US-Iran Peace Deal: पेट्रोल -डीजल के साथ क्या-क्या सस्ता होने वाला है? आम आदमी की चांदी! |ABPLIVE
सोचिये . आप सुबह उठें और पता चले कि पेट्रोल कुछ सस्ता हो गया है... गैस सिलेंडर के दाम बढ़ने का डर कम हो गया है... हवाई टिकट पहले से सस्ते मिल रहे हैं... और धीरे-धीरे सब्जियों से लेकर साबुन, डिटर्जेंट और रोजमर्रा के कई सामानों की कीमतों पर भी दबाव कम होने लगा है... सुनने में अच्छा लगता है ना... लेकिन हैरानी की बात ये है... कि इसका कनेक्शन आपके शहर या आपके राज्य से नहीं... बल्कि हजारों किलोमीटर दूर अमेरिका और ईरान के बीच होने वाले एक संभावित समझौते से जुड़ा हुआ है... पिछले करीब साढ़े तीन महीनों से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और लड़ाई ने... पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया था... तेल बाजार में उथल-पुथल मची हुई थी... शिपिंग महंगी हो गई थी... और दुनिया भर के देशों को इसका असर झेलना पड़ रहा था... भारत भी इससे अछूता नहीं रहा... क्योंकि भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है... जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होता है... तो उसका असर सीधे हमारे पेट्रोल-डीजल, गैस सिलेंडर और महंगाई पर पड़ता है... लेकिन अब हालात बदलते दिखाई दे रहे हैं... 19 जून को अमेरिका और ईरान के बीच एक बड़े समझौते पर मुहर लग सकती है... अगर ऐसा होता है और यह समझौता लंबे समय तक टिकता है... तो भारत को इससे बड़ा आर्थिक फायदा मिल सकता है... अब सवाल है कि आखिर अमेरिका और ईरान के समझौते से भारत का क्या लेना-देना... असल खेल है तेल का... दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज... इसी रास्ते से खाड़ी देशों का तेल और गैस दुनिया के कई देशों तक पहुंचता है... युद्ध के दौरान इस रास्ते पर खतरा बढ़ गया था... सप्लाई प्रभावित हुई और बाजार में डर फैल गया... जैसे ही सप्लाई पर खतरा बढ़ता है... तेल के दाम ऊपर जाने लगते हैं... भारत के लिए यह रास्ता बेहद अहम है... हमारे कच्चे तेल... एलएनजी और एलपीजी का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से जुड़ा हुआ है... इसलिए जब यहां तनाव बढ़ता है... तो उसका असर सीधे भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है... अगर समझौते के बाद हालात सामान्य होते हैं... और तेल की सप्लाई फिर से सुचारू हो जाती है... तो सबसे पहले राहत पेट्रोल और डीजल में देखने को मिल सकती है... हो सकता है कि अगले ही दिन दाम कम न हों... लेकिन तेल कंपनियों पर दबाव कम होगा... और कीमतें बढ़ने का खतरा भी घटेगा... और यहीं से शुरू होता है असली फायदा... क्योंकि पेट्रोल और डीजल सिर्फ गाड़ियों में ही नहीं जलता...
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