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क्या घर पर भी उगा सकते हैं अल्फांसो, जानें इसके लिए क्या-क्या जरूरी?

Alphonso Mango at Home: घर पर अल्फांसो आम उगाना अब बेहद आसान है. सही साइज का गमला की मदद से आप अपनी छत या बालकनी में ही इस प्रीमियम आम का शानदार पौधा आसानी से तैयार कर सकते हैं.

Alphonso Mango at Home: फलों के राजा आम की बात हो और उसमें अल्फांसो का नाम न आए, ऐसा तो हो ही नहीं सकता. अपनी खास खुशबू, बेहतरीन स्वाद और शानदार टेक्सचर के लिए दुनिया भर में मशहूर अल्फांसो आम को अब तक सिर्फ बड़े-बड़े बगीचों की शान माना जाता था. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आजकल की मॉडर्न गार्डनिंग तकनीकों की मदद से आप इस प्रीमियम आम को अपने घर की छत, बालकनी या बैकयार्ड में भी बेहद आसानी से उगा सकते हैं?

होम गार्डनिंग का शौक रखने वालों के लिए यह किसी बड़े सरप्राइज से कम नहीं है. घर पर अल्फांसो का पौधा लगाना न सिर्फ आपके घर की खूबसूरती को बढ़ाएगा. बल्कि आपको अपने हाथों से उगाए गए एकदम फ्रेश और ऑर्गेनिक आम खाने का मौका भी देगा. बस इसके लिए आपको कुछ जरूरी बातों और सही तरीकों का पता होना चाहिए ताकि आपका पौधा घर के माहौल में भी तेजी से फल-फूल सके.

घर पर पौधा लगाने का सही तरीका 

घर पर अल्फांसो उगाने के लिए सबसे पहला और जरूरी कदम है एक सही और हाइब्रिड ग्राफ्टेड पौधे का चुनाव करना जो कम ऊंचाई में भी फल देने की क्षमता रखता हो. चूंकि यह पेड़ काफी बड़ा हो सकता है. इसलिए इसे लगाने के लिए आपको कम से कम 20 से 24 इंच का बड़ा गमला या ड्रम इस्तेमाल करना चाहिए. जिसमें जल निकासी के लिए अच्छे छेद बने हों. 

ऐसे तैयार करें मिट्टी

मिट्टी तैयार करते समय 50% सामान्य बगीचे की मिट्टी के साथ 30% वर्मीकंपोस्ट या गोबर की खाद और 20% रेत व कोकोपीट मिलाएं जिससे मिट्टी एकदम भुरभुरी और पोषक तत्वों से भरपूर रहे. अल्फांसो के पौधे को फलने-फूलने के लिए रोजाना कम से कम 6 से 8 घंटे की अच्छी और सीधी धूप मिलना बेहद जरूरी है. इसलिए गमले को घर की सबसे धूप वाली जगह पर ही सेट करें.

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पौधे की सही देखरेख 

गमले में लगे अल्फांसो के पौधे को जमीन के मुकाबले थोड़े ज्यादा अटेंशन और केयर की जरूरत होती है. इसमें पानी हमेशा तभी दें जब मिट्टी की ऊपरी सतह सूखी नजर आए. क्योंकि ज्यादा पानी देने से इसकी जड़ें सड़ सकती हैं और पत्तियां पीली होकर गिर सकती हैं. पौधे को न्यूट्रिशन देने के लिए हर दो से तीन महीने में ऑर्गेनिक खाद, सीवीड एक्सट्रैक्ट या बोनमील का इस्तेमाल करें खासकर जब पौधे में बौर यानी फूल आने का सीजन हो. 

इन बातों का रखें ध्यान

पेड़ को गमले के हिसाब से सही शेप में रखने और इसकी नई ब्रांचेस को बढ़ावा देने के लिए समय-समय पर प्रूनिंग यानी हल्की छंटाई करना बहुत जरूरी है. शुरुआत के एक-दो साल इंतजार करें और जैसे ही पौधा मैच्योर होगा आपकी बालकनी या छत पर ही रसीले अल्फांसो आम लटकते नजर आएंगे जो आपकी मेहनत को पूरी तरह वसूल कर देंगे.

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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