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सुनो कहानीः कफन | मुंशी प्रेमचंद
सुनो कहानी, एबीपी गंगा की एक ऐसी सीरीज है, जिसके तहत प्रसिद्ध साहित्यकारों की बड़ी और प्रसिद्ध कहानियों को अब आप सुन सकते हैं। आज इस सीरीज में आज कहानी है, मुंशी प्रेमचंद की 'कफन'।
पढ़ें कहानी का एक अंशः- झोपड़े के द्वार पर बाप और बेटा दोनों एक बुझे हुए अलाव के सामने चुपचाप बैठे हुए हैं और अन्दर बेटे की जवान बीबी बुधिया प्रसव-वेदना में पछाड़ खा रही थी। रह-रहकर उसके मुँह से ऐसी दिल हिला देने वाली आवाज़ निकलती थी, कि दोनों कलेजा थाम लेते थे। जाड़ों की रात थी, प्रकृति सन्नाटे में डूबी हुई, सारा गाँव अन्धकार में लय हो गया था।
पढ़ें कहानी का एक अंशः- झोपड़े के द्वार पर बाप और बेटा दोनों एक बुझे हुए अलाव के सामने चुपचाप बैठे हुए हैं और अन्दर बेटे की जवान बीबी बुधिया प्रसव-वेदना में पछाड़ खा रही थी। रह-रहकर उसके मुँह से ऐसी दिल हिला देने वाली आवाज़ निकलती थी, कि दोनों कलेजा थाम लेते थे। जाड़ों की रात थी, प्रकृति सन्नाटे में डूबी हुई, सारा गाँव अन्धकार में लय हो गया था।
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