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Kanwar Yatra Controversy: 'पहचान' पर घमासान, 'यशवीर' जैसे स्वयंभू नेताओं पर सवाल!
कांवड़ यात्रा के दौरान पहचान उजागर करने और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। एक पूर्व पुलिस अधिकारी ने बताया कि दस साल पहले कांवड़ यात्रा शांतिपूर्ण ढंग से होती थी और तब पहचान छिपाने या 'थूक जिहाद' जैसे मुद्दे नहीं थे। उन्होंने कहा कि पुलिसिंग का मतलब चप्पे-चप्पे की जानकारी रखना है और स्थानीय खुफिया इकाई (LIU) को हर दुकान और व्यक्ति की जानकारी होती है। ऐसे में पहचान उजागर करने की बात अनावश्यक है। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप और दिशा-निर्देशों का पालन न होने पर भी चिंता जताई गई। यह भी कहा गया कि कानून का इस्तेमाल मनमाने तरीके से किया जा रहा है। मुजफ्फरनगर में एक स्वयंभू नेता यशवीर द्वारा 5000 लोगों को अपने अभियान में जोड़ने और पुलिस द्वारा 6 लोगों को नोटिस दिए जाने के बाद आंदोलन की धमकी देने का मामला भी सामने आया है। इस पर टिप्पणी करते हुए कहा गया कि ऐसे स्वयंभू लोगों का स्थान सलाखों के पीछे है और उन पर जल्द कार्रवाई होनी चाहिए। पुलिस द्वारा कांवड़ यात्रियों पर पुष्प वर्षा करने और नमाज़ अदा करने वालों पर कार्रवाई करने के 'दोहरे मापदंड' पर भी गंभीर सवाल उठाए गए। इस पर जोर दिया गया कि 'कानून के सामने सब बराबर है'। यह भी कहा गया कि अगर किसी को कोई व्यवधान नहीं हो रहा है, तो नमाज़ या कांवड़ यात्रा दोनों में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए, लेकिन पुलिस का दोहरा रवैया बिल्कुल अस्वीकार्य है।
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