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Exotic Fruits: सिर्फ आधा एकड़ में खेती से हो रही लाखों की कमाई, हर एक पौधे से मिल जाते हैं 10 से 12 किलो फल! काफी सही है ये आइडिया

Successful Farmer: मन में दृढ़ निश्चय हो तो किसान क्या कुछ नहीं कर सकते हैं. हरियाणा के किसान ने सिर्फ आधा एकड़ खेत से लाखों की आमदनी ली है. इनके प्रयासों के लिए बागवानी विभाग ने सराहना भी की है.

Agri Business: आज खेती में बढ़ते नुकसान के बीच किसानों का मानना है कि ये अब फायदे का सौदा नहीं है. ऐसी निराशा तब होती है, जब खेती में कड़ी मेहनत करने के बावजूद सही उत्पादन नहीं मिलता. कई बार तो मौसम की मार, कीट-रोगों का प्रकोप और दूसरी वजहों से नुकसान भी हो जाता है, जो किसानों को खेती छोड़ने पर मजबूर कर देता है. फिर किसान भी अपनी जमीन छोड़कर नौकरी करने शहरों की तरफ निकल पड़ते हैं, लेकिन कई किसान ऐसे भी हैं, जो अपनी सूझबूझ से खेती में इनोवेशन करके लाखों कमा रहे हैं.

सही मायनों में यही किसान अब कृषि का भविष्य है. कृषि क्षेत्र में सफलता के लिए उम्मीद की अलख जलाने वाले किसानों में शामिल हैं हरियाणा के फतेहाबाद जिले से ताल्लुक रखने वाले अशोक कुमार, जो ब्लॉक भूना के नढ़ेडी गांव में सिर्फ आधा एकड़ जमीन पर खेती कर रहे हैं. अशोक कुमार कोई साधारण फसल नहीं उगा रहे.

इनके खेत में वो विदेशी फसल लगी है, जिसकी शहरों में डिमांड बढ़ती जा रही है और इसी फसल ने आधार एकड़ में लाखों की आमदनी देकर अशोक कुमार को प्रगतिशील किसान अशोक कुमार बना दिया है. हम बात कर रहे हैं ड्रैगन फ्रूट की, जिसने अशोक कुमार जैसे हजारों भारतीय किसानों को दौलत और शौहरत दिलवाई है.

बागवानी विभाग ने की तारीख
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो जब बागवानी विभाग को प्रगतिशील किसान अशोक कुमार के प्रसायों के बारे में जानकारी मिली तो चंडीगढ़ से एक टीम अशोक कुमार के खेत पर निरीक्षण करने पहुंच गई और इस इनोवेटिव किसान की मेहनत की तारीफ भी की. अशोक कुमार बताते हैं कि बागवानी विभाग ने उनके खेती-किसानी के मॉल को एक रॉयल मॉडल बना दिया है.

इसी मॉडल की तर्ज पर अब दूसरे किसानों को भी प्रेरित किया जा रहा है. आज अशोक कुमार अपने गांव के दूसरे किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बनकर उभर रहे हैं, लेकिन फर्श से अर्श तक का ये सफर इतना आसान भी नहीं था.

पारंपरिक खेती छोड़ उगाए ड्रैगन फ्रूट
ताजा रिपोर्ट्स में भूना में बागवानी विभाग के उपनिदेशक डॉ. सुभाष चंद्र बताते हैं कि नाढ़ोडी गांव के इस किसान ने अपनी 4 एकड़ जमीन पर परंपरागत खेती करना छोड़ दिया है और अब ड्रैगन फ्रूट की खेती की दिशा में ही काम कर रहे हैं. इससे उन्हें कम खर्च में अच्छा मुनाफा मिल है. अब जैसे-जैसे समय बीतता जाएगा, ड्रैगन फ्रूट्स के पौधों की उत्पादन क्षमता भी बढ़ती जाएगी.

इनसे प्रेरणा लेकर दूसरे किसानों को भी बागवानी और सब्जियों की दिशा में काम करने से निश्चित ही फायदा होगा. अपने इस सफर को लेकर प्रगतिशील किसान अशोक कुमार कहते हैं कि किसानों के बच्चे पैसा कमाने के लिए विदेश चला जाते हैं, लेकिन वो देश में रहककर ही कुछ नया करें या ड्रैगन फ्रूट की खेती करें तो अपने घर बैठे लाखों रुपये कमा सकते हैं.

One Time Investment 25 साल तक कमाई
किसान अशोक कुमार धारनिया ने 17 फरवरी 2021 में अपनी आधा एकड़ जमीन पर ड्रैगन फ्रूट लगाए थे, जिसमें आधुनिक तरीकों से 1,000 पौधों की रोपाई की थी और इनके सहारे के लिए पिलर भी लगाए थे, जिसके बाद इसी साल जून में फलों की पैदावार मिलने लगी.

अशोक कुमार बताते हैं कि इस खेती से हर किसान सालाना 6 से 8 लाख रुपये कमा रहा है. उम्मीद है कि अगले साल हमारे खेत के पौधे भी 50 क्विंटल तक प्रोडक्शन देने लगेंगे.उन्होंने बताया कि एक बार निवेश के बाद ये फसल पारंपरिक खेती से ज्यादा मुनाफा देती है और 25 साल तक अच्छी आमदनी होती रहती है.

इसकी कीमत की बात करें तो एक ही फल का वजन 300 से 400 ग्राम होता है, जो बाजार में 80 से 100 रुपये तक का बिकता है. एक पिलर से करीब 10 से 12 किलोग्राम ततक ड्रैगन फ्रूट्स का प्रोडक्शन ले सकते हैं.

क्यों खास है ड्रैगन फ्रूट
ड्रैगन फ्रूट की गिनती अब कैश क्रॉप्स में होने लगी है. ये फल एक्जोटिक फ्रूट्स यानी विदेशी फलों की श्रेणी में आता है, जिसके कई सालों से हमारे देश में डिमांड थी. धीरे-धीरे किसानों ने इसके फायदों को समझा और गांव में रहकर ही इस कैश क्रॉप से अच्छा पैसा कमाने लगे. इस फल की खेती में पैसा तो बचता ही है, कमाई भी अच्छी हो जाती है.

दरअसल, ड्रैगन फ्रूट के फल या पौधे में कीट-रोग का खतरा नहीं होता, जिससे कीटनाशक दवाओं का खर्चा बच जाता है और अलग से उर्वरक डालने की भी जरूरत नहीं पड़ती. इसकी ड्रैगन जैसी बनावट देख जानवर भी इस फल को नहीं खाते. इस तरह ड्रैगन फ्रूट की सुरक्षा का खर्चा बच जाता है.

ये एक कैक्टस प्रजाति का पौधा है, जो सूखा में भी बंपर फलों का प्रोडक्शन देता है, इसलिए अधिक सिंचाई की कोई जरूरत नहीं, सिर्फ ड्रिप सिंचाई से ही काम हो जाता है. ये फल कई बीमारियों का खतरा दूर करके शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाना है.

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. किसान भाई, किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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