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गमले में उगाएं सेम की फली, घर बैठे पाएं ताजी सब्जी

Grow Beans At Home: अगर आप बिना केमिकल के उगाई गई हरी सब्जी खाना चाहते हैं. तो बाहर से लाने के बजाय खुद अपने घर पर गमले में ही उगा लें. जानें गमले में सेम की फली उगाने की पूरी जानकारी.

Grow Beans At Home: आजकल शहरों में बाजार से मिलने वाली हरी सब्जियों में केमिकल्स और कीटनाशकों की भरमार देखकर हर कोई अपनी सेहत को लेकर काफी सजग रहता है. यही वजह है कि बालकनी और छत पर गमलों में ऑर्गेनिक सब्जियां उगाने का काम अब लोगों के बीच तेजी से पाॅपुलर हो रहा है. अगर आपके पास जमीन नहीं है तब भी आपको परेशान होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है. 

आप अपने घर की खुली छत पर गमले में सेम की फली बहुत आसानी से उगा सकते हैं. प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और जरूरी मिनरल्स से भरपूर सेम की सब्जी स्वाद में जितनी लाजवाब होती है. इसका पौधा घर के गमले में तैयार करना उतना ही आसान है. सेम एक तेजी से फैलने वाली लता है. जिसकी सही देखभाल करने पर यह आपके किचन के लिए ताजी हरी फलियां देती रहती है. बस कुछ बातों को अपनाकर आप घर बैठे एकदम शुद्ध सब्जी प्राप्त कर सकते हैं.

ऐसे तैयार करें गमले की मिट्टी

सेम की फली एक बेल वाला पौधा है. जिसकी जड़ें तेजी से फैलती हैं. इसे लगाने के लिए 16 से 18 इंच गहरा और चौड़ा गमला सबसे बेहतरीन रहता है. गमले के निचले हिस्से में ड्रेनेज होल होना जरूरी है जिससे एक्सट्रा पानी आसानी से बाहर निकल सके. ड्रेनेज होल पर एक ठीकरा रख दें जिससे मिट्टी न बहे. गमले के लिए हल्की मिट्टी तैयार करें. 

इसके लिए 50 प्रतिशत बगीचे की मिट्टी, 30 प्रतिशत गोबर की सड़ी खाद और 20 प्रतिशत कोकोपीट का मिश्रण बनाएं. इसमें एक मुट्ठी नीम खली जरूर मिला दें जिससे जड़ों में फंगस का खतरा खत्म हो जाए. अब अच्छी किस्म के 3 बीज लेकर रात भर पानी में भिगो दें. इसके बाद गमले में 1 इंच गहराई पर बीज दबाकर हल्का पानी छिड़कें. लगभग 5 से 7 दिनों में बीज अंकुरित होकर बाहर आ जाएंगे. जब पौधे बड़े हों तब सिर्फ सबसे मजबूत पौधे को रखकर बाकी हटा दें.


गमले में उगाएं सेम की फली, घर बैठे पाएं ताजी सब्जी

इन चीजों का रखें सही इंतजाम

गमले में लगे सेम के पौधे को अच्छी बढ़त और ज्यादा फलियां देने के लिए रोजाना कम से कम 6 घंटे की सीधी धूप मिलनी चाहिए. इसलिए गमले को हमेशा बालकनी के सबसे धूप वाले हिस्से में रखें. सिंचाई करते समय हमेशा ध्यान रखें कि गमले की मिट्टी में नमी बनी रहे लेकिन कीचड़ न बने. जब पौधा 2 फीट लंबा हो जाए तब उसे तुरंत मजबूत बांस और सुतली की जाली का सहारा दें. 

सेम की बेल काफी वजनदार होती है इसलिए गमले के पास मजबूत मचान बनाकर उस पर बेल को फैलाएं. जब पौधा 4 फीट की ऊंचाई पर पहुंचे तब ऊपरी टहनी के ऊपरी सिरे को हल्का सा काट दें. इस पिंचिंग तकनीक से पौधे में ढेर सारी नई साइड शाखाएं फूटेंगी, जिन पर आगे चलकर बहुत से फूल और फलियां लगेंगी. 


गमले में उगाएं सेम की फली, घर बैठे पाएं ताजी सब्जी

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समय पर ताजी फलियों की तोड़ाई

जब पौधे में फूल खिलने लगें तब हर 15 दिन में गमले की मिट्टी की हल्की गुड़ाई करके दो मुट्ठी वर्मीकम्पोस्ट और थोड़ी सी लकड़ी की राख डालें. पोटाश और फास्फोरस का पोषण मिलने से फूल झड़ने की समस्या खत्म होती है और फलियां तेजी से बनती हैं. सेम की पत्तियों पर काले माहू और रस चूसने वाले कीटों से बचाव के लिए 5 मिलीलीटर नीम का तेल और 2 बूंद लिक्विड साबुन को 1 लीटर पानी में घोलकर 10 दिनों के अंतराल पर स्प्रे करें.

खट्टी छाछ का छिड़काव भी फंगस से बचाकर रखता है. बुवाई के तकरीबन 65 दिनों के भीतर सेम की हरी फलियां तोड़ने लायक हो जाती हैं. तैयार फलियों को रेगुलर तोड़ते रहें जिससे बेल पर लगातार नई फलियों आती रहें और पूरे सीजन आपके पूरे परिवार को घर की एकदम ताजी हरी सब्जी मिलती रहे.

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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