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खेत की मेड़ पर मोरिंगा क्यों बो देते हैं किसान, कारण जान लेंगे तो आप भी अपनाएंगे ये तरीका

Moringa Farming Tips: आजकल किसान अपनी मुख्य फसल को बिना कोई नुकसान पहुंचाए खेत की मेड़ पर मोरिंगा यानी सहजन के पौधे लगाकर अच्छी कमाई कर रहे हैं. आप भी जानें तरीका.

Moringa Farming Tips: किसानों के आज के वक्त में खेती के जरिए अगर सही मुनाफा कमाना है. तो उन्हें नए-नए प्रयोग करने आने चाहिए. खेत में मुख्य फसल के अलावा किसान अब मेड़ पर फसल लगाकर भी एक्स्ट्रा कमाई कर सकते हैं. आप अपनी अपनी मुख्य फसल को नुकसान पहुंचाए बिना खेत की मेड़ पर मोरिंगा यानी सहजन के पौधे लगा सकते हैं. दरअसल मेड़ की खाली पड़ी जगह का इससे बेहतर इस्तेमाल हो ही नहीं सकता. 

मोरिंगा एक ऐसा पौधा है जिसके फल, फूल और पत्तियां सब कुछ बाजार में हाथों-हाथ बिक जाते हैं. स्वास्थय के प्रति जागरुक लोगों के बीच मोरिंगा की पत्तियों के पाउडर की डिमांड बहुत तेजी से बढ़ी है. बाजार में मोरिंगा की सूखी पत्तियों का पाउडर 1500 रुपये प्रति किलो तक के ऊंचे दामों पर बिक रहा है. ऐसे में खेती के इस तरीके को अपनाकर एक्स्ट्रा कमाई का यह बेहतरीन जरिया है.

खेत की मेड़ पर लगाएं मोरिंगा

खेत की मेड़ पर मोरिंगा लगाने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसके लिए किसानों को अलग से कोई जमीन नहीं छोड़नी पड़ती और न ही मुख्य फसल के लिए जो पैसे थे उसमें कोई इजाफा कमी करनी पड़ती है. मेड़ पर लगे ये पौधे बहुत ही कम पानी और बिना किसी खास रेख-देख के आसानी से बड़े हो जाते हैं. एक बार पौधा लगाने के बाद कुछ ही महीनों में इसकी पत्तियां और फलियां तैयार होने लगती हैं. 

यह भी पढ़ें: 11 रुपये का पौधा लगाकर हर साल लाखों कमा सकते हैं आप, इस किसान ने खुद लिखी अपनी किस्मत

ऐसे होती है कमाई

किसान इसकी हरी पत्तियों को तोड़कर उन्हें छांव में सुखाते हैं और फिर उसका बारीक पाउडर तैयार कर लेते हैं. आज के वक्त में मोरिंगा पाउडर को कंपनियां और सीधे ग्राहक बहुत महंगे रेट पर खरीदते हैं. इस तरह मेड़ की बेकार पड़ी जगह से किसानों को बिना किसी एक्सट्रा लागत के लाखों रुपये का मुनाफा मिल जाता है.

मोरिंगा के किसानों के लिए यह फायदे

मेड़ पर मोरिंगा के पेड़ लगाने से सिर्फ पैसा ही नहीं आते है. बल्कि यह खेत के लिए एक नेचुरल गार्ड की तरह भी काम करता है. मोरिंगा के घने पौधे तेज हवाओं को रोककर मुख्य फसल को सहारा देते हैं और खेत की मिट्टी को कटने से बचाते हैं. इसके साथ ही मोरिंगा की जड़ें मिट्टी को बांधकर रखती हैं और इसकी गिरी हुई पत्तियां खेत में ही सड़कर बेहतरीन ऑर्गेनिक खाद का काम करती हैं. 

जिससे जमीन की उपजाऊ शक्ति अपने आप बढ़ जाती है.आयुर्वेद में मोरिंगा को 300 से ज्यादा बीमारियों की काट माना गया है इसलिए इसके फूलों और पत्तियों के आसपास हानिकारक कीट-पतंगे नहीं फटकते. जिससे मुख्य फसल भी सुरक्षित रहती है.

यह भी पढ़ें: दुनिया का पहला किसान कौन था? उसने कौनसी फसल बोई थी, किस देश से था उसका ताल्लुक

About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

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