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मछली पालन शुरू करना हुआ आसान, सरकार दे रही लाखों की सब्सिडी, जानिए कौन उठा सकता है लाभ?

Fish Farming Subsidy: मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से कई तरह की मदद दी जा रही है. अगर आप इस काम की शुरुआत करने की सोच रहे हैं तो इस योजना के बारे में जान लें.

Subsidy On Fish Farming: अगर आप पारंपरिक खेती से हटकर कोई ऐसा बिजनेस तलाश रहे हैं जिसमें कम मेहनत में तगड़ी कमाई हो, तो मछली पालन आपके लिए सबसे बेस्ट ऑप्शन साबित हो सकता है. आजकल बाजार में मछली की डिमांड जिस तेजी से बढ़ रही है, उसे देखते हुए यह काम घाटे का सौदा तो बिल्कुल नहीं है. लेकिन अक्सर नए लोग बजट और पैसों की कमी की वजह से कदम पीछे खींच लेते हैं. 

आपकी इसी टेंशन को दूर करने के लिए सरकार प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) और राज्य स्तरीय स्कीमों के तहत तालाब बनाने से लेकर बीज और चारे तक पर लाखों रुपये की सब्सिडी दे रही है. आइए जानते हैं कि इस सरकारी योजना का फायदा कौन-कौन उठा सकता है और इसके लिए अप्लाई कैसे करना है.

किन लोगों को मिलेगी कितनी सब्सिडी?

मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए सरकार अलग-अलग वर्गों के हिसाब से बंपर छूट दे रही है. इस योजना के तहत सामान्य वर्ग के पुरुषों को प्रोजेक्ट कॉस्ट पर 40% तक की सब्सिडी मिलती है. वहीं अगर आप महिला हैं या SC/ST वर्ग या फिर अत्यंत पिछड़ा वर्ग से आते हैं. तो सरकार आपको 60% से लेकर 70% तक की भारी सब्सिडी दे रही है.

यानी अगर तालाब खुदवाने और मछली पालन शुरू करने में 10 लाख रुपये का खर्च आ रहा है. तो सरकार की तरफ से 6 लाख रुपये से 7 लाख रुपये तक की मदद सीधे अनुदान के रूप में मिल जाएगी. इसके लिए आपके पास अपनी ज़मीन होनी चाहिए या फिर लीज़ का पक्का कागज़ होना ज़रूरी है.

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कैसे करें आवेदन?

इस योजना का फायदा सिर्फ नया तालाब बनाने के लिए ही नहीं, बल्कि बायोफ्लॉक सिस्टम लगाने, हैचरी तैयार करने, मछली का दाना (फीड) खरीदने और नाव या जाल जैसी चीज़ों के लिए भी मिलता है. आवेदन करने के लिए आपको अपने जिले के मत्स्य पालन विभाग के दफ्तर में जाकर संपर्क करना होगा. इसके अलावा आप राज्य के मत्स्य पोर्टल या PMMSY की ऑफिशियल वेबसाइट पर ऑनलाइन फॉर्म भी भर सकते हैं. 

इन दस्तावेजों की होगी जरूरत

फॉर्म के साथ आधार कार्ड, बैंक पासबुक, ज़मीन के दस्तावेज़ और पासपोर्ट साइज फोटो लगाना होता है. अगर आपके पास थोड़ी सी ज़मीन और पानी की अच्छी व्यवस्था है, तो सरकारी मदद लेकर आप कम पूंजी में एक बेहतरीन और टिकाऊ बिजनेस खड़ा कर सकते हैं.

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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