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Kanwar Yatra Controversy: UP में बवाल, पहचान और रूट पर संग्राम!
कांवड़ यात्रा को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है. यह सवाल उठ रहा है कि कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर उठकर धर्म का ठेकेदार कैसे बन सकता है? साथ ही यह भी पूछा जा रहा है कि आखिर किसी को अपना धर्म छिपाने की जरूरत क्यों है? कांवड़ यात्रा बिहार से लेकर मध्य प्रदेश तक होती है, लेकिन उत्तर प्रदेश में ही इस पर बार-बार बवाल होता है. हर बार विवाद यहीं से शुरू होता है. डाक बम कांवड़िए सुल्तान गंज से जल लेकर देव घर में बाबा धाम तक जाते हैं और इस यात्रा को 24 घंटे से कम वक्त में पूरा करने की कोशिश करते हैं. बिहार में यात्रा के रूट पर दूसरे धर्म के लोग भी हैं, लेकिन वहां उत्तर प्रदेश जैसा बवाल नहीं होता. इस सवाल का जवाब यात्रा का रूट बताया जा रहा है. कांवड़ यात्रा का सबसे बड़ा रूट पश्चिमी उत्तर प्रदेश से होकर गुजरता है, जिसमें मेरठ, मुज़फ्फरनगर, सहारनपुर जैसे संवेदनशील जिले आते हैं. यह भी सवाल उठाया गया है कि सरकारों ने कांवड़ियों के लिए कोई ऐसा रूट क्यों नहीं बनाया, जहां वे अपनी धार्मिक यात्राएं स्वच्छता और पवित्रता के साथ कर सकें. विपक्ष का कहना है कि अगर नेम प्लेट लगाने के लिए मजबूर किया जाएगा तो यह सांप्रदायिक सौहार्द के खिलाफ होगा. पिछले कुछ समय में हिंदू कार्यक्रमों में थूकने के कई वीडियो वायरल हो चुके हैं, और थूकने वाले विशेष धर्म से जुड़े रहे हैं, जिसको लेकर न सिर्फ विवाद हुआ बल्कि राजनीति भी हुई. यह पहचान पर घमासान का नया संग्राम है.
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