सूजन भी दिखाई दे सकती है. इसलिए दूध देने वाली गाय के व्यवहार, खाने और रोज के दूध की मात्रा में अचानक बदलाव को भी ध्यान से देखना जरूरी है.
यह बीमारी फैल भी सकती है, इसलिए सावधानी जरूरी
लंपी रोग का वायरस मुख्य रूप से मच्छर, मक्खी और कुछ दूसरे खून चूसने वाले कीड़ों के जरिए एक पशु से दूसरे पशु तक पहुंच सकता है. संक्रमित पशु के संपर्क और दूषित सामान से भी संक्रमण फैलने की संभावना बताई गई है. इसलिए अगर किसी पशु में बीमारी के लक्षण दिख रहे हैं तो उसे बाकी पशुओं से अलग रखने और साफ-सफाई पर ध्यान देने के साथ पशु चिकित्सक से सलाह लेना जरूरी है.
लक्षण दिखें तो खुद इलाज न करें
सिर्फ शरीर पर गांठ देखकर पक्के तौर पर यह नहीं कहा जा सकता कि पशु को लंपी रोग ही है. बीमारी की जांच के लिए पशु चिकित्सक की जांच जरूरी हो सकती है. सरकारी पशु चिकित्सा दिशानिर्देशों में भी बीमारी की पहचान के लिए लक्षणों के साथ जरूरत पड़ने पर जांच की बात कही गई है. इसलिए गांठ, बुखार, सूजन या दूध कम होने जैसे लक्षण दिखाई दें तो जल्द से जल्द पशु चिकित्सक से संपर्क करें.
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