गुलाम बनाकर रखा, 9 रुपए सैलरी बढ़ाई... दिल्ली के टेक प्रोफेशनल ने सुनाई दुखभरी दास्तां
Low Salary Issue: दिल्ली-NCR के एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने खुलासा किया कि 2 साल में उसे सिर्फ 9 रुपये का इंक्रीमेंट मिला है. इंजीनियर ने Reddit पर पोस्ट कर कंपनी की सच्चाई बताई .

- काम के बोझ और कम सैलरी के कारण नौकरी छोड़ने का मन.
Work Culture Crisis: उत्तर प्रदेश के नोएडा फेज 2 में सोमवार को कर्मचारियों ने एक निजी कंपनी के बाहर सैलरी समेत कई मांगों को लेकर प्रदर्शन किया, जहां तोड़फोड़ और पत्थरबाजी की खबरें भी सामने आई. इसी बीच दिल्ली NCR के एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने अपनी नौकरी को लेकर नाराज़गी जाहिर की है. उन्होंने बताया कि साल 2025 में उनकी सैलरी में सिर्फ 9 रुपये का इंक्रीमेंट हुआ है और इस साल उन्हें कोई इंक्रीमेंट ही नहीं मिला है. इसी कारण अब वह कंपनी छोड़ने का मन बना रहे हैं.
Reddit पर पोस्ट कर क्या लिखा?
Reddit पर लिखे एक पोस्ट में उन्होंने कहा,"मैं इस कंपनी और अपने साथियों से पूरी तरह ऊब चुका हूं." इंजीनियर ने कहा कि वह हफ़्ते के आखिर में भी "गुलामों की तरह" काम कर रहे हैं, लेकिन फिर भी उन्हें काम की जगह पर फंसा हुआ महसूस होता है. इंजीनियर ने बताया कि उन्होंने मई 2024 में एक "मशहूर MNC" में 6 महीने के लिए इंटर्न के तौर पर काम शुरू किया था, जिसके बाद उन्हें परमानेंट नौकरी मिल गई. उन्होंने कहा कि उनका शुरुआती पैकेज ₹4.25 लाख सालाना था, लेकिन हाथ में आने वाली सैलरी उम्मीद से काफ़ी कम थी. उन्होंने बताया कि उन्होंने यह ऑफ़र इसलिए मान लिया था, क्योंकि जब उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की थी, तब नौकरी का बाज़ार बहुत कमज़ोर था.
इस टेक इंजीनियर ने बताया कि इस नौकरी के साथ 2 साल का सर्विस बॉन्ड भी था, जिसके तहत अगर वह समय से पहले नौकरी छोड़ते तो उन्हें ₹1.5 लाख देने पड़ते. इसके अलावा उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को 6 महीने का नोटिस पीरियड भी पूरा करना पड़ता है, जिससे नौकरी छोड़ने के ऑपशन और भी सीमित हो जाते हैं. उन्होंने लिखा, "मुझे यह कंपनी इसलिए जॉइन करनी पड़ी, क्योंकि मेरे पास कोई और ऑपशन नहीं बचा था.
इंजीनियर ने आगे दावा किया कि उनके काम का बोझ बहुत ज़्यादा है, जिसमें ऑफ़िस के काम के साथ-साथ कंप्लायंस से जुड़े कामों के लिए क्लाइंट की जगहों पर जाना भी शामिल है. उन्होंने कहा, "मैं गुलामों की तरह काम कर रहा हूं. मुझे ऑफ़िस भी जाना पड़ता है और कंप्लायंस के लिए क्लाइंट की जगहों पर भी जाना पड़ता है." उन्होंने आगे कहा, "मेरे आने-जाने का कोई भी खर्च कंपनी नहीं उठाती है और जब मैं मेन कैंपस जाता हूं तो शटल के किराए के तौर पर मेरी सैलरी से हज़ारों रुपये काट लिए जाते हैं."
2 साल से एक ही सैलरी पर काम कर रहा हूं- इंजीनियर
इस टेक इंजीनियर ने बताया कि वह अक्सर हफ़्ते के आखिर में भी काम करते हैं, हालांकि उन्हें इसके बदले में छुट्टी मिल जाती है. लेकिन, उन्हें लगता है कि उन्हें मिलने वाली सैलरी और उनके साथ होने वाला बर्ताव, उनके की जा रही मेहनत के हिसाब से बिल्कुल भी सही नहीं है. इंजीनियर ने आगे बताया “मैं 2 साल से एक ही सैलरी पर काम कर रहा हूं. जब मैंने प्रोजेक्ट से रिलीज़ होने की कोशिश की तो उन्होंने मेरा ग्रेड बढ़ा दिया. मेरी दिक्कत यह है कि मैं अपने काम से समझौता नहीं कर सकता, भले ही मेरे वर्कप्लेस पर मेरे साथ सही बर्ताव न हो रहा हो चाहे वह पैसे की बात हो, हालात की, या बर्ताव की.”
आखिर में इंजीनियर ने कहा “मुझे ऐसा लगता है जैसे मैं एक ऐसे गड्ढे में फंस गया हूं, जिसका हर कोई फ़ायदा उठा रहा है. मुझे सच में बहुत कम सैलरी मिल रही है, मैं कुछ पैसे बचा भी नहीं पा रहा हूं और समझौता करके ज़िंदगी जी रहा हूं. मैं सच में इस सबसे बाहर निकलना चाहता हूं.”
Source: IOCL

























