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अपने फार्म हाउस पर ऐसे करें अरबी की खेती

Arbi Cultivation In Farmhouse: फार्म हाउस की खाली जमीन से बेहतरीन मुनाफा कमाने के लिए अरबी की खेती बढ़िया ऑप्शन है. सही मिट्टी, उन्नत बीजों और मॉडर्न तकनीकों से आप भी बंपर पैदावार ले सकते हैं.

Arbi Cultivation In Farmhouse: खेत में पारंपरिक फसलों की जगह कुछ उगाना चाहते हैं और आपके फार्म हाउस भी है. तो उसकी खाली जमीन का इस्तेमाल करके कम लागत में ज्यादा मुनाफे वाली फसल उगा लीजिए. इसके लिए अरबी सबसे बढ़िया ऑप्शन है. यह बहुत ही कम रिस्क में शानदार मुनाफा देने वाली फसल है.

भारतीय मंडियों और लोकल मार्केट्स में अरबी के कंद के साथ-साथ इसके पत्तों की भी साल भर काफी तगड़ी डिमांड बनी रहती है. अगर आपके पास फार्म हाउस में सिंचाई की सही सुविधा और उपजाऊ जमीन है. तो आप अपने फार्म हाउस पर अरबी उगा सकते हैं. जान लीजिए बुवाई से लेकर हार्वेस्टिंग तक की पूरी प्रक्रिया के बारे में.

इस तरह करें खेत की तैयारी 

अरबी की खेती में अच्छी पैदावार के लिए सही मिट्टी जरूरी होती है. अरबी के कंदों की सही ग्रोथ के लिए बलुई दोमटमिट्टी सबसे बेस्ट मानी जाती है. इस मिट्टी की खासियत यह होती है कि यह हल्की होती है और इसमें पानी निकलने की बहुत अच्छी व्यवस्था रहती है.

बुवाई से पहले खेत की अच्छे से 2 से 3 बार गहरी जुताई कर लें जिससे कि मिट्टी पूरी तरह भुरभुरी और हवादार हो जाए. मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के लिए प्रति एकड़ 8 से 10 टन अच्छी तरह सड़ चुकी गोबर की खाद या वर्मीकंपोस्ट जरूर मिलाएं. अगर आपकी मिट्टी में न्यूट्रिएंट्स की कमी है. तो फिर ऑर्गेनिक बायो-फर्टिलाइजर्स का इस्तेमाल किया जा सकता है. 

उन्नत किस्मों और स्वस्थ बीजों का चुनाव

अगर आप अपने फार्म हाउस से बढ़िया पैदावाप चाहते हैं. तो पारंपरिक बीजों की जगह अरबी की उन्नत किस्मों का ही चुनाव करें. अरबी की बढ़़िया प्रजातियों में इंदिरा अरबी-1, पंजाब अरबी-1, पंथ अरबी-1 और श्री पल्लवी जैसी किस्में काफी पाॅपुलर हैं. यह किस्में कम समय में ज्यादा पैदावार देती हैं और बीमारियों के प्रति प्रतिरोधी होती हैं.बीज के रूप में हमेशा रोगमुक्त, मध्यम आकार की और अंकुरित गांठों का ही इस्तेमाल करें जिन पर छोटे-छोटे बड्स साफ दिखाई दे रहे हों.

बुवाई करते समय गांठों को मिट्टी में लगभग 2 से 3 इंच की गहराई पर रोपना चाहिए. ध्यान रखें कि एक पौधे से दूसरे पौधे के बीच 1 से 1.5 फीट और लाइन से लाइन के बीच 1.5 से 2 फीट का अंतर जरूर रखें. यह प्रॉपर स्पेसिंग पौधों को सूर्य का प्रकाश और पोषण सही मात्रा में लेने में मदद करती है.

सिंचाई और न्यूट्रिशन का बैलेंस जरूरी

अरबी की फसल को बहुत ज्यादा तामझाम की जरूरत नहीं होती. लेकिन सही समय पर सही नमी देना इसके लिए बेहद जरूरी है. बुवाई के तुरंत बाद एक हल्की सिंचाई करें जिससे गांठें मिट्टी में अच्छी तरह सेट हो जाएं. गर्मियों के मौसम में हर 6 से 8 दिन के अंतराल पर सिंचाई करें. जबकि बारिश के दिनों में केवल नमी के हिसाब से ही पानी दें. ध्यान रखें कि खेत में कभी भी पानी रुकना नहीं चाहिए वरना कंद सड़ने का खतरा बढ़ जाता है.

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क्रॉप प्रोटेक्शन का रखें ध्यान

पौधों की ग्रोथ को तेज करने के लिए बुवाई के 40 से 45 दिन बाद पौधों की जड़ों पर मिट्टी चढ़ाने का काम जरूर करें. इससे कंदों को सीधी धूप नहीं लगती और वह बड़े साइज में ग्रो होते हैं. कीटों और फंगल इन्फेक्शन से फसल को सुरक्षित रखने के लिए हर 15-20 दिनों में नीम के तेल का ऑर्गेनिक स्प्रे करते रहें. इससे आपकी फसल केमिकल-फ्री भी रहेगी और उसकी क्वालिटी भी टॉप क्लास बनी रहेगी.

ऐसे करें हार्वेस्टिंग 

अरबी की फसल आमतौर पर बुवाई के 5 से 6 महीने यानी लगभग 140 से 160 दिन के भीतर खुदाई के लिए तैयार हो जाती है. जब पौधों के बड़े-बड़े पत्ते धीरे-धीरे पीले पड़कर सूखने लगें, तो समझ जाएं कि जमीन के नीचे अरबी के कंद पूरी तरह पक चुके हैं. 

खुदाई करने से लगभग 10-12 दिन पहले खेत में पानी देना बंद कर दें जिससे कंदों के साथ मिट्टी ज्यादा न चिपके. इसके बाद बहुत सावधानी से कुदाल या ट्रैक्टर-ड्रॉन डिगर की मदद से कंदों को बाहर निकालें और उन्हें छायादार जगह पर सुखा लें. 

इतना होगा मुनाफा

अपने फार्म हाउस से निकाली गई इस फ्रेश और केमिकल-फ्री अरबी को आप सीधे लोकल होलसेल मार्केट्स, एग्री-स्टार्टअप्स या प्रीमियम ऑर्गेनिक स्टोर्स में अच्छे दामों पर बेच सकते हैं. कंद के साथ-साथ आप इसके हरे पत्तों की बिक्री करके भी एक्स्ट्रा इनकम हासिल कर सकते हैं. इसकी खेती से आप 1 एकड़ से 120 से 150 क्विंटल तक की शानदार पैदावार ले सकते हैं. जिससे आपको कम लागत में एक बेहतरीन प्रॉफिट मार्जिन मिलता है.

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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