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घर की बालकनी में आती है धूप, तो उगा सकते हैं चौलाई साग

आप अगर बाजार की केमिकल वाली सब्जियों से परेशान हैं. तो फिर घर पर ही महज 25 दिनों में सुपर हेल्दी साग उगा सकते हैं. जिससे बिना बाहर जाए लगातार मिलेगी ताजी सब्जी. जान लें पूरी खबर.

आजकल शहरों में केमिकल फ्री और ऑर्गेनिक हरी सब्जियां हासिल कर पाना एक बहुत मुश्किल काम बन गया है.  बाजार से आने वाली तमाम सब्जियों में पेस्टिसाइड्स का खतरा हमेशा बना रहता है. लेकिन वहीं अगर आपके फ्लैट या घर की बालकनी में दिन की 4 से 5 घंटे की अच्छी धूप आती है. तो आप अपने घर पर ही बेहद आसानी से हरी सब्जियां उगा सकते हैं. इसमे चौलाई साग यानी Amaranth Leaves भी उगा सकते हैं. 

चौलाई एक ऐसा देसी और सेहत से भरपूर साग है. जिसे उगने के लिए न तो किसी बड़े खेत की जरूरत होती है और न ही बहुत ज्यादा मेहनत की. यह आयरन, कैल्शियम, विटामिन ए और फाइबर का पावरहाउस माना जाता है. जो बच्चों से लेकर बड़ों तक की इम्यूनिटी को मजबूत रखता है. इसे किसी भी मौसम में छोटे गमलों में बहुत तेजी से उगाया जा सकता है. महज 20 से 25 दिनों में इसकी पहली कटाई शुरू हो जाती है. जानें कैसे इसे उगा सकते हैं.

ऐसे तैयार करें बालकनी का सेटअप

चौलाई साग की जड़ें बहुत ज्यादा गहरी नहीं जातीं इसलिए इसके लिए गहरे गमले की जगह चौड़े और उथले कंटेनर सबसे बेस्ट रहते हैं. आप 6 से 8 इंच गहराई वाले रेक्टेंगुलर गमला इस्तेमाल कर सकते हैं. अगर किचन में कोई पुरानी प्लास्टिक क्रेट्स है तो उनका भी इस्तेमाल कर सकते हैं. गमला ले रहे हैं तो उसके नीचे ड्रेनेज होल यानी पानी निकलने का छेद होना बेहद जरूरी है. 

मिट्टी तैयार करते समय 50 फीसदी सामान्य बगीचे की मिट्टी, 30 फीसदी गोबर की पुरानी सड़ी खाद और 20 फीसदी रेत मिलाएं. यह मिक्सचर मिट्टी को भुरभुरा और हल्का बनाए रखता है. जिससे बीजों का अंकुरण बहुत तेजी से होता है. गमले में मिट्टी भरने के बाद ऊपर से 1 इंच जगह खाली छोड़ दें जिससे पानी देने में आसानी रहे. अब आपका बालकनी गार्डन बीज बोने के लिए पूरी तरह रेडी है.


घर की बालकनी में आती है धूप, तो उगा सकते हैं चौलाई साग

बीज बोने का आसान तरीका 

चौलाई के बीज बहुत छोटे और बारीक होते हैं. इसलिए इन्हें बोते वक्त थोड़ी सावधानी बरतनी चाहिए. बीजों को समान रूप से बिखेरने के लिए आप उन्हें थोड़ी सी सूखी रेत के साथ मिला सकते हैं. इसके बाद गमले की मिट्टी पर बीजों को हल्के हाथ से स्प्रिंकल कर दें और ऊपर से आधी इंच भुरभुरी मिट्टी की पतली परत से ढक दें. कभी भी बीजों को ज्यादा गहराई में न दबाएं वरना वे सड़ सकते हैं. 

बीज बोने के तुरंत बाद स्प्रे बॉटल से हल्का पानी दें जिससे मिट्टी में सिर्फ नमी बने, कीचड़ न हो. चौलाई को अच्छी ग्रोथ के लिए रोजाना 4 से 6 घंटे की डायरेक्ट धूप चाहिए होती है. इसलिए गमले को बालकनी के सबसे चमकदार कोने में रखें. जब गमले की ऊपरी मिट्टी हल्की सूखी दिखने लगे तभी पानी दें. 

यह भी पढ़ें: एथेनॉल से किस राज्य के किसानों को मिल रहा है सबसे ज्यादा फायदा? जानें डिटेल्स

25 दिन बाद ऐसे काटें साग

बीज बोने के महज 3 से 5 दिनों के भीतर छोटे-छोटे हरे और लाल अंकुर मिट्टी से बाहर निकलने लगते हैं. चौलाई साग की सबसे बड़ी खासियत इसकी सुपर फास्ट ग्रोथ है. 15 दिनों में पौधे 5 से 6 इंच लंबे हो जाते हैं और 25 से 30 दिनों के भीतर यह आपकी थाली में जाने के लिए पूरी तरह तैयार हो जाता है. साग तोड़ते समय कभी भी पूरे पौधे को जड़ से न उखाड़ें. 


घर की बालकनी में आती है धूप, तो उगा सकते हैं चौलाई साग

किसी तेज कैंची या फिर पैने चाकू की मदद से पौधे के ऊपरी हिस्से यानी पत्तियों और तनों को ऊपर से 2 इंच छोड़कर काट लें. ऐसा करने से नीचे से नई-नई शाखाएं फूटने लगेंगी और आप एक ही पौधे से 4 से 5 बार ताजी पत्तियां तोड़ सकेंगे. हर बार कटाई के बाद थोड़ी सी गोबर खाद डालने से अगली पत्तियां  घनी निकलती है.

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

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