अब बंद कमरे में उगाएं लाल सोना, इन आसान तरीकों से घर में उग आएगी असली केसर
इनडोर सैफरन फार्मिंग में नियंत्रित तापमान और नमी के साथ बंद कमरे में केसर उगाई जा सकती है. यह कम जगह में अधिक उत्पादन और बेहतर कमाई का विकल्प बन रही है.

महंगे मसालों की बात आते ही केसर का नाम सबसे ऊपर देखने को मिलता है, यही कारण है कि इसको लाल सोना कहा जाता है. केसर का नाम आते ही हर किसी के दिमाग में यही आता है कि केसर सिर्फ कश्मीर की ठंडी-ठंडी वादियों में उगाई जाती है, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि आजकल अलग-अलग जगहों पर लोग बंद कमरों के अंदर भी केसर उगा रहे हैं. इस नए तरीके को इनडोर सैफरन फार्मिंग या एरोपोनिक फार्मिंग कहा जाता है, जिसमें बिना खुले खेत के, सिर्फ एक कमरे में ही सही तापमान और नमी देकर केसर की खेती की जा सकती है.
इस जानकारी के बाद हर किसी के दिमाग में एक ही सवाल आता है कि आखिर कश्मीर की ठंडी वादियों में उगाई जाने वाली केसर केवल एक बंद कमरे में कैसे उगाई जा सकती है. इतना ही नहीं, कई किसानों ने इसकी खेती कर काफी मुनाफा भी कमाया है. यही वजह है कि आज के समय में केसर उगाने की यह प्रक्रिया हर किसान को आकर्षित कर रही है. आइए जानते हैं इसके बारे में पूरी जानकारी.
घर में केसर उगाने का आसान तरीका और पूरी प्रक्रिया
घर पर केसर उगाने के लिए सबसे पहले अच्छी क्वालिटी के केसर के बीज यानी कॉर्म खरीदे जाते हैं, जो आमतौर पर अगस्त से नवंबर के बीच उपलब्ध होते हैं. इन कॉर्म को मिट्टी में नहीं, बल्कि खुली हवा वाली ट्रे में करीब-करीब जमाकर रखा जाता है और इन ट्रे को कई परतों में ऊपर-नीचे रैक पर लगाया जाता है, ताकि कम जगह में ज्यादा पौधे उगाए जा सकें.
शुरुआत के करीब 90 से 100 दिनों तक कमरे को पूरी तरह अंधेरा रखा जाता है, ताकि कॉर्म में जड़ें और अंकुर सही तरीके से बन सकें. इसके लिए खिड़कियों को काले कपड़े या मोटे कार्डबोर्ड से ढक दिया जाता है. इतने दिन बाद जब पौधा फूल देने के लिए तैयार होने लगता है, तो कमरे में हल्की रोशनी दी जाती है, जिससे फूल खिलने लगते हैं.
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तापमान और नमी का सही संतुलन है सफलता की कुंजी
इस पूरी प्रक्रिया में तापमान का खास ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है. कॉर्म को सुप्त अवस्था में 5 से 10 डिग्री सेल्सियस के आसपास रखा जाता है, जबकि फूल आने के समय तापमान करीब 15 से 20 डिग्री सेल्सियस के बीच रखा जाता है. इसके लिए किसान कमरे में तापमान और नमी नापने वाले छोटे उपकरण लगाते हैं, ताकि हर स्टेज पर सही माहौल बना रहे. अनुमान के मुताबिक करीब 20 बाय 20 फीट के छोटे से कमरे से भी सालभर में 900 से 1100 ग्राम तक केसर तैयार की जा सकती है, जो पारंपरिक खेती के मुकाबले काफी अच्छा उत्पादन माना जाता है.
इस तरीके की सबसे खास बात यह है कि इसे मौसम की परवाह किए बिना, देश के किसी भी शहर में अपनाया जा सकता है, चाहे वहां की जलवायु कश्मीर जैसी हो या न हो. इससे न सिर्फ शहरों में रहने वाले लोगों को घर बैठे खेती करने का मौका मिल रहा है, बल्कि छोटी जगह में भी अच्छी कमाई करने का जरिया भी बन रहा है.
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