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प्याज की बढ़ती कीमतों को काबू करने में सरकार नाकाम, खड़े किए हाथ, जनता परेशान
पिछले एक महीने से नेता वोट की फसल काटने में व्यस्त हैं, महाराष्ट्र में सरकार के लिए हर हद को पार करने की कोशिश हो रही है. मुंबई से दिल्ली तक तूफान मचा, जमकर होटलबाजी हो रही है, पानी की तरह पैसे बहाए जा रहे हैं लेकिन आपकी, हमारी सुध लेने वाला कोई नहीं. पिछले डेढ़ महीने से जनता प्याज के आंसू रो रही है. प्याज के दाम 100 किलो रुपये के पार पहुंच चुका है, लेकिन जिस मंत्री के ऊपर प्याज की महंगाई को काबू करने की जिम्मेदारी है वो कह रहे हैं उनके हाथ में कुछ नहीं है. प्याज की महंगाई के लिए प्रकृति को दोषी ठहराया जा रहा है. सवाल ये है कि अगर पासवान के हाथ में कुछ नहीं तो वो मंत्री किस बात के?
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