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ब्रसेल्स स्प्राउट की खेती बना देगी किसानों को अमीर, जान लें क्या करना होगा

ब्रसेल्स स्प्राउट की खेती कर किसान भाई साल में कई गुना मुनाफा कमा सकते हैं और यह फसल उन्हें मालामाल कर सकती है. आइए जानते हैं कैसे की जाती है इस सब्जी की खेती.

Agriculture News: ब्रसेल्स स्प्राउट्स ठंडी सब्जियों में से एक है जो कि जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और महाराष्ट्र के पहाड़ी इलाकों में उगाई जाती है. ब्रसेल्स स्प्राउट ज्यादातर अमेरिका और यूरोप में उगाई जाती है. यह सब्जी पत्तियों की धुरी पर उगती है और इसका उपयोग खाना पकाने और सलाद के रूप में किया जाता है. ब्रसेल्स स्प्राउट की खेती कर किसान भाई साल में कई गुना मुनाफा कमा सकते हैं और यह फसल उन्हें मालामाल कर सकती है. आइए जानते हैं कैसे की जाती है इस सब्जी की खेती.

इतना तापमान रहेगा सही

ब्रसेल्स स्प्राउट ठंडी और गिली जलवायु में सबसे ज्यादा उपज देती है. इसे बोने के लिए 15 से 25 डिग्री सेल्सियस तापमान सबसे बढ़िया होता है. इसे पकने के लिए काफी लंबे समय की जरुरत होती है. ज्यादा अच्छी फसल के लिए इसका तापमान 1 से 20 डिग्री सेल्सियस रखने की आवश्यकता है. यह फसल अधिक तापमान में अच्छी उपज नहीं दे पाती. ब्रसेल्स स्प्राउट को अलग अलग तरह की मिट्टी पर उगाया जा सकता है. लेकिन रेतीली दोमट मिट्टी इसके लिए सबसे अच्छी मानी जाती है. ब्रसेल्स स्प्राउट को 500 ग्राम की दर से बोया जाना चाहिए. इसके बीज को 2 सेमी की दूरी पर बोने से अच्छे परिणाम मिलने की उम्मीद होती है. इसे मुख्यत: फरवरी और मार्च में बोया जाता है, अप्रैल मई जून में इसकी फसल आना शुरू हो जाती है. अगस्त से लेकर मार्च कर इसकी कटाई करके दोबारा इसे बो सकते हैं. 

ऐसे होगी बंपर कमाई

आज के दौर में किसान भाई ज्यादा लाभ पाने के लिए अपने खेत में कई सारी फसलें एक साथ लगाते हैं. लेकिन ब्रसेल्स स्प्राउट से किसान भाई कई गुना ज्यादा लाभ ले सकते हैं. यह फसल किसानों के लिए नकदी मानी जाती है. यह फसल मार्केट में 600 से 700 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिकती है. इस फसल की कटाई अगस्त से शुरू होती है जो कि मार्च तक की जा सकती है. कम जगह पर यह फसल ज्यादा उपज देती है, जिसके कारण किसानों को इससे मोटा मुनाफा मिलता है.

यह भी पढ़ें: अरहर की खेती करने के लिए मिल रही तगड़ी सब्सिडी, जान लें क्या है प्लान

शेख इंजमाम उल हक

हजरत शेख इंजमाम को पत्रकारिता में 2 साल से ज्यादा का अनुभव है. भारत की शाही संस्कृति और गौरवशाली इतिहास के गवाह राजस्थान से उनका संबंध है. भारत की शिक्षा नगरी के तौर पर मशहूर कोटा उनकी कर्मभूमि है, जहां हर साल हजारों युवक बड़े-बड़े सपने लेकर, आईआईटी–जेईई और नीट की तैयारी के लिए इस शहर को अपना बसेरा बनाते हैं, लेकिन इंजमाम को इस शहर का ये माहौल रास नहीं आया और उन्होंने डॉक्टर, इंजीनियर बनने के बजाए पत्रकार बनने का फैसला किया. हालांकि, कोटा से 72 किमी दूर एक छोटे से गांव सीसवाली में जन्म लेने वाले इंजमाम ने इंटरमीडियट तक की पढ़ाई इसी शहर से की.

बचपन से हिंदी में रुचि और लगाव उन्हें पत्रकारिता के लिए दिल्ली खींच लाया. जहां उन्होंने पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री ली. उन्होंने जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी साहित्य में MA और एम.फिल. की डिग्री भी हासिल की.

इंडिया न्यूज़ और विकिपीडिया के लिए कार्य करने के बाद इंजमाम एबीपी लाइव से बतौर ट्रेनी जुड़े और अब प्रमोट होकर बतौर कॉपी एडिटर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं.

शेख इंजमाम का हिंदी और उर्दू से खासा लगाव है और दोनों भाषाओं में शौकिया शायरी भी करते हैं. उन्होंने कई कविताएं रची हैं और अनेक साहित्यिक लेखों का सृजन किया है. साहित्य की एक अन्य विधा व्यंग्य भी उनका पसंदीदा विषय है.

ट्रेंडिंग और राजनीति उनकी पसंदीदा बीट है. राजनीतिक खबरों पर पैनी नजर की वजह से वो रोजाना के ट्रेंड और सोशल मीडिया पर पनपने वाले विचारों की बखूबी समझ रखते हैं.

शेख इंजमाम को घूमना पसंद है और उन्होंने भारत के कई शहरों और देहात का सफर किया है और वहां के रीति रिवाज, रहन सहन और सामाजिक ताने बाने को खूब समझते हैं.

इंजमाम को फिल्में देखने और गाने सुनने का भी शौक है. अमरीश पुरी और सलमान खान को वह अपने पसंदीदा अभिनेताओं में शुमार करते हैं. सूफी और क्लासिकल म्यूजिक भी उन्हें रुहानी सुकून देता है. उन्हें फिल्मी अभिनेताओं, कलाकारों और नेताओं के इंटरव्यू देखने का भी शौक है.

भाषा पर मजबूत पकड़ और लेखन की विभिन्न शैली में गहरी समझ रखने की वजह से वो खूबसूरत अंदाज़ में बड़ी आसानी से खबरों को पेश करने में सफल रहते हैं.

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