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खेत के बीच नहीं, किनारों पर भी होती है कमाई! जानिए मेड़ पर खेती से कितना मुनाफा?

Farming Tips: खेत की मेड़ पर सब्जियां, दालें या फलदार पेड़ लगाकर किसान एक्स्ट्रा कमाई कर सकते हैं. यह तकनीक किसानों की इनकम को डबल करने का सबसे बेस्ट और स्मार्ट जरिया है.

Farming Tips: अक्सर किसान भाई अपने पूरे खेत के बीच में ही फसल उगाने और मुनाफा कमाने की प्लानिंग करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके खेत के किनारे यानी मेड़ भी मोटी कमाई का जरिया बन सकते हैं? आज का मॉडर्न किसान सिर्फ एक मुख्य फसल के भरोसे नहीं बैठता, बल्कि वह खेत के चप्पे-चप्पे का इस्तेमाल करके अपनी इनकम को डबल करने का स्मार्ट तरीका जानता है.

मेड़ पर खेती करना कम लागत वाली तकनीक है जो आपकी बंजर पड़ी मेड़ों को हरे-भरे मुनाफे के सोर्स में बदल देती है. इस तरीके से खेत की सुरक्षा तो होती ही है lो साथ ही बिना किसी एक्स्ट्रा जमीन के किसान को एक एक्ट्रा बोनस इनकम मिल जाती है. तो जान लीजिए मेड़ पर खेती करने का पूरा गणित और इससे होने वाले बंपर फायदे.

मेड़ पर कौन सी फसलें उगाई जा सकती हैं?

खेत की मेड़ पर आप ऐसी फसलें उगा सकते हैं जिन्हें कम जगह और मुख्य फसल के साथ बिना किसी रुकावट के बढ़ने की आदत हो. एक्सपर्ट्स के मुताबिक मेड़ों पर आप अरहर जैसी दालें, भिंडी, बरबटी, लौकी, कद्दू और तोरई जैसी बेल वाली सब्जियां आसानी से लगा सकते हैं. इसके अलावा अगर आपकी मेड़ थोड़ी चौड़ी और मजबूत है तो आप पपीता, सहजन, नींबू या फिर कीमती लकड़ी वाले पेड़ जैसे सागवान और चंदन भी रोप सकते हैं.

क्या है इसका सही तरीका?

इन्हें उगाने के लिए आपको मुख्य खेत से अलग कोई खास मेहनत नहीं करनी पड़ती मुख्य फसल को मिलने वाले पानी और खाद से ही मेड़ के पौधों को भी पूरा पोषण मिल जाता है. जिससे आपकी लागत बिल्कुल जीरो आती है.

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मेड़ पर खेती से होने वाले फायदे 

मेड़ पर खेती करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह आपकी मुख्य फसल के लिए एक नेचुरल फेंसिंग यानी सुरक्षा कवच का काम करती है, जिससे तेज हवाओं और मिट्टी के कटाव से बचाव होता है. मुनाफे की बात करें तो जहां पहले मेड़ पर सिर्फ घास-फूस उगती थी, वहां अब सब्जियां और फल उगने से आपको हर हफ्ते मार्केट से तुरंत कैश रिटर्न मिलने लगता है.

होती रहती है एक्सट्रा इनकम

अगर आपने मेड़ पर सहजन या पपीता जैसे पौधे लगाए हैं तो सालभर में आपको मुख्य फसल के अलावा हजारों रुपये की एक्स्ट्रा इनकम होने लगती है. वहीं लकड़ी या फलदार पेड़ लंबे समय में आपको एक बड़ा फिक्स्ड डिपॉजिट जैसा तगड़ा रिटर्न देते हैं जो आपकी कुल खेती की प्रॉफिटेबिलिटी को कई गुना बढ़ा देता है.

यह भी पढ़ें: पपीते की खेती से होगी छप्परफाड़ कमाई, सही समय पर अपनाएं यह खास तरीका और हो जाएं मालामाल

About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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