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खेती से जुड़ा बिजनेस शुरू करने के लिए मिलेगा सस्ता लोन, इस सरकारी स्कीम में भारी छूट

Agriculture Infrastructure Fund: एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड के जरिए किसान अब खेती को बड़े बिजनेस में बदल सकते हैं. सरकार 2 करोड़ तक के लोन पर ब्याज में 3% की छूट और क्रेडिट गारंटी दे रही है.

Agriculture Infrastructure Fund: खेती-किसानी को अब सिर्फ फसल उगाने तक सीमित रखना समझदारी नहीं है. बल्कि इसे एक फायदे के बिजनेस में बदलना समय की मांग है. अक्सर किसान भाई इस बात से परेशान रहते हैं कि फसल तैयार होने के बाद उसे सुरक्षित कहां रखें या उसकी प्रोसेसिंग कैसे करें जिससे बेहतर दाम मिल सकें. इसी समस्या को दूर करने के लिए केंद्र सरकार एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (AIF) लेकर आई है.

यह स्कीम उन किसानों और युवाओं के लिए एक सुनहरा मौका है. जो खेती से जुड़ा अपना खुद का स्टार्टअप या बिजनेस शुरू करना चाहते हैं. इस योजना के तहत कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउस और प्रोसेसिंग यूनिट जैसी सुविधाएं खड़ी करने के लिए बैंकों से बहुत ही सस्ता और आसान लोन मिल रहा है. सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि इस कर्ज के ब्याज का एक बड़ा हिस्सा सरकार खुद उठाती है. जान लीजिए कैसे ले सकते हैं इस स्कीम का फायदा.

इस स्कीम में 2 करोड़ तक का लोन

इस स्कीम की सबसे खास बात यह है कि इसमें आपको मिलने वाले लोन पर ब्याज की बहुत बड़ी बचत होती है. सरकार 2 करोड़ रुपये तक के लोन पर सालाना 3% की ब्याज छूट (Interest Subvention) देती है. जो अधिकतम 7 सालों तक मिलती है. इसका मतलब है कि आपको बाजार की सामान्य दरों से काफी कम ब्याज चुकाना होगा.

इसके अलावा. लोन लेने के लिए आपको अपनी जमीन या कोई बड़ी प्रॉपर्टी गिरवी रखने की टेंशन भी कम होगी. क्योंकि 2 करोड़ रुपये तक के कर्ज के लिए सरकार खुद क्रेडिट गारंटी. देती है. यह उन छोटे किसानों के लिए बहुत बड़ी राहत है जिनके पास बैंक को देने के लिए कोई गारंटी नहीं होती.

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इन कामों के लिए मिलती है मदद

एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड का मुख्य उद्देश्य गांवों में खेती से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना है. इस फंड की मदद से आप अपने गांव या इलाके में अनाज गोदाम, कोल्ड स्टोरेज, छंटाई और ग्रेडिंग यूनिट, या फिर ई-मार्केटिंग प्लेटफॉर्म जैसा कोई भी प्रोजेक्ट शुरू कर सकते हैं. जब आपके पास अपनी फसल को सुरक्षित रखने की जगह होगी. तो आपको उसे मजबूरी में सस्ते दामों पर नहीं बेचना पड़ेगा. आप सही समय का इंतजार कर सकते हैं और जब बाजार में कीमतें अच्छी हों. तब अपनी उपज बेचकर तगड़ा मुनाफा कमा सकते हैं. 

क्या है योजना में आवेदन का तरीका?

एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड में लाभ उठाने के लिए क्या करना होगा. क्या तय की गईं हैं इसके लिए पात्रताएं, आवेदन से जुड़ी पूरी जानकारी नीचे दी गई है.

  • इस योजना का दायरा काफी बड़ा है. जिसमें व्यक्तिगत किसानों के साथ-साथ प्राथमिक कृषि ऋण समितियां (PACS) भी शामिल हो सकती हैं.
  • किसान उत्पादक संगठन (FPO), स्वयं सहायता समूह (SHG) और खेती से जुड़े नए स्टार्टअप भी इस फंड का पूरा फायदा उठा सकते हैं.
  • आवेदन की प्रक्रिया को सरकार ने काफी सरल और पारदर्शी रखा है. जिससे सही और पात्र लोगों को बिना किसी रुकावट के मदद मिल सके.
  • आवेदन के लिए एक समर्पित ऑनलाइन पोर्टल तैयार किया गया है. जहां आप अपने प्रोजेक्ट की पूरी जानकारी देकर सीधे लोन के लिए अप्लाई कर सकते हैं.
  • एक बार प्रोजेक्ट को मंजूरी मिलने के बाद आप न केवल अपना बिजनेस शुरू कर पाएंगे. बल्कि अपने क्षेत्र के दूसरे किसानों के लिए भी रोजगार और सुविधाओं के नए रास्ते खोल सकेंगे.

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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